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एस्ट्रोलॉजी

चंद्र ग्रहण- 16/17 जुलाई को, जानें पौराणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण

July 08, 2019 06:03 PM

— मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़
16 जुलाई को खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। पूरे भारत के लोग यह चंद्र ग्रहण देख सकेंगे। 16 जुलाई को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण की अवधि करीब तीन घंटे तक रहेगी। 16 की रात करीब 1.32 बजे ग्रहण की शुरुआत होगी और रात 3 बजे तक ग्रहण का मध्य रहेगा और सुबह 4.30 बजे ग्रहण का मोक्ष होगा।
16 जुलाई को पड़ने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारतीय राजनीति पर पड़ सकता है। जिससे राजनीति के वो लोग जिनकी राशि मेष, वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु व मकर है, उन्हें फायदा होगा। यह चंद्र ग्रहण मंगलवार और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में पड़ रहा है। इसके प्रभाव से राजनीतिक उथल-पुथल के साथ ही प्राकृतिक आपदा की स्थिति बनने की संभावना है।
- ग्रहण स्पर्श- रात्रि 1 बजकर 31 मिनट - [ 16 जुलाई की रात/ 17 की सुबह तक]
-ग्रहण मध्य- 3 बजकर 01 मिनट
- ग्रहण समाप्त-4 बजकर 30 मिनट
-कुल अवधि- 3 घंटे
-सूतक- 16 जुलाई ,मंगलवार की सायं 4 बजकर 31 मिनट पर आरंभ हो जाएगा।
कहां कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
यह ग्रहण संपूर्ण भारत के अलावा, अधिकतर यूरोप, नार्वे, स्वीडन, फिनलेैंड, एशिया, दक्षिणी अमरीका, पूर्वी आस्ट्रे्लिया, न्यूजीलैंड का पूर्वी भाग, कोरिया, उत्तर - पूर्वी चीन, पेरु, अर्जण्टीना आदि में भी दिखाई देगा। अतः जिन भारतीयों के संबंधी इन देशों में प्रवासी हैें, उन्हें सूचित कर सकते हैं।
ज्योतिषीय योग
इस बार आषाढ़ी पूर्णिमा 16 जुलाई को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, वैधृति योग, विशिष्ट करण तथा धनु राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। ग्रह गोचर की दृष्टि से देखें तो इस दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा धनु व मकर राशि में चंद्र ग्रहण होने से अतिवृष्टि के साथ कहीं-कहीं प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति निर्मित होगी। ग्रहों की दृष्टि से देखें तो यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में चंद्र-केतु-शनि की त्रिग्रही युति के साथ हो रहा है। यही नहीं इसका समसप्तक दृष्टि संबंध मिथुन राशि स्थित सूर्य, राहु व शुक्र की त्रिग्रही युति से बन रहा है। ग्रह युतियों में देखें तो दोनों युतियों में चार ग्रह राहु-केतु से पीड़ित हैं। इसका असर प्राकृतिक, सामाजिक व राजनीतिक प्रभावों को दर्शाएगा।
खगोलशास्त्र में क्या होता है चंद्र ग्रहण?
जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है तो उस खगोलीय स्थिति को चंद्र ग्रहण कहते हैं। ऐसा तभी संभव हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में हों। तो इस तरह चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा को ही घटित हो सकता है। चंद्र ग्रहण शुरू होने के बाद यह पहले काले और फिर धीरे-धीरे लाल रंग में बदल जाता है। सूर्य ग्रहण को आप आंखों पर बिना किसी सुरक्षा के नहीं देख सकते हैं। वहीं इसके उलट चंद्र ग्रहण को आप बिना किसी सुरक्षा के देख सकते हैं।
ग्रहण काल में रखें ये सावधानियां:
गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण का असर
माना जाता है कि किसी भी ग्रहण असर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर होता है। क्योंकि ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा काफी ज्यादा रहती है। ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला गया हो। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान सुई धागे का प्रयोग भी वर्जित है। ग्रहण काल के दौरान भगवान का नाम लेने के अलावा कोई दूसरा काम न करें।
- ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।
- ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
- ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि चंद्र ग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।
- ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
ग्रहण का प्रभाव
· चंद्र ग्रहण का प्रभाव शासन की कार्यप्रणाली में परिवर्तन के रूप में दिखाई देगा। अधिकारियों में कार्य का परिवर्तन होगा। सरकार में परिवर्तन होगा।
· चंद्र ग्रहण की युति का मंगल बुध से षड़ाष्टक योग बनेगा। मैदिनी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस प्रकार की ग्रह स्थिति जलवायु परिवर्तन के लिए खास है।
· चंद्रमा की राशि कर्क में मंगल तथा बुध का गोचर वर्षा ऋतु के चक्र को प्रभावित करेगा।
· धनु राशि में ग्रहण होने के कारण इस राशि वाले विशेष रूप से प्रभावित होंगे।
· सोने की कीमत में होगी वृद्धि
· प्राकृतिक आपदाओं, आगजनी, दुर्घटनाओं, मानसिक तनावों में वृद्धि।
पंजाब सरकार में उथल- पुथल की संभावना, केंद्र में मंत्रियों के काममाज में परिवर्तन।
दक्षिण भारत की सरकारों में फेर बदल।
डाक्टरों और बिल्डरों को परेशानी रहेगी।
आपकी चंद्र राशि के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव क्या होगा?
मेष- चंद्र ग्रहण का बुरा असर पड़ सकता है. अपने छोटे से छोटो कामों के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है साथ ही स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है. इन मुसीबतों से बचने के लिए गुड़ और मसूर की दाल दान करें.
वृष -अपनी सेहत और संतान पर किसी तरह की कोई मुसीबत आने से बचाने के लिए चंद्र ग्रहण का सूतक लगने से पहले ही श्री सूक्त का पाठ करें. इसके अलावा मंदिर में दान करना न भूलें.
मिथुन - कई तरह की मुसीबतें आ सकती हैं. ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए इस दिन गाय को पालक या घास खिलाएं. इसके अलावा वो किसी गऊशाला में जाकर चारा आदि दान कर सकते हैं.
कर्क - ये चंद्र ग्रहण अशुभ है. इसकी वजह से घर में आपसी झगड़ और परिवार में मनमुटाव आ सकता है. साथ ही स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है. भगवान शिव की पूजा करें.
सिहं - अशुभ परिणामों से बचने के लिए गायत्री मंत्र के 21 माला का जाप करें. इसके अलावा ग्रहण लगने के समय मंत्र का भी जाप करें.
कन्या - कन्या राशि के लोगों पर ग्रहण का अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देखने को मिलेंगे. बुरे प्रभाव से बचने के लिए उपाय के रूप में किसी भी किन्नर को हरे रंग का चूड़ियां दान करें.
तुला -तुला राशि वालों के लिए चंद्र ग्रहण शुभ होगा। चारों तरफ से फायदा मिल सकता है। हालांकि उसका धन ज्यादा जरूर खर्च हो सकता है। श्री सूक्त के 11 पाठ जरूर करें।
वृश्चिक - बुरे प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण लगने से पहले हनुमान जी की आराधना करें. उसे ग्रहण से पहले मंदिर पहुंचकर हनुमान जी के सामने घी के दिए जलाने चाहिए
धनु -ग्रहण का बुरा असर पड़ सकता है और उसके जीवन में कई तरह की मुसीबतें आ सकती हैं. परिवार और जीवनसाथी के संग दूरियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में ग्रहण के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें गाय को हरा चारा जरूर खिलाए.
मकर - ग्रहण का प्रभाव काफी गलत यानि की बुरा होने वाला है. स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और घर – परिवार में लड़ाई झगड़े हो सकते हैं. ग्रहण के दौरान सुंदरकांड का पाठ जरूर करें और काले तिल का भी दान करें.
कुंभ - तनाव बढ़ सकता है. शारीरिक संबंधित मुश्किलें आ सकती हैं. हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें.
मीन -मीन राशि के लोगों के चंद्र ग्रहण शुभ साबित हो सकता है. इस दिन इन राशि के लोगों का हर जगह से शुभ समाचार मिल सकते हैं. नौकरी और बिजनेस में तरक्की मिल सकती है. अपने दिन को और भी शुभ बनाने के लिए मीन राशि के लोग इस दिन विष्णु भगवान की पूजा जरूर करें और गरीब बच्चों में केले बांटें.
ग्रहण संबंधी पौराणिक और वैज्ञानिक मान्यताओं में मतभेद
हिंदू धर्म में ग्रहण को राहु-केतु नामक दो दैत्‍यों की कहानी से जोड़ा जाता है और इसके साथ ही कई अंधविश्‍वास भी इससे जुड़ जाते हैं।
हिंदू धर्म में ग्रहण शब्‍द को बहुत ही बुरा माना गया है। दो तरह के ग्रहण होते हैं, सूर्य ग्रहण और या चंद्र ग्रहण। इन दोनों ही ग्रहण को लेकर हिंदू धर्म में कई सारे मिथ हैं। ग्रहण शब्‍द ही हिंदू धर्म में काफी है। इसके नाम से ही लोग भयभीत हो जाते हैं। वैसे वैज्ञानिक तौर पर ग्रहण का अच्‍छा और बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे जुड़ी कई मान्‍यताएं और अंधविश्‍वास भी हैं।
हिंदू धर्म में ग्रहण को राहु-केतु नामक दो दैत्‍यों की कहानी से जोड़ा जाता है और इसके साथ ही कई अंधविश्‍वास भी इससे जुड़ जाते हैं।
मिथ: ग्रहण पड़े तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए
आज: प्राचीन समय में ऋषि-मुनियों द्वारा यह बात फैलाई गई थी कि ग्रहण के वक्‍त घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ‘प्राचीन समय में लोगों को ज्‍यादा ज्ञान नहीं होता था और भय के सहारे उनसे काम करवाया जाता था। यह परंपरा आज तक चली आ रही है मगर आज लोग पढ़े लिखे हैं। ग्रहण पड़ने पर घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए यह बात सत्‍य है। क्‍योंकि सूर्य को ही धरती पर प्रकाश का स्रोत माना जाता है। प्राचीन समय में इलेक्ट्रिकसिटी नहीं हुआ करती थी इसलिए कहा जाता था कि अंधेरे में घर से बाहर नहीं निकला चाहिए। मगर आज प्रकाश लाने के ढेरों विकल्‍प ऐसे में ग्रहण पड़ने पर भी काम नहीं रुकते। जो लोग आज भी मानते हैं कि ग्रहण के वक्‍त घर से बाहर निकलने पर अनर्थ हो जाएगा वह अंधविश्‍वास के शिकार हैं।’

मिथ:प्रेग्नेंट महिलाओं पर ग्रहण का साया नहीं पड़ना चाहिए
आज: यह एक बहुत बड़ा अंधविश्‍वास है। इससे जुड़ी लोगों की अलग-अलग मान्‍यताएं भी हैं। कोई कहता है कि ग्रहण का साया प्रेगनेंट महिला पर पड़ से बच्‍च अपंग पैदा होता तो कोई कहता है कि ग्रहण पड़ने पर प्रेगनेंट महिला को अपने शरीर पर गेरू (लाल रंग की मिट्टी) लगा लेना चाहिए। इस पर आचार्य विकास कहते हैं, ‘ग्रहण के वक्‍त जो किरणे पृथ्‍वी पर पड़ती हैं उसके कुछ साइडइफेक्‍ट होते हैं। इसलिए प्रेगनेंट महिलाओं को कुछ प्रकॉशन लेना चाहिए। मगर जब ग्रहण प्रभाव भारत पर पड़ रहा हो तब। बाकि विज्ञान ने इसके भी कई सारे विकल्‍प खोज लिए हैं। आज ग्रहण वाले दिन भी कई बच्‍चों का जन्‍म होता है और वह तंदुरुस्‍त भी होते हैं। डॉक्‍टर की सलाह से प्रेगनेंट महिलाओं चलना चाहिए न कि ग्रहण की दशा के अनुसार।’
मिथ: ग्रहण में बना खाना जहर जैसा होता है
आज:यह भी मिथ है। इसका संबंध भी प्रकाश से है। पहले के समय में कहा जाता था कि खाना हमेशा रौशनी में पकाया जाए ताकि साफ सुथरा पके और खाया भी रौशनी में चाहिए ताकि अन्‍न के साथ कुछ गलत चीज मुंह में न जाए। मगर आज ऐसा कुछ भी नहीं है। हर घर बिजली है और भरपूर रौशनी भी है। ऐसे में ग्रहण के वक्‍त खाना पकाया भी जा सकता है और खाया भी जा सकता है।
मिथ:ग्रहण के वक्‍त भगवान का ध्‍यान करना चाहिए
आज:अगर ग्रहण पूरे दिन रहेगा तो क्‍या पूरे दिन सारे काम छोड़ कर व्‍यक्ति को भगवान का ध्‍यान करना पड़ेगा। ‘प्राचीन समय में ग्रहण पड़ने से प्रकाश में कमी होती थी इसलिए सारे काम ठप हो जाते थे। लोग खाली वक्‍त में क्‍या करें इसलिए उन्‍हें पूजा पाठ करने को कहा जाता था। मगर आज की जीवनशैली में ऐसा संभव नहीं है। इसलिए ग्रहण पड़ने पर पूजा पाठ करने लॉजिक आज के समय में फेल है।’

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