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दीवाली के पंच पर्व, दिवाली पर कब करें लक्ष्मी पूजा? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि

October 22, 2019 07:29 PM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य ,चंडीगढ़, 98156-19620, 0172-2702790, 196-सैक्टर 20ए,चंडीगढ़-20

Madan Gupta Sapatu
जैसे नवरात्रि पर नौ दिन, दुर्गा माता के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है, ठीक उसी भांति दीवाली के अवसर पर पंचोत्सव मनाने की परंपरा है। किस दिन क्या पर्व होगा और उस दिन क्या छोटे छोटे कार्य व उपाय करने चाहिए, उसका दैनिक विवरण संक्षिप्त रुप में हम दे रहे हैं।

विभिन्न पर्वों पर शुभ मुहूर्त

25 अक्तूबर- -शुक्रवार,- गोवत्स द्वादशी , धन त्रयोदशी- सायं 7 बजे से आरंभ, धनवंतरी जयंती,

26 अक्तूबर- शनिवार- हनुमान जयंती, धनतेरस सायं-4 बजे तक

27 अक्तूबर - रविवार,रुप चर्तुदशी, नरक चौदश , दीवाली

28 अक्तूबर - सोमवार,, सोमवती अमावस, गोवर्धन पूजा , अन्नकूट , विश्वकर्मा दिवस

29 अक्तूबर -मंगलवार,यम द्वितीया- भाई दूज एवं पंजाब में विश्वकर्मा पूजन  

25 और 26 अक्तूबर को धनतेरस पर क्या करें ?

आज 25 तारीख सायं 7 बजे से अगलेे दिन शनिवार की सायं 4 बजे तक खरीदारी कर सकतेे है । वैद्य एवं चिकित्सक धन्वंतरी की पूजा अर्चना कर सकते हैं। 

यह पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है।

ऽ प्रातः प्रवेश स्थ्ल व द्वार को धो दें और रंगोली बनाएं, वंदनवार , बिजली की झालर लगाएं।

ऽ घर का सारा कूड़ा करकट ,अखबारों की रदद्ी,टूटा फूटा सामान,पुरानी बंद इलेक्ट्र्ानिक चीजें बेच दें।जाले साफ करें।नया रंग रोगन करवाएं।आफिस घर साफ करें। अपने शरीर की सफाई करें।तेल उबटन लगाएं।पार्लर जा सकते हैं।

ऽ पुराने बर्तन बदल के नए लें।चांदी के बर्तन या सोने के जेवर खरीदें।नया वाहन या घर की कोई दीर्घ समय तक प्रयोग की जाने वाली नई चीज लें। खीलें बताशे आज ही खरीदें । धान से बनी सफेद खीलें सुख, समृद्धि व सम्पननता का प्रतीक हैं अतः इसे धनतेरस पर ही घर लाएं।

ऽ इस दिन बाजार से नया बर्तन घर में खाली न लाएं उसमें , मिश्ठान या फल भर के लाएं 

ऽ धनतेरस की रात यदि आपको अपने घर में छिपकली दिख जाए तो समझें पूरा वर्श शुभ रहेगा। इस दिन संयोगवश इसके दर्शन दुर्लभ होते हैं।

ऽ सायंकाल मुख्य द्वार पर आटे का चौमुखी दीपक बना कर , चावल या गेहूं की ढेरी पर रखें।साथ में जल, रोली ,गुड़ फूल नैवेद्य रखें । इसे आज से 5 दिन हर शाम जलाएं।

ऽ व्यवसायी अपने बही -खाते, विद्यार्थी पुस्तकों आदि की पूजा करें ।

ऽ आरोग्य हेतु आज धन्वंतरि दिवस पर जरुरत मंदों को दवाई दान दें ।

ऽ नई या पुरानी इलैक्ट्र्ानिक आयटम पर नींबू घुमा के वीरान जगह फेंकें या निचोड़ के फलश में डाल दें।

ऽ इस दिन नए कपडे़ेःपहनने से पूर्व उन पर हल्दी या केसर के छींटे दें।

ऽ नई कार या वाहन खरीदने पर उसके बोनट पर कुमकुम व घी के मिश्रण से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं ,नारियल पर रोली से ओम् बना के वाहन के आगे फोडं़े और प्रशाद बांट दें।

ऽ पुराना फटा पर्स बदल दें,नया पर्स या बैग खरीदें। इसमें क्रिस्टल,श्री यंत्र,गोमती चक्र,कौड़ी,हल्दी की गांठ,पिरामिड,लाल रंग का कपड़ा,लाल लिफाफे में अपनी इच्छा /विश लिख कर रखें। लाल रेशमी धागे में गांठ लगा के पर्स में रख लें ।मनोकामना में विवाह की इच्छा या ऐसा ही कोई रुका कार्य या धन प्राप्ति आदि लिख सकते हैं।

ऽ मेश,सिंह,बृश्चिक व धनु राशि वाले लाल,पीला , नारंगी या भूरे रंग का पर्स या बैग रखें ।, बृश ,तुला, कर्क वाले सफेद, सिल्वर, गोल्डन , आसमानी । मकर व कुंभ राशि के लोग नीले ,काले , ग्रे कलर के , मिथुन तथा कन्या राशि के हरे रंग के पर्स या बैग खरीदें ।

ऽ आज के दिन किसी को उधार न दें।

किस राशि वालों को इस दिन क्या करना चाहिए

1.मेश: सोने का सिक्का ,विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण मोबाइल, टी.वी आदि खरीदें। लाल फल. का दान करें।

2.बृश: गोल्ड क्वाएन , साबुत हल्दी, शिक्षा संबंधी उपकरण जैसे लैपटाप या कंप्यूटर ले सकते हैं ।

3.मिथुनः फूड प्रोसेसर, मिक्सी ,केसर, कलई किए बर्तन आदि ले। 

4.कर्कः चांदी के बर्तन, मोती का हार या अंगूठी,मकान वाहन का क्रय आज अत्यंत शुभ रहेगा। फ्रिज , वाटर प्योरिफायर या वाटर कूलर खरीदें ।

5.सिंहः सोने के आभूशण या गोल्ड क्वाएन खरीदना धन वृद्धि करेगा। शहद, खजूर उपहार दें ।

6.कन्याः, नया मोबाइल, ब्रॉड बैंड कनेक्शन, टीवी तथा संचार संबंधी उपकरण ,स्टील केे बर्तन , होम अप्लायंस खरीदें। क्रेडिट कार्ड या ऋण लेकर कुछ न खरीदें ।

7.तुलाः चांदी केे बर्तन, क्राकरी लें, परफयूम, रियल एस्टेट में निवेश करें। हर तरफ से धन धान्य की प्राप्ति।

8.बृश्चिकः इलैक्ट््रानिक आयटम में खरीदें। लाल रंग का एप्लायंस अच्छा रहेगा। तांबे केे बर्तन, डेेकोेरेशन पीस खरीदे ।

9.धनुः लक्ष्मी जी का सोने का सिक्का या मूर्ति सामर्थ्यानुसार खरीद कर पूजा स्थान पर स्कापित करें।

10.मकरः प्रापर्टी से कुछ प्राप्त होगा। यदि वाहन या गृहपयोगी बर्तन या बिजली के यंत्र खरीदना चाहें तो काले रंग के लें।

11. कुंभः लोहे की कढ़ाई, कुकर वाहन , फ्रिज, टी.वी आदि काले ,नीले या ग्रे कलर का लें।

12.मीनः पूर्वनिर्मित मकान या फलैट की प्राप्ति। प्रापर्टी का ब्याना देना । तांबे के बर्तन लें । 

दीवाली पूजन का शुभ समय 

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त : 18:44:04 से 20:14:27 तक अवधि :1 घंटे 30 मिनट, प्रदोष काल :17:40:34 से 20:14:27 तक,वृषभ काल :18:44:04 से 20:39:54 तक 

रुप चर्तुदशी व नरक चतुर्दशी -

इस दिन क्या करें ?

ऽ सौन्दर्य लक्ष्मी साधना करें ।स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं। स्फटिक की माला से लक्ष्मी माता के चित्र या मूर्ति के आगे लाल वस्त्र पहन कर बैठें और इस मंत्र का जाप करें

! रुपं देहि जयं देहि सौन्दर्य लक्ष्मी!!

या दूसरा मंत्र

! ओम् हृीं सौन्दर्य देहि कामेश्वराय ओम् नमः!!

नरक चतुर्दशी पर क्या करें ?

घर का सारा कूड़ा करकट ,अखबारों की रदद्ी,टूटा फूटा सामान,पुरानी बंद इलेक्ट्र्ानिक चीजें बेच दें।जाले साफ करें।नया रंग रोगन करवाएं।आफिस घर साफ करें। अपने शरीर की सफाई करें।तेल उबटन लगाएं।पार्लर जा सकते हैं। 

2ण् महालक्ष्मी पूजा- दीवाली -27 अक्तूबर - -रविवार,ः दीवाली पर क्या करें ?

ऽ घर की साफ सफाई करें । प्रवेश द्वार पर घी और सिंदूर से ओम ्या स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।

ऽ सायंकाल खीलें ,बतासे,अखरोट,पांच मिठाई,कोई फल पहले मंदिर में दीपक जला कर चढ़ाएं।

ऽ दीवाली वाले दिन मिटट्ी या चांदी की लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदें।

ऽ एक नया झाड़ू लेकर किचन में रखें ।

ऽ लक्ष्मी पूजन करें

ऽ बहियों ,खातों, पुस्तकों,पैन,स्टेशनरी, तराजू ,कंप्यूटर या वो वस्तु जिसे आप रोजगार के लिए प्रयोग करते हैं उनकी पूजा करें।  

दीवाली पूजन का शुभ समय 

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :18:44:04 से 20:14:27 तक अवधि :1 घंटे 30 मिनट

प्रदोष काल :17:40:34 से 20:14:27 तक

वृषभ काल :18:44:04 से 20:39:54 तक

दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :23:39:37 से 24:30:54 तकअवधि :0 घंटे 51 मिनट

महानिशीथ काल :23:39:37 से 24:30:54 तक

सिंह काल :25:15:33 से 27:33:12 तक

दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त

अपराह्न मुहूर्त्त (शुभ):13:28:49 से 14:52:44 तक

सायंकाल मुहूर्त्त (शुभ, अमृत, चल):17:40:34 से 22:29:05 तक

रात्रि मुहूर्त्त (लाभ):25:41:26 से 27:17:36 तक

उषाकाल मुहूर्त्त (शुभ):28:53:46 से 30:29:57 तक 

दिवाली या दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का त्यौहार भारत और नेपाल समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है। क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। 

हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दिवाली मनाते हैं। जैन धर्म में दिवाली को भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख समुदाय में इसे बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं। 

दिवाली कब मनाई जाती है?

1. कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल होने पर दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) मनाने का विधान है। यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाने का विधान है। यह मत सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्य है।

2. वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि, प्रदोष काल में नहीं आती है, तो ऐसी स्थिति में पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए।

3. इसके अलावा यदि अमावस्या तिथि का विलोपन हो जाए, यानी कि अगर अमावस्या तिथि ही न पड़े और चतुर्दशी के बाद सीधे प्रतिपदा आरम्भ हो जाए, तो ऐसे में पहले दिन चतुर्दशी तिथि को ही दिवाली मनाने का विधान है। 

दिवाली पर कब करें लक्ष्मी पूजा? 

मुहूर्त का नाम समय विशेषता महत्व

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त लक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम समय स्थिर लग्न होने से पूजा का विशेष महत्व

महानिशीथ काल मध्य रात्रि के समय आने वाला मुहूर्त माता काली के पूजन का विधान तांत्रिक पूजा के लिए शुभ समय

1. देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए। क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है।

2. महानिशीथ काल के दौरान भी पूजन का महत्व है लेकिन यह समय तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। इस काल में मां काली की पूजा का विधान है। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशिथ काल के बारे में समझ रखते हों। 

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है। इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। इस दौरान जो घर हर प्रकार से स्वच्छ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप में ठहर जाती हैं इसलिए दिवाली पर साफ-सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ कुबेर पूजा भी की जाती है। पूजन के दौरान इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

1. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। साथ ही घर के द्वार पर रंगोली और दीयों की एक शृंखला बनाएं।

2. पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें।

3. माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।

4. इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें।

5. महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए।

6. महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें।

7. पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार ज़रुरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा दें। 

दिवाली पर क्या करें?

1. कार्तिक अमावस्या यानि दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है।

2. दिवाली के दिन वृद्धजन और बच्चों को छोड़कर् अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए। शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।

3. दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें। प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं। यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

4. दिवाली से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है।

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