Thursday, 22 October 2026
Breaking News
भारत-पाक सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी का समय बदला, अब रोजाना शाम 5 बजे दशहरा के पावन पर्व पर दिल्ली के स्वामिनारायण अक्षरधाम में संपन्न हुआ भव्य ‘विश्व शांति महायज्ञ’ नवरात्रि का असली सार: हर महिला के भीतर बसी शक्ति हिमालय भी देखो पिघलने लगा है........ संजौली— रामपुर के बीच 21 अक्तूबर से शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा चंडीगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कृष्ण बाल लीलाओं ने मोहा मन, इंद्रेश महाराज ने की अगले वर्ष नौ दिवसीय राम कथा की घोषणा भाजपा चंडीगढ़ के इंटेलेक्चुअल सेल ने लगाया फैदां में स्वास्थ्य शिविर आईएएस अधिकारी राकेश कुमार प्रजापति ने मुख्यमंत्री को भेंट किया अपना पहला उपन्यास ‘लाइटर दैन येस्टर्डे’  एनबीएफ ने दिव्यांजनो के साथ मिशन अपर्णा शक्ति के तहत मनाया नवरात्रि का पर्व “राम भक्तों की पुकार, चंदा चोरों को सज़ा इस बार”: अमन अरोड़ा ने श्री राम मंदिर चंदा चोरी मामले में प्रधानमंत्री मोदी से कड़ी सज़ा की मांग की
हिमाचल Trending

संवदेनशील क्षेत्रों की वहन क्षमता के आकलन के लिए समिति का गठन

Read in:Hindi

शिमला, फेस2न्यूज:
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश के पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्रों (ईको-सेंसिटिव जोन) की कैरिंग कैपेसिटी असैसमेंट यानि वहन क्षमता के आकलन के लिए राज्य स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है। इसमें पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वन, शहरी विकास, नगर एवं ग्राम योजना, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास, परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के अलावा हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, एचएफआरआई शिमला, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर नई दिल्ली, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर, जीबी पंत संस्थान कुल्लू, वाडिया हिमालयन भू-गर्भ संस्थान देहरादून और अन्य संस्थानों के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) प्रबोध सक्सेना ने इस समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश के पारिस्थितिकीय रूप से संवदेनशील क्षेत्रों की वहन क्षमता के आकलन के संबंध में विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान प्रबोध सक्सेना ने वन विभाग के अधिकारियों को प्रदेश के अधिसूचित पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्रों की सूची और इनके संबंध में अन्य आवश्यक जानकारियां अतिशीघ्र उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इन क्षेत्रों की वहन क्षमता के आकलन में पर्यावरण से संबंधित मुद्दों के अलावा आर्थिक, सामाजिक, ईको टूरिज्म, जनजातीय, वन्य जीवन, आपदा प्रबंधन और अन्य पहलुओं को भी शामिल करके एक समग्र एवं विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि प्रथम चरण में पायलट आधार पर प्रदेश के 4-5 क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर नई दिल्ली, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर, जीबी पंत संस्थान कुल्लू, वाडिया हिमालयन भू-गर्भ संस्थान देहरादून और अन्य संस्थानों की मदद ली जाएगी। इस संबंध में त्वरित कदम उठाने के लिए बैठक में एक उप समिति के गठन का निर्णय भी लिया गया।
इस अवसर पर पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक ललित जैन ने पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्रों की वहन क्षमता के आकलन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई विभागोें और संस्थानों ने अपने-अपने स्तर पर भी प्रदेश के कुछ पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्रों के बारे में अध्ययन किए हैं और इनसे संबंधित रिपोर्ट तैयार की हैं। इनके आंकड़े भी वहन क्षमता आकलन रिपोर्ट में समाहित किए जा सकते हैं। इसलिए सभी संबंधित विभाग और संस्थान ये रिपोर्ट्स एवं सुझाव उप समिति के साथ साझा करें।

0 Comments