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कैसा रहेगा 30 अप्रैल से 18 सितंबर तक शनि का वक्रीय होना आप और देश के लिए ? क्या शनि मोदी को सत्ता प्रदान करेगा ?

April 12, 2019 01:33 PM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़, 9815619620

इस माह के अंतिम दिन 30 अप्रैल 2019 को शनि धनु राशि में वक्री हो जाएगा। ये ग्रह 18 सितंबर2019 तक वक्री रहेगा। 

शनि का राशि परिवर्तन ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म, सेवा,नौकरी और लोकतांत्रिक संस्थाओं का कारक माना जाता है। इसलिए यह मनुष्य के करियर व आजीविका को प्रभावित करता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को सूर्य पुत्र, शनिश्चर, छायापुत्र और मंद आदि नामों से जाना जाता है। यह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। सूर्य, चंद्रमा और मंगल को शनि शत्रु मानता है। जबकि बुध और शुक्र को मित्र व बृहस्पति के साथ सम भाव रखता है।

शनि वर्ष 2019 में धनु राशि में ही स्थित रहेगा। इस दौरान 30 अप्रैल को शनि वक्री गति करेगा और 18सितंबर को धनु राशि में पुनः मार्गी हो जाएगा। इसी वर्ष शनि 20 जनवरी तक अस्त रहेगा यानि उसका प्रभाव कम हो जाएगा। वहीं साल के अंत में 27 दिसंबर को शनि पुनः अस्त होगा और 31 जनवरी 2020 तक इसी स्थिति में रहेगा। इस साल शनि ज्यादातर समय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेगा और 27 दिसंबर 2019को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

कैसा रहेगा वक्री शनि भारत के लिए ?

अप्रैल -मई में 17 वीं लोकसभा के चुनावों में शनि की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। प्रधान मंत्री की जन्म तिथि 17  होने के कारण मूलांक भी 8 ही है। भाग्यांक 5 है ओर 5वें महीने में ही चुनाव परिणाम आएंगे।इस दौरान शनि, केतु और गुरु ,धनु राशि में रहेंगे। ये तीनों ग्रह 24 जनवरी ,2020 तक एक ही घर में रहंेगे औेर भारत की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन लाएंगे। जिनका शनि बलवान है और शनि की साढ़सती भी चल रही है, उनके जीवन में इन तीनों ग्रहों का यह योग, एक वरदान सिद्ध होगा।  यदि लोकसभा के पिछले चुनावों पर नजर दोैड़ाएं तो 1962, 1984, 1996 के चुनावों में शनि व केतु एक साथ थे और  तत्कालीन  सत्ता पक्ष को फायदा हुआ था।

इस साल 2019 मे वही पोजीशन है। अतः यह कहा जा सकता है कि वर्तमान पार्टी पुनः सत्ता में आ सकती है।  इसके अलावा ज्योतिष में राजा की कुंडली बहुत अधिक महत्व रखती है। यदि राजा का भाग्य कमजोर है तो सत्ता छिन जाती है या छत्रभंग हो जाता है। वर्तमान संदर्भ में प्रधान मंत्री की कुंडली देखी जाएगी जो अत्यंत सशक्त है।  शनि, मोदी का प्रबल ग्रह है औेर  शनि का अंक 8 उससे भी जोरदार। नव संवत 2076 का राजा भी शनि है और नया संवत शनिवार को ही आरंभ हुआ है। मोदी की बृश्चिक राशि में साढ़सती भी चल रही हेै। तीनों ग्रह दूसरे भाव मेंहैं और भाग्य भाव के स्वामी  चंद्रमा की दशा चल रही है जो लग्न में विराजमान है। यह एक सशक्त योग है जो पुनः प्रधानमंत्री बनाएगा। 

वक्री होने पर चंद्र राशि के अनुसार आपके कार्यक्लापों पर केैसा पड़ेगा प्रभाव ? 

वक्री यानी ये ग्रह उल्टा चलने लगेगा। इसके बाद 18 सितंबर को शनि फिर से मार्गी हो जाएगा और सीधा चलने लगेगा। धनु राशि के शनि की वजह से वृष और कन्या राशि पर ढय्या रहेगी। वृश्चिक,धनु और मकर राशि पर साढ़ेसाती का असर रहेगा। ये राशिफल चंद्र राशि के आधार पर बताया जा रहा है... 

मेष : शनि दशम और एकादश भाव का स्वामी है। ये भाव क्रमश: व्यवसाय, आमदनी, वृद्धि और कर्म आदि से संबंधित हैं। संयम के साथ काम लेना होगा। जून महीने तक आपके करियर की रफ्तार थोड़ी सुस्त रह सकती है। जून से अक्टूबर के बीच करियर और आय में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अक्टूबर के बाद परिस्थितियां बदल जाएगी और आपको भाग्य का साथ मिलेगा। आप किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा में विजयी होंगे। साथ ही आप अपने विरोधियों को हरा देंगे।

उपाय: गाय को घी लगी रोटी खिलाएं।

वृषभ: इस राशि पर शनि की ढय्या रहेगी। वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है। खर्चों में बढ़ोतरी होगी। घर-परिवार में क्लेश हो सकता है, अशांति के कारण काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। धैर्य से काम लेंगे तो बुरा समय दूर हो सकता है।

शनि नवम और दशम भाव के स्वामी हैं। ये भाव भाग्य, प्रसिद्धि, व्यवसाय और कर्म से संबंधित होते हैं। करियर के लिए अच्छा रहने वाला है। निवेश के लिए यह समय बिल्कुल सही नहीं होगा। धन हानि हो सकती है। बच्चों की शिक्षा पर भी आपको अधिक ध्यान देने की जरुरत होगी। बेवजह के विवादों से बचने की कोशिश करें । पिता के साथ अच्छे संबंध बनाये रखें और उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

उपाय: काले कपड़े और जूते का दान करें।

मिथुन: शनि अष्टम और नवम भाव का स्वामी है। ये भाव दीर्घायु, बड़े परिवर्तन, भाग्य और प्रसिद्धि से संबंधित होते हैं। मिथुन राशि के जातकों के लिए लाभकारी रहने वाला है। विवादों का अंत हो जाएगा। कानूनी मामलों में यह साल आपके लिए अच्छा रहने वाला है। फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। निवेश के लिए भी बेहतर रहने वाला है। दोस्तों और परिजनों के साथ अच्छा वक्त गुजारेंगे। माता जी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।

उपाय: मध्य अंगुली में काले घोड़े की नाल की अंगूठी पहनें।

कर्क: शनि सप्तम और अष्टम भाव के स्वामी हैं। सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी से संबंधित होता है जबकि अष्टम भाव बड़े परिवर्तन और दीर्घायु का प्रतिनिधित्व करता है। विवादों से बचने की कोशिश करें। लगातार यात्राएं करनी पड़ सकती है। मानसिक तनाव का सामना भी करना पड़ सकता है। कटु भाषा का इस्तेमाल न करें वरना विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। विषम परिस्थितियों में संयम के साथ काम लें भाई-बहनों को आपकी मदद की जरुरत पड़ सकती है। घर या कार्यस्थल पर बेवजह के काम और विवादों में उलझने से बचें। आपको बेहतर प्रबंधन के साथ चलना होगा।

उपाय: पक्षियों को सात तरह के अनाज खिलाएं।

सिंह:शनि षष्ठम और सप्तम भाव के स्वामी हैं। कुंडली में छठा भाव संघर्ष, शत्रु और रोग से संबंधित होता है। वहीं सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी को दर्शाता है। खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। यह साल बिजनेस के लिहाज से एकदम अच्छा रहने वाला है। नौकरी पेशा जातकों को इस वर्ष पदोन्नति की सौगात मिल सकती है या आपको नई नौकरी का ऑफर मिलने की भी संभावना है। जो पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें इस वर्ष कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। अविवाहित हैं या आपका प्रेम प्रसंग चल रहा है तो इस साल आप शादी के बंधन में बंध सकते हैं।

उपाय: पीपल के पेड़ के नीच सरसों के तेल का दीया जलाएं।

कन्या: ढय्या की वजह से इस साल नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। धन-संपत्ति से लाभ हो सकता है। घर-परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। यात्राएं होंगी। वाहन पर खर्च होगा।कन्या राशि वालों के लिएशनि पंचम और षष्ठम भाव के स्वामी हैं। ये भाव क्रमशः शिक्षा, पितृत्व, रोग,संघर्ष और शत्रुओं से संबंधित होता है। निवास स्थान में परिवर्तन कर सकते हैं। करियर के क्षेत्र में भी उन्नति और वृद्धि देखने को मिलेगी। किसी भी तरह का निवेश करने से बचें। वहीं प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में भी विवाद की स्थिति बन सकती है। इससाल तमाम चुनौतियों के बीच छात्रों को बड़ी सफलता मिलने की संभावना है। ईश्वर की भक्ति और सत्संग ार्यक्रमों में शामिल होने आपके लिए लाभकारी हो सकता है।

उपाय: शनिवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।

तुला: शनि चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामी हैं। ये भाव क्रमशः मॉं, हर्ष, वाहन, शिक्षा, पितृत्व आदि से संबंधित होते हैं। शनि योग कारक ग्रह है, जो कि आपके लिए लाभकारी है। छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं। अपने बिजनेस को विस्तार देने की योजना बना सकते हैं। निवेश करने से बेहतर रिटर्न प्राप्त होंगे। आमदनी और खर्च दोनों में बढ़ोत्तरी होगी। लंबी यात्रा पर जाने की संभावना भी बन रही है।

उपाय: बंदर को लड्डू खिलाएं।

वृश्चिक: वृश्चिक राशि के लिए शनि की साढ़ेसाती धन लाभ दिला सकती है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। पुराने समय से अटके हुए काम इस साल पूरे हो सकते हैं। शनि तृतीय और चतुर्थ भाव के स्वामी हैं। ये भाव जीवन में प्रयास, मॉं, भाई-बहन, संचार और हर्ष से संबंधित होते हैं।  करियर में बेहतरअवसर मिल सकते हैं या फिर कामकाज के सिलसिले में आपको विदेश यात्रा करने का अवसर भी मिलसकता है। परिवार से जुड़े विवाद और मामलों में न उलझें। अपने प्रियजनों से दूर रहना पड़ सकता है।विभिन्न माध्यमों से उनके साथ संपर्क बनाये रखने की कोशिश जारी रखें।

उपाय: रोगियों की सेवा करें।

धनु:  शनि की साढ़ेसाती शुभ रहने वाली है। भूमि-भवन का लाभ मिल सकता है। घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलेगा। शासकीय कार्यों में बाधाएं आएंगी, लेकिन धैर्य से काम लें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।द्वितीय और तृतीय भाव भाषा, धन, परिवार, भाई-बहन, प्रयास और संचार से संबंधितहोते हैं। शनि आपकी ही चंद्र राशि में गोचर कर रहा है और इसका आपके जीवन पर गहरा प्रभाव होगा।संभावना है कि जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते प्रभावित हो जाएं, वैवाहिक जीवन में होने वाले हर विवाद कोशांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं। जीवनसाथी को सेहत संबंधी समस्याओं से परेशानी हो सकती है, इसलिए उनका विशेष ध्यान रखें।

उपाय: मांसाहार और शराब के सेवन से परहेज करें।

मकर

शनि की साढ़ेसाती मकर राशि के लिए चिंताएं बढ़ाएगी। धन संबंधी कामों में नुकसान हो सकता है। यात्रा में हानि होने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। घर-परिवार में क्लेश हो सकता है। अनावश्यक विवादों से दूर रहेंगे तो अच्छा रहेगा।शनि लग्न और द्वितीय भाव के स्वामीहैं। कुंडली में लग्न और द्वितीय भाव चरित्र, दीर्घायु, व्यक्तित्व, परिवार, धन और भाषा से संबंधित होते हैं।छात्र हैं तो इस वर्ष उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा सकते हैं। विदेश यात्रा पर जाने की संभावना भी बन रही है।ये यात्रा कामकाज या अन्य कार्य के सिलसिले में हो सकती है। नौकरी पेशा जातकों का प्रमोशन संभव है। वहींकार्यस्थल पर आपकी मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कानूनी विवाद से दूर रहने की कोशिश करें।

उपाय: जटा वाले नारियल नदी में प्रवाहित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

कुंभ

शनि कुंभ राशि के लिए लग्न और द्वादश भाव का स्वामी है। द्वादश भाव हानि, खर्च, चिकित्सा और शयन सुख से संबंधित होता है। वहीं लग्न यानि प्रथम भाव मनुष्य के चरित्र, दीर्घायु और व्यक्तित्व को दर्शाता है। कार्यस्थल पर अनेक अवसर मिलेंगे। यह समय आपके लिए हर मामले में बेहद शुभ साबित होगा। पहले की तुलना में आप स्वयं को अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। आपका झुकाव आध्यात्मिक कार्यों की ओर बढ़ेगा। कोई बड़ा धन लाभ होने की संभावना है। इस दौरान कुछ नया होने की संभावना कम है।

उपाय: मंदिर में सरसों के तेल का दान करें।

मीन

मीन राशि के लिए शनि एकादश और द्वादश भाव के स्वामी हैं। एकादश भाव सफलता, वृद्धि और आय से संबंधित है। वहीं द्वादश भाव हानि, खर्च, रोग और शयन सुख को दर्शाता है। निवेश के लिए यह समय न तो अच्छा है और न बुरा है। इस साल नौकरी में परिवर्तन करना आपकी प्रोफेशनल ग्रोथ के लिए अच्छा सिद्ध होगा। देश-विदेश की यात्रा कर सकते हैं। आय की तुलना में आपके खर्च बढ़ सकते हैं । जीवनसाथी के साथ बेवजह का विवाद करने से बचें दोस्तों या परिजनों के साथ छुट्टी पर जाने के लिए यह समय बेहद अच्छा सिद्ध होगा।

उपाय: शनिवार के दिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्,196 सैक्टर 20ए , चंडीगढ़,

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