Wednesday, 19 August 2026
Breaking News
चंदन गुप्ता बनीं तीज क्वीन:  हरियाली तीज उत्सव में नारीशक्ति और परंपरा का दिखा संगम जागो ग्राहक जागो - ड्यूटी पर जाते या आते समय रास्ते में दुर्घटना तो मुआवजा के लिए कंपनी जिम्मेवार, सुप्रीम कोर्ट संस्मरण: आज 67 साल का हो गया मेरा कॉलेज! काज़ीरंगा होटल परियोजना का विरोध कर रहे प्रणब डोले को जमानत के बाद NSA हिरासत, उठे सवाल ऐ मेरे प्यारे वतन... आउटसोर्स कर्मचारियों की जॉब सिक्योर पॉलिसी पर स्वास्थ्य मंत्रालय का चण्डीगढ़ प्रशासन को पत्र आयुर्वेद के पुनर्जागरण से नई पीढ़ी जुड़े: गुलाब चंद कटारिया जीएमसीएच-32 का चंडीगढ़ मॉडल बुजुर्गों में डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता को  दे रहा है बढ़ावा “विरसा पंजाब दा” तीज समारोह में सना बनी तीज क्वीन, माही और शिल्पा ने भी जीते खिताब स्वतंत्रता दिवस पर एरोफ्लाई इंटरनेशनल एविएशन अकादमी में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन
चर्चा Trending

महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का 202वां जन्मोत्सव भव्यता एवं श्रद्धा के साथ संपन्न

Read in:Hindi

शिवरात्रि, ज्ञान और आत्मबोध की रात्रि, धर्म में बढ़ती मिलावट मर्यादाओं को प्रभावित कर रही: स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती, ज्ञान, धर्म और समाज सुधार के संदेश से गूंजा आर्य समाज

फेस2न्यूज/चंडीगढ़/पंचकूला

महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 202वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में केन्द्रीय आर्य सभा के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय भव्य समारोह श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन चंडीगढ़, पंचकूला एवं मोहाली की समस्त आर्य समाजों तथा आर्य शिक्षण संस्थानों के संयुक्त प्रयास से आर्य समाज सेक्टर-9, पंचकूला में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि शिवरात्रि ज्ञान और बोध की रात्रि है। परमात्मा ने मनुष्य को भौतिक नेत्र प्रदान किए हैं, किंतु तीसरा नेत्र ज्ञान और विवेक का प्रतीक है। जब मनुष्य का ज्ञान चक्षु जागृत होता है, तब वह आत्मबोध की अवस्था को प्राप्त करता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी नश्वरता को समझते हुए परोपकार, विवेक और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। बुद्धि और विवेक से संचालित जीवन ही श्रेष्ठ समाज के निर्माण का आधार बन सकता है।महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का बाल्यकालीन नाम मूलशंकर था।

शिवरात्रि के दिन उपवास और साधना के दौरान उन्हें सच्चे शिव का बोध हुआ, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने समाज को पाखंड, कुरीतियों और आडंबरों से मुक्त होकर सत्य और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनकी महान कृति सत्यार्थ प्रकाश में सत्य, तर्क, कर्म और धर्म के सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन मिलता है, जो समाज को जागरूकता और चिंतन की दिशा प्रदान करता है।

स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती जी ने कहा कि धर्म में बढ़ती मिलावट समाज की परंपराओं और मर्यादाओं को प्रभावित कर रही है। महर्षि दयानन्द ने तर्क, प्रमाण और ज्ञान को सर्वोपरि बताते हुए वेदों को मानव कल्याण का मूल स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि कर्म ही सुख-दुख का कारण है और मनुष्य को सद्कर्म, परोपकार और पुरुषार्थ के मार्ग पर चलकर समाज के उत्थान में योगदान देना चाहिए।

विभिन्न विद्यालयों एवं आर्य समाजों को उत्कृष्ट झांकियां की प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया। केन्द्रीय आर्य सभा के प्रधान रविंद्र तलवाड़ ने कार्यक्रम में सहयोग और सहभागिता के लिए सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रविंद्र तलवाड़, योगराज चौधरी, प्रकाश चन्द्र शर्मा, वी.बी.टी. मलिक, डॉ. विनोद शर्मा, धर्मवीर बत्रा, डॉ. रमेश बावा, योगेश मोहन पंकज, योगेन्द्र क्वात्रा, स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती, स्वामी सच्चिदानंद सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।