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खास खबर-महाराजा रणजीत सिंह की कांस्य प्रतिमा का लाहौर में किया जा रहा अनावरण

June 26, 2019 10:57 PM

महाराजा रणजीत सिंह की 180 वीं पुण्यतिथि पर 7 फीट ऊंची व चार धातुओं से तैयार की प्रतिमा का होगा अनावरण समारोह

अखिलेश बंसल, बरनाला

पाकिस्तान के लाहौर में गुरुवार को महाराजा रणजीत सिंह की घोड़े की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। जो कि महाराजा की 180वीं पुण्यतिथी को समर्पित होगा। गौर हो कि आम सांस्कृतिक विरासत की ओर से अविभाजित पंजाब के युग से ऐतिहासिक क्षणों को याद करते हुएएक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बता दें कि रणजीत सिंह को एक बहादुर सिख शासक के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने 38 वर्षों तक पंजाब पर शासन किया था।

 प्रतिमा का अनावरण लाहौर के किले में किया जाएगा। जिसे वॉल्ड सिटी आफ लाहौर अथारिटी (डब्ल्यूसीएलए) द्वारा तैयार कर रखा जाएगा। इस प्रतिमा को ब्रिटेन स्थित इतिहासकार और सिख खालसा फाउंडेशन (एसकेएफ) के प्रमुख बॉबी सिंह बंसल ने प्रायोजित किया है। प्रतिमा को पूरा करने में लगभग 8 महीने लगे हैं। डब्ल्यूसीएलए द्वारा भेजे गए एक्सप्रेस रिलीज के अनुसार 85 प्रतिशत कांस्य, 5 प्रतिशत टिन, 5 प्रतिशत सीसा और 5 प्रतिशत जिस्त धातुएं है। पाकिस्तान के कलाकारों द्वारा बनाई गई प्रतिमा 7 फीट ऊंची है। प्रतिमा को लाहौर किले में महारानी जिंदान की हवेली के पास रखा जा रहा है।

निदेशक संरक्षण और योजना डब्ल्यूसीएलए नजाम साहिब द्वारा रिलीज की गई जानकारी के अनुसार कि यूनाइटेड किंगडम (यूके) के सिख समुदाय ने इस प्रतिमा के लिए डब्ल्यूसीएलए से संपर्क किया था और यह मामला विरासत संरक्षण बोर्ड के समक्ष पेश हुआ था, जिसने इसे मंजूरी दी थी।

इतिहासकार बॉबी सिंह बंसल द्वारा घोड़े पर महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा की परिकल्पना पंजाब के इतिहास को बढ़ावा देन, विशेष रूप से पाकिस्तान में सिख संस्कृति, विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की थी।

पंजाब के समृद्ध इतिहास के बीच दोस्ती व एकता की प्रतीक बनने वाली महाराजा की प्रतिमा इतहिासकार बॉबी सिंह बंसल द्वारा पाकिस्तान के लोगों को उपहार में दिया जा रहा है।

उल्लेखणीय है कि 19 नवंबर, 1780 को पाकिस्तान के गुजरांवाला में पैदा हुए रंजीत सिंह ने 1801 से 27 जून, 1839 को लाहौर में अपनी मृत्यु तक पंजाब पर शासन किया। उन्हें शेर-ए-पंजाब के रूप में माना जाता है। माना जा रहा है कि महाराजा रणजीत सिंह की 180 वीं पुण्यतिथि पर प्रतिमा का अनावरण समारोह एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जो पंजाब में मौजूद समृद्ध विरासत से अनजान लोगों पर एक स्थायी छाप छोड़ेगा।

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