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एस्ट्रोलॉजी

महालक्ष्मी पूजा- दीवाली पर क्या करें ? दीवाली पूजन का शुभ समय सायंकाल

November 06, 2018 02:39 PM

— मदन गुप्ता ‘सपाटू’ चंडीगढ

रात्रि 19.10 से 22.30 तक रहेगा जिसमें दीपदान, महालक्ष्मी, गणेश पूजन, बही खाता पूजन, धर्म तथा गृहस्थलों, व्यापारिक सस्थानों में दीप प्रज्जवलन, परिचितों या आश्रितों को भेंट अथवा मिष्ठान आदि वितरण का शुभ समय रहेगा।
शुभ चौघड़िया-10.52 से 12.12 तक
लाभ चौघड़िया-16.10 से 17.30 तक
महा निशीथ काल- 22.52 से 25.31 तक परंतु 24.12 तक ही शुभ समय।
इस बार अमावस्या दीवाली की रात्रि 09.32 मिनट तक ही रहेगी।

घर की साफ सफाई करें। प्रवेश द्वार पर घी और सिंदूर से ओम या स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
सायंकाल खीलें, बतासे, अखरोट, पांच मिठाई, कोई फल पहले मंदिर में दीपक जला कर चढ़ाएं।
दीवाली वाले दिन मिट्टी या चांदी की लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदें। एक नया झाड़ू लेकर किचन में रखें।
लक्ष्मी पूजन करें
बहियों, खातों, पुस्तकों, पैन,स्टेशनरी, तराजू, कंप्यूटर या वो वस्तु जिसे आप रोजगार के लिए प्रयोग करते हैं उनकी पूजा करें।
दीवाली पूजन की सामान्य विधि
स्नान करें, पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें और कोई दरी या कंबल बिछा लें। द्वार पर रंगोली बना लें। थाली में अष्ट दल बना के नव ग्रहों की आकृति आटे से बना के, लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित करें। आवाहन करें। अक्षत, पुष्प, अश्टगंध युक्त जल अर्पित करें। दिशा रक्षण के लिए बाएं हाथ से पीली सरसों लेके दाएं हाथ में ढक के चारों दिशाओं में फेंकें।
गणेश जी, लक्ष्मी जी व सरस्वती जी की मूर्तियां रखें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछा के थाली रखें। क्लश,धूप दीप रखें। क्लश में जल भर कर उसमें गंगाजल, थोड़े से चावल, एक चांदी या प्रचलित सिक्का डाल दें। क्लश पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें। पानी वाले नारियल पर 3 या 5 चक्र कलावा या मौली बांधकर क्लश पर रख दें। गणेश जी व लक्ष्मी जी तथा श्रीयंत्र रखें। केसर, चंदन से स्वास्तिक बना के गणेश जी, लक्ष्मी जी व श्रीयंत्र को स्थापित करें। लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाएं रखें। गणेश जी पर अक्षत-पुश्प चढ़ाएं। पंचामृत-दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान कराएं फिर जल डालें। फिर मौली, जल, चंदन, कुंकुम, चावल, पुष्प दूर्वा, सिंधूर, रौली इत्र, धूप दीप, मेवे प्रसाद फल पान, सुपारी लौंग, इलायची व द्रव्य- 11 रुपये बारी बारी चढ़ाएं। दूध, दही, घी, मधु, शक्कर पंचामृत, चंदन, गंगा जल से प्रतिमा को स्नान करवाएं।वस्त्र, उप वस्त्र, आभूशण, चंदन,सिंदूर, कुंकुम, इत्र, फूल आदि समर्पित करें। लक्ष्मी जी की प्रतिमा के हर अंग को पुश्प से पूजें।

इस मंत्र का जाप करते जाएं:
ओम् श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
तेल का एक चौमुखी दीपक और 21 छोटे दीपक जलाएं। आचमन करें। प्रथम मूर्तियों पर तिलक लगा कर फिर अपने व अन्य सदस्यों के कलावा बांधें, तिलक लगाएं। गुरु तथा लक्ष्मी जी का ध्यान करें। मूर्तियों पर चावल, पान, सुपारी, लौंग, फल, कलावा,फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं। अक्षत-पुश्प दाहिने हाथ में लेके पृथ्वी तथा नव ग्रहों- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु, कुबेर देवता, स्थान देवता, नगर खेड़ा वास्तु देवता , कुल देवी या देवता का आवाहन करें। हाथ जोड़ के गणपति व अन्य देवी देवताओं को नमस्कार करें। संकल्प लें।

देहली पूजनः
प्रवेश द्वार पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं या ओम गणेशाय नमः या शुभ लाभ लिखें।दिया जलाएं।
लेखनी पूजन
पैन, स्टेशनरी, कंप्यूटर, कैल्कुलेटर, बही, खाते आदि पर केसर युक्त चंदन से स्वास्तिक बनाएं, मौली लपेटें, सरस्वती जी का ध्यान करें। धूप दीप करें। विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, नोट बुक पर भी ऐसा ही करें। जो छात्र कंपीटीशन में बैठ रहे हैं या परीक्षा दे रहे हों, हम से भी कलम पूजन इस अवसर पर करा सकते हैं।
कुबेर पूजन
तिजोरी, कैश बाक्स, लाकर आदि पर स्वास्तिक चिन्ह बना के कुबेर को नमस्कार करें और धन की कामना करें।
तुला, मानक, कंप्यूटर, नोट काउंटिंग मशीन पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं, शुभ लाभ लिखें, मौली लपेटें, पूजन करें
दीप माला
5 या 7 या 11 दीपक प्रज्जवलित करें। लक्ष्मी गणेश जी की आरती करें। आरती की कैसेट, सी.डी या पैन ड्राइव का प्रयोग भी कर सकते हैं। इन दीपकों को घर के कोने कोने में रखें। एक मंदिर मे जला आएं।
प्रसाद बाटें
खीलें, गुड़ के बने खिलौने ओर सूखे मेवे।
श्री यंत्र अभिमंत्रण, किसी यंत्र का निर्माण व लेखनी पूजन विशेष मुहूर्त में करें
हवन करें -
पूजा के पशचात् हवन एवं आरती कर सकते हैं।
विशेष: दीवाली पर जलता हुआ दीपक भूल से भी न बुझाएं।

दीवाली के दिन विभिन्न समस्याओं के लिए ये प्रयोग भी कर सकते हैं-
अपना पर्स बदल लें। उसमें लाल रंग के लिफाफे में एक कागज पर अपनी मनोकामना जैसे विवाह, नौकरी, धनागमन आदि लिख कर रखें।
1.दद्रिता निवारणः- 21 काले, अभिमंत्रित हकीक जमीन में गाड़ दें।-शनिवार
2.आर्थिक उन्नतिः- 27 पीले अभिमंत्रित हकीक, घर के मंदिर में पीले कपड़े में बांध के रखें,-वीरवार
3.विजय ,परीक्षा,प्रतियोगिता ,कोर्ट केस: 11 हरे हकीक दुर्गा /माता के मंदिर में रख आएं ।-मंगलवार या बुधवार
4- घर क्लेश -दो नीले हकीक घर के किसी कच्चे भाग में दबा दें।
5. धन वृद्धि -एक लाल हकीक तिजोरी में रखें।
6.- बच्चे को नजर /डरना- एक नीला हकीक चांदी के लाकेट में बनवा के पहनाएं-शनिवार
7.- संतान की सुख समृद्धि- 19 पीले हकीक उजाड़ जगह फेंक दें ।

कुछ अन्य उपाय व मंत्र
ऋण मुक्तिः स्फटिक की माला से इस मंत्र का जाप करें।
ओम् नमो हृीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं चिन्ता दूर करोति स्वाहा !!
विद्या हेतुः ओम् ऐं क्रीं ऐं ओम् का 21 बार जाप करें।
नौकरी प्राप्तिः ओम् हृीं कार्य सिद्धि ओम नमः का जाप पंचपर्व में करें ।
शत्रु शमन के लिए: ओम क्लीं हृीं ऐं शत्रुनाशाय फट् का तीन दिन जाप एक एक माला करें।
कोर्ट केसःओम् हूं हूं शत्रुस्तंभनं ठः ठः स्वाहा का 31 बार जाप करें ।

दीवाली पर कुछ उपा
ऋण न लौटाने वाले का नाम कोयले की राख या काजल से भोजपत्र पर लिख कर एक पत्थर के नीचे दबा दें।
धन वृद्धि हेतु ,चांदी की गोल डिब्बी में , शहद व नागकेसर भरकर धन स्थान पर रख दें।
घर की नजर उतारने के लिए,एक नारियल और खीर हाथ में लेकर पूरे घर की परिक्रमा करके प्रवेश द्वार पर तोड़ कर खीर वहीं रख दें।
चौथा दिन- गोवर्धन पूजा , अन्नकूट एवं पंजाब में विश्वकर्मा दिवस- 8 नवंबर ,गुरुवार,

अन्नकूट पर क्या करें?
इस दिन चांद नहीं देखना चाहिए।प्रातः तेल मल कर नहाएं। आज के दिन मंदिर में अन्न दान करने से घर में खाद्य पदार्थो की कमी नहीं होती।समृद्धि की प्रतीक गाय का पूजन करें, बैल या अन्य पालतू पशुओं को तेल मल कर नहलाएं।गायों को मिश्ठान दें।सायं काल दैत्यराज बलि का पूजन कर सकते हैं।

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