Tuesday, 22 September 2026
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यूएनआई संवाददाता नरेश कुमार को समाजसेवी मामाश्री जयचंद जलाह की मौत से भारी सदमा

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मरहूम समाजसेवी श्री जयचंद जलाह ने देश को सौंपा था अपने बलबूते पढ़ा-लिखा कर विज्ञानिक भाई

(MOREPIC1)  बरनाला/संगरूर/कुरुक्षेत्र ( अखिलेश बंसल )

ईमानदार, दानवीर, दयालु, मेहनती, सादा व शाकाहारी जीवन व्यतीत कर पूरे परिवार को बेहतरीन तालीम देने वाले और अपने बलबूते देश को विज्ञानिक भाई सपुर्द करने वाले कौल-हरियाणा के सुप्रसिद्ध समाजसेवी जयचंद जलाह नहीं रहे हैं। जिंदगी के 92 साल गुजारने के बावजूद उनके आखरी दम तक उनके बुलंद होंसले थे। उनकी अचानक हुई मौत से उनके भानजे यूएनआई संवाददाता नरेश कुमार संगरूर को भारी सदमा पहुंचा है।

युवावस्था में समाजसेवी श्री जयचंद जलाह ने अपने अनुज भाई चरनदास जलाह में ऐसा कुछ खास देखा कि उसमें विज्ञानिक विचारधारा पैदा की, छोटे भाई के लिए श्री जयचंद जलाह गुरु बन गए, उन्हें विज्ञानिक बनने की ही तालीम दिलवाई। नतीजा यह हुआ कि डॉ. चरनदास जलाह विज्ञानिक बन गए। डॉ. चरणदास ने भारत देश के विज्ञानिकों के साथ मिलकर हैरानीजनक खोज की।

श्री जयचंद का विवाह श्रीमति राज रानी जलाह से हुआ, जिनके घर चार बेटे होनहार और दो बेटियां हुई। जिनमें से पहला बेटा डाक्टर बना, दूसरा बैंक अधिकारी बना, तीसरा बिजनेसमैन और चौथा व सबसे छोटा कृषि विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बना। जबकि हुई दो बेटियों में से एक गृहणी बनी और दूसरी अध्यापिका बनी।

यूएनआई संवाददाता नरेश कुमार संगरूर जिसे उनके मामाश्री का आशीर्वाद प्राप्त था उन्होंने बताया कि मामाश्री जयचंद जी पूरा जीवन निरोग रहे। हालांकि साल 1998 में मामीश्री की आकस्मिक मृत्यु हो गई, उसके बावजूद श्री जयचंद जी ने होंसला नही हारा, पूरे परिवार को माला के मोतियों की तरह पिरो कर रखा।

साल 2008 में जैसे ही छोटे मामाश्री चरणदास जलाह की मौत हो गई, तो उनकी मौत श्री जयचंद को सदमें में ले गई। मामाश्री जयचंद जलाह जी गत 23 दिसबंर 2022 को अचानक इस फ़ानी संसार को अलविदा कह गये। वह अपने पीछे चार बेटे, दो बेटियों के साथ भरापुरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी आत्मिक शांति के लिए श्री गरूढ़ पुराण साहिब जी के पाठ के भोग 2 जनवरी को श्री महेश्वर हनुमान मंदिर, सेक्टर 13 कुरुक्षेत्र में दोपहर 2 से 3 बजे डाले जायेंगे। गौरतलब है कि पत्रकार भाईचारा ने यूएनआई संवाददाता नरेश कुमार के मामाश्री की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना की है।