Tuesday, 21 July 2026
Breaking News
बरनाला के पास बदमाशों द्वारा फायरिंग, 2 शूटर काबू विश्व कराओके दिवस पर दिव्य कराओके सिंगिंग ग्रुप ने सजाई सुरों की महफ़िल हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने बढ़ाई राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि, अब डेढ़ लाख​ मिलेंगे, नंबरदारों और आशा वर्कर्स का मानदेय भी बढ़ाया बरनाला में निकली भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे केंदीय मंत्री चिराग पासवान, संत निरंजन दास से लिया देश और समाज कल्याण का आशीर्वाद वूमन एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी में किया किया शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन हरियाणा की करनाल नरवाल क्रिकेट अकादमी और टी.एस.एम. स्पोर्ट्स, चंडीगढ़ ने अपने लीग मैच जीते  चंडीगढ़ में श्रद्धा और भक्ति के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा,  रथ यात्रा पर निकले भगवान जगन्नाथ, उमड़ा जनसैलाब कुमारहट्टी का दुःखद हादसा और अवारा पशु एथनॉल मिश्रित ईंधन से कार हुई खराब, मारुति सुजुकी देगी नया कार: उपभोक्ता आयोग
चर्चा Trending

महाशिवरात्रि: शिव–शक्ति के मिलन और आत्मजागरण की पावन रात्रि

Read in:Hindi

(MOREPIC1) दीपक सिंह / चंडीगढ़

मशहूर टैरोट कार्ड रीडर, रेकी हीलर व नुमैरलॉजीस्ट *आचार्य शिल्पा सेठी* ने बताया कि महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह, तथा भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होने की स्मृति से जुड़ी हुई है। इस दिन को अज्ञान और अंधकार से मुक्ति व आत्मबोध का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पुराणों के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव ने अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मा और विष्णु के अहंकार का नाश किया था। यह शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि है, जहाँ सृजन, संरक्षण और संहार—तीनों शक्तियाँ संतुलन में आती हैं।

“महाशिवरात्रि” संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है “शिव की महान रात्रि”। माना जाता है कि इस दिन किया गया ध्यान, जप और साधना सामान्य दिनों की तुलना में सौ गुना अधिक फलदायी होता है। महाशिवरात्रि कैसे मनाई जाती है।

1. उपवास (व्रत): भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और मन, वचन व कर्म से शुद्धता का पालन करते हैं।

2. रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया जाता है। यह पंचामृत अभिषेक शिव कृपा प्राप्ति का विशेष माध्यम माना जाता है।

3. जागरण: रात भर जागकर ‘ॐ नमः शिवाय’ जैसे मंत्रों का जाप, शिव स्तुति और ध्यान किया जाता है।

4. मंदिर दर्शन: भारत और नेपाल में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। शिवालयों में लंबी कतारें, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन होते हैं।

महाशिवरात्रि पर क्या न करें (महत्वपूर्ण सावधानियाँ)

काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें. तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर न चढ़ाएं, गलत फूल या सूखे/टूटे बेलपत्र अर्पित न करें। शिवलिंग की परिक्रमा अधूरी न छोड़ें, बेलपत्र का उल्टा या खंडित रूप में प्रयोग न करें। दूध चढ़ाते समय गलत धातु के पात्र का प्रयोग न करें, नारियल पानी से अभिषेक न करें, तामसिक भोजन, नशा और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। किसी से वाद-विवाद न करें। सुबह पूजा के बाद दिन में न सोएं।

भगवान शिव से जुड़े पवित्र रंग हैं. सफेद, केसरिया और बैंगनी। 

काले रंग से बचना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि वह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। आभूषणों में सादगी रखें। रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि यह शिव तत्व से सीधे जुड़ा है। भगवान शिव की उपस्थिति के संकेत
कहा जाता है कि जब भगवान शिव आपके साथ होते हैं, तो उनके संकेत स्वयं जीवन में प्रकट होने लगते हैं:

कठिन परिस्थितियों में भी आंतरिक शांति और धैर्य बना रहना
सपने में शिवजी, शिवलिंग, त्रिशूल, डमरू, सर्प या अर्धचंद्र का दिखना,‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का जाप करने से गहरा सुकून मिलना, किसी बड़ी मुसीबत से अचानक बच जाना, दिव्य सुगंध (चंदन, कपूर) का अनुभव होना , नंदी महाराज के बार-बार दर्शन होना। ये संकेत बताते हैं कि शिव कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और सुरक्षा का अनुभव हो रहा है।

महाशिवरात्रि और साधना का रहस्य, मान्यता है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा, संयम और भक्ति से महाशिवरात्रि का व्रत और जागरण करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, ध्यान और शिव तत्व से एकाकार होने का दिव्य अवसर है।