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एस्ट्रोलॉजी
दीवाली के पंच पर्व, दिवाली पर कब करें लक्ष्मी पूजा? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि

जैसे नवरात्रि पर नौ दिन, दुर्गा माता के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है, ठीक उसी भांति दीवाली के अवसर पर पंचोत्सव मनाने की परंपरा है। किस दिन क्या पर्व होगा और उस दिन क्या छोटे छोटे कार्य व उपाय करने चाहिए, उसका दैनिक विवरण संक्षिप्त रुप में हम दे रहे हैं।

17 अक्तूबर को करवा चौथ में ग्रहों का कोेई संशय नहीं

पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक. चन्द्रोदय  का समय- रात्रि 8 बजकर 27 मिनट पंचांगानुसार, परंतु वास्तव में कई नगरों में यह पौने 9 से 9 बजे केे मध्य दिखेगा।

6 अक्तूबर श्री दुर्गा अष्टमी पर व्रत रखने व कन्या पूजन का समय

6 अक्तूबर, रविवार को अष्टमी सुबह 10.55 पर समाप्त हो जाएगी और नवमी आरंभ हो जाएगी जो 7 तारीख, सोमवार को दोपहर 12.38 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी शुरु होगी। 8 अक्तूबर मंगलवार को दशमी दोपहर 2.50 बजे समाप्त हो जाएगी। यदि आप व्रत रखना चाहें तो उपरोक्त समय का ध्यान रख कर कर सकते हैं।

दो से 12 सितंबर तक मनाएं श्री गणेश जन्मोत्सव, रखें सिद्धि विनायक व्रत, न करें चंद्र दर्शन

 हर मांगलिक कार्य में सबसे पहले श्री गणेश की वंदना भारतीय संस्कृति में अनिवार्य माना गया है। व्यापारी वर्ग बही खातों, यहां तक कि आधुनिक बैंकों में भी लैजर्स आदि में सर्वप्रथम श्री गणेशाय नमः अंकित किया जाता है। नव वर्ष तथा दीवाली के अवसर पर लक्ष्मी एवं गणेश जी की ही आराधना से शेष कार्यक्रम आरंभ किए जाते हैं। विवाह में लग्न पत्रिका में भी ‘श्री गणेशायनमः’ लिखा जाता है। कोई भी पूजा अर्चना, देव पूजन, यज्ञ, हवन, गृह प्रवेश, विद्यारंभ, अनुष्ठान हो सर्वप्रथम गणेश वंदना ही की जाती है ताकि हर कार्य निर्विघ्न समाप्त हो ।

जन्माष्टमी 23 या 24 अगस्त की ? ज्योतिष के अनुसार 23 अगस्त , शुक्रवार को ही जन्माष्टमी मनाना रहेगा सार्थक, श्रेष्ठ एवं शास्त्र सम्मत

लगभग हर वर्ष जन्माष्टमी के व्रत तथा सरकारी अवकाश में असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इसके कई कारण एवं ज्योतिषीय नियम हैं जिन्हें हम यहां सपष्ट कर रहे हैं और आप अपनी सुविधा एवं आस्थानुसार इस पर्व को उल्लास से मना सकते हैं। वास्तव में कृष्णोत्सव एक दिन का नहीं अपितु 3 दिवसीय पर्व है जो 23 अगस्त से लेकर 25 अगस्त तक इस वर्ष मनाया जाएगा।

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