Tuesday, 27 October 2026
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चिकित्सा लापरवाही में आईवी अस्पताल दोषी, मृतक 19 वर्षीय छात्रा गुरप्रीत कौर के परिवार को 45 लाख का मुआवजा देने के आदेश

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(MOREPIC1)संजय कुमार मिश्रा /चंडीगढ़

राज्य उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सा लापरवाही में मृतक 19 वर्षीय छात्रा गुरप्रीत कौर के परिवार को 45 लाख 40 हजार रूपये का मुआवजा दिलवाया । आयोग ने मोहाली के ईवी अस्पताल एवं उसके तीन चिकित्सक को चिकित्सा में घोर लापरवाही का दोषी पाते हुए उपरोक्त मुआवजे का आदेश दिया।

मामले के अनुसार चंडीगढ़ निवासी कविता की बेटी गुरप्रीत कौर जो बीकॉम पार्ट 1 की छात्रा थी जो पढाई लिखे में काफी अव्वल थी और IAS बनने का सपना देखती थी। 19 दिसंबर 2021 को दस्त और संबंधित लक्षणों के चलते सेक्टर 16 के सरकारी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ले जाया गया जहाँ उसका इलाज शुरू हुआ, लेकिन हालत बिगड़ने पर 20 दिसंबर को Ivy Hospital, मोहाली में भर्ती किया गया जहाँ 22 दिसंबर 2021 को उसकी मौत हो गई।

मृतक गुरप्रीत कौर की माता कविता ने चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोनों अस्पताल एवं उनके चिकित्सक के खिलाफ चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत देते हुए मुआवजे की मांग की। जिला आयोग 1 ने सभी पक्षों को सुनने के बाद शिकायत संख्या 941 ऑफ़ 2022 को ख़ारिज कर दिया की विपक्षी अस्पताल एवं चिकित्सक द्वारा चिकित्सा में कोई लापरवाही नहीं हुई थी।

जिला आयोग के निर्णय से आहत होकर मृतक की माता कविता ने चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर किया। अपील संख्या 181 ऑफ़ 2025 पर वृहत सुनवाई के बाद 11 मार्च 2026 को आयोग ने मृतक के माता को उपरोक्त मुआवजे का आदेश पारित किया। राज्य आयोग ने पाया कि अस्पताल में चिकित्सा के दौरान गंभीर लापरवाही हुई। सेंट्रल वेनस कैथेटर गलत जगह (इंटरनल जुगुलर वेन ) लगा, जो 32 घंटे तक पता नहीं चल पाया, ICU प्रोटोकॉल के अनुसार इमेजिंग से तुरंत कन्फर्मेशन जरूरी था, लेकिन यह मेडिकली इंडिफेंसिबल लापरवाही थी, जिससे इलाज प्रभावित हुआ और मरीज की हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई । आयोग ने पाया की अस्पताल में चिकित्सक ने डेंगू टेस्ट की सलाह सुबह 9.30 बजे दी थी, लेकिन सैंपल 5 घंटे बाद लिया गया और रिपोर्ट भी काफी देर से आई। डेंगू के इलाज में जल्दी डायग्नोसिस जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया जो की मानकों के खिलाफ था। प्लेटलेट्स 72,000 से 22,000 तक दो दिनों में गिरे, लेकिन मॉनिटरिंग नाकाफी रही। ट्रांसफ्यूजन रिकॉर्ड अस्पष्ट थे और डेंगू प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया गया। अस्पताल ने ब्लड और प्लेटलेट्स पहले से इंतजाम नहीं किए, परिवार को आखिरी समय पर इकट्ठा करने को बोला गया ।

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