ENGLISH HINDI Thursday, April 09, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
कोविड -19 खिलाफ जंग में डटे सेहत विभाग के अमले व सफाई कर्मियों को दिया गार्ड आफ ऑनर15000 लोगों को होम क्वारंटीन के निर्देशपुलिस द्वारा फेसबुक पर अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला गिरफ़्तारहोम क्वारंटीन की उल्लंघना करने पर एक के खिलाफ एफआईआर: डीसीडेराबस्सी में कोरोना पॉजिटिव के चार और मामले, ढिल्लों की रिपोर्ट नेगेटिव14 अप्रैल के बाद कफ्र्यू को और आगे बढ़ाने की रिपोर्टों को रद्द कियाप्रधानमंत्री श्री मोदी ने राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ किया विचार-विमर्शकोविड-19 के मद्देनजर जरूरतमंदों में वितरण हेतु केंद्रीय भंडार द्वारा निर्मित 2200 से ज्‍यादा आवश्‍यक किट्स सौंपी
जीवन शैली

बायोपिक फिल्मों की मुकम्मल पड़ताल करती है पुस्तक “बॉलीवुड बायोपिक्स - आधी हकीकत बाकी फसाना”

December 25, 2019 07:37 PM

नई दिल्ली। हिन्दी फिल्मों में नेगेटिव किरदार निभाने वाले कलाकारों पर आधारित और अमेज़न बेस्टसेलर ‘मैं हूं खलनायक’ जैसी प्रभावशाली किताब के लेखन के बाद फजले गुफरान की दूसरी किताब, “बॉलीवुड बायोपिक्स- आधी हकीकत बाकी फसाना” बायोपिक फिल्मों की मुकम्मल पड़ताल करती है। किताब में ढ़ेरों रोचक तत्वों के साथ-साथ बहुत सारी नई जानकारियां दी गयी हैं, साथ ही कई मुद्दों पर पैने अंदाज से आकलन भी किया गया है। यह पुस्तक यश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित की गई है।

• मैं हूं खलनायक के बाद लेखक फजले गुफरान की दूसरी पुस्तक “बॉलीवुड बायोपिक्स - आधी हकीकत बाकी फसाना”
• नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2020 में होगा विमोचन 

  आजादी से पहले किस तरह की बायोपिक फिल्में बना करती थीं और फिर बीते सत्तर वर्षों में किस तरह से नायकों, नई शैलियों के साथ बायोपिक फिल्मों कि बढ़ती जड़ें, दिव्य चरित्रों और प्रेरणादायी हस्तियों के चित्रण के साथ-साथ बाजार ने क्या करवट ली है, ये पढ़ना रोमांचित करता है। खासतौर से किस तरह से नई सदी के आगमन के साथ हिन्दी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के तौर तरीकों में बदलाव आया और फिर किस ढंग से महज बीते कुछ वर्षों में बायोपिक फिल्में अन्य शैलियों पर हावी होती दिखी हैं, इस पर लेखक ने बड़े ही धैर्य और विस्तार से बात की है।

लेखक फजले गुफरान बताते हैं कि हिन्दी फिल्मों के सौ वर्षों से अधिक के सफरनामे में जो कुछ देखा और महसूस किया उसे इस पुस्तक में जगह दी गई है। साल दर साल बायोपिक फिल्मों के बदलते ट्रेंड और दशक दर दशक जानकारियों की एक रिपोर्ट, ये किताब पेश करती है। यश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में अपराध की दुनिया की सच्ची कहानियों पर बनने वाली फिल्में, एतिहासिक किरदारों पर बनी फिल्में, खिलाड़ियों और खेल की दुनिया पर बनी फिल्में, साहित्य कला जगत पर बनी नई-पुरानी फिल्मों पर कटाक्ष भी समीक्षा के ज़रिये किया गया है। ये किताब फिल्म स्टडीज करने वाले छात्रों के साथ-साथ सिने प्रेमियों के लिए भी निश्चित रूप से बहुत उपयोगी साबित होगी ऐसी उम्मीद है।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और जीवन शैली ख़बरें
लॉ ग्लोबल फाउंडेशन करेगी महिलाओं को फिटनेस के प्रति सचेत,करेगी मुकाबलों का आयोजन डी'काॅट डोनियर ने बद्दी हिमाचल में खोला अपना पहला आउटलैट विशाल परमार बने मिस्टर चंडीगढ़: रीटा देवी ने जीता मिस चंडीगढ़ का खिताब इंडियाज सुपर ड्रामेबाज़ के ऑडिशन आयोजित:विजेताओं को वेब सीरीज में मिलेगा मौका मिस एवं मिसेज फिट ग्लोबल के लिए आडिशन कामकाजी महिलाओं ने "चंडीगढ़ डिवास" का गठन कर खूब मस्ती की ज़ीरकपुर में ‘ट्राइसिटी का करवा चौथ बैश’ में महिलाओं ने बिखेरे ब्यूटी के रंग ग्लोबल पेजेंट मिसेज क्वीन ऑफ़ इंडिया के दिल्ली ऑडिशन हुए संपन्न अभिनेता संजय कपूर को ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन में किया सम्मानित बदलते खान-पान से हो रहे है अनेकानेक बीमारियों से ग्रस्त: डॉ. कौशल