Saturday, 24 October 2026
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पंचकूला में दिसंबर में लगेगा भव्य स्वदेशी महोत्सव 300 से अधिक स्टॉलों पर दिखेगी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत

‘विरासत के भारत’ थीम पर देशभर की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों का होगा संगम. स्थानीय व्यापार, रोजगार और भारतीय उद्यमिता को बढ़ावा देने पर रहेगा विशेष जोर, स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-समन्वयक डॉ. राजेश गोयल ने प्रेस वार्ता में साझा की रूपरेखा; नागरिकों से भारतीय उत्पाद अपनाने और स्थानीय बाजारों को मजबूत करने की अपील

पंचकूला : भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, देश की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता के संकल्प को मजबूत करने के उद्देश्य से पंचकूला में दिसंबर 2026 में भव्य स्वदेशी महोत्सव-2026 का आयोजन किया जाएगा। स्वदेशी जागरण मंच की ओर से आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देशभर के स्वदेशी उत्पादों, पारंपरिक हस्तशिल्प, भारतीय कला-संस्कृति, स्थानीय उद्यमिता और देशी उद्योगों की क्षमताओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। महोत्सव में 300 से अधिक स्टॉल लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-समन्वयक डॉ. राजेश गोयल ने प्रेस वार्ता में महोत्सव की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि स्वदेशी केवल देश में निर्मित वस्तुओं को खरीदने तक सीमित विचार नहीं है, बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा, रोजगार सृजन, राष्ट्रीय स्वाभिमान, स्थानीय उद्योगों के विकास और भारतीय संस्कृति के संरक्षण से जुड़ा व्यापक अभियान है।

इस अवसर पर मेले के प्रमुख रजनीश गर्ग, संयोजक हरिंदर मलिक और जिला प्रधान अरुण गर्ग सहित सुरिंदर गोयल तथा जे.पी. जांगड़ा भी उपस्थित रहे। सभी ने स्वदेशी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और भारतीय उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

‘विरासत के भारत’ होगी महोत्सव की खास पहचान

इस बार स्वदेशी महोत्सव की विशेष थीम ‘विरासत के भारत’ रखी गई है। इसके माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने की योजना है। देश के अलग-अलग हिस्सों की विशिष्ट कलाओं, पारंपरिक परिधानों, हस्तनिर्मित वस्तुओं और क्षेत्रीय उत्पादों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

डॉ. राजेश गोयल ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध भाषाओं, वेशभूषाओं, लोककलाओं, खानपान की परंपराओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योगों से बनती है। महोत्सव का उद्देश्य इन विशेषताओं को एक मंच पर लाकर लोगों को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ना है।

300 से अधिक स्टॉलों पर मिलेगा भारतीय उत्पादों को मंच

महोत्सव में 300 से अधिक स्टॉल लगाने की योजना है। इनमें विभिन्न श्रेणियों के भारतीय उत्पादों, स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच सीधा संपर्क बढ़ेगा तथा छोटे कारोबारियों को नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल सकेगा। आयोजकों का उद्देश्य महिला उद्यमियों, स्थानीय व्यापारियों और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करना भी है, ताकि भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।

चीन के साथ व्यापार घाटे का उल्लेख, स्वदेशी अपनाने की अपील

प्रेस वार्ता में डॉ. राजेश गोयल ने चीन के साथ भारत के व्यापार असंतुलन का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी उत्पादों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना देश की आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने और देश में निर्मित वस्तुओं की खरीद को प्राथमिकता देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक अपनी खरीदारी में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देता है, तो इसका लाभ देश के निर्माताओं, छोटे कारोबारियों, कारीगरों, श्रमिकों और युवाओं तक पहुंचेगा। छोटी-छोटी व्यक्तिगत पहल मिलकर घरेलू उद्योगों के लिए बड़ा बाजार तैयार कर सकती हैं।

हरियाणा के आईटीआई विद्यार्थियों की स्वदेशी लाइटों को मिलेगा प्रोत्साहन

डॉ. गोयल ने बताया कि स्वावलंबी भारत अभियान के अंतर्गत हरियाणा के आईटीआई विद्यार्थियों द्वारा स्वदेशी लाइटें तैयार की जा रही हैं। पंचकूला में भी इन लाइटों को लोगों तक पहुंचाने की योजना है। उन्होंने नागरिकों से दीपावली और अन्य त्योहारों पर विदेशी सजावटी लाइटों के स्थान पर भारतीय विद्यार्थियों और उत्पादकों द्वारा तैयार लाइटों को प्राथमिकता देने की अपील की। इससे विद्यार्थियों के तकनीकी कौशल, स्थानीय उत्पादन और रोजगार की संभावनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

स्थानीय बाजारों को मजबूत करना भी स्वदेशी अभियान का उद्देश्य

डॉ. राजेश गोयल ने नागरिकों से अपने शहर, सेक्टर और आसपास के बाजारों से खरीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों की आजीविका बाजार में होने वाली खरीदारी पर निर्भर करती है। स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने पर शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और अनेक परिवारों की आय को सहारा मिलता है। स्वदेशी का अर्थ केवल विदेशी वस्तुओं का विकल्प तलाशना नहीं, बल्कि देश में बेहतर उत्पाद तैयार करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना, उद्यमिता विकसित करना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना भी है।

आत्मनिर्भर भारत और भारतीय संस्कृति का संगम बनेगा महोत्सव

डॉ. गोयल ने कहा कि स्वदेशी महोत्सव-2026 आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ भारतीय सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता देगा। पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, लोककला और भारतीय जीवन-मूल्यों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा। देश के युवाओं को नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने वाले उद्यमी बनने के लिए भी प्रेरित करना आवश्यक है। घरेलू उत्पादन, तकनीकी विकास, उत्पादों की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता में वृद्धि भारत की दीर्घकालीन आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है।

मीडिया से स्वदेशी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की अपील

डॉ. राजेश गोयल ने मीडिया से आग्रह किया कि स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्यमियों और देश में निर्मित वस्तुओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी महोत्सव-2026 भारतीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और देश की आर्थिक तथा सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा। प्रेस वार्ता में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-समन्वयक डॉ. राजेश गोयल, मेले के प्रमुख रजनीश गर्ग, संयोजक हरिंदर मलिक, जिला प्रधान अरुण गर्ग, सुरिंदर गोयल और जे.पी. जांगड़ा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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