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कविताएँ

विधान विधि का

May 28, 2020 06:11 AM

- रोशन


वो सृजनकर्ता
कब दंडित करता है
और
कब नवाज़ता है
इसे भला
कौन जानता है
जो मानता है
वो जानता नहीं
जो जानता वो
पहचानता नहीं
जो पहचानता है
वो बोलता नहीं
देखता है
खेल सब
पहचान का है
जो पहचान गया
वो तर गया
तुरता नहीं है
बस!
इससे आगे
कोई खेल नहीं है...

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