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एस्ट्रोलॉजी

माथे पर तिलक लगाने और मांग में सिंदूर भरने के पीछे क्या है वैज्ञानिक आधार?

February 07, 2020 08:50 PM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्,चंडीगढ़,9815619620

भारत में आदि काल से मस्तक पर विभिन्न प्रकार के तिलक लगाने की प्रथा है। अतिथि का स्वागत हो अथवा कोई धार्मिक कृत्य, राजयाभिषेक हो या विवाह का तिलक, माथे पर तिलक लगाना हमारी परंपरा है। यात्रा में जाना हो या युद्ध में , तिलक का अपना ही महत्व एवं उदे्श्य होता है। तिलक की सामग्री, उसका रंग, उसका आकार -प्रकार कुछ न कुछ विशिष्टता दर्शाता है।

अपने देश की संस्कृति में कोई भी परंपरा हो, उसका वैज्ञानिक आधार अवश्य होता है।सो माथे पर तिलक लगाने का भी है।ललाट पर तिलक की आकृति बिंदिया,टीका, त्रिपुंड , दो या तीन रेखाओं ,किसी भी रुप में हो सकती है। 

प्रमस्तिष्क शरीर का सबसे संवेदनशील भाग है जो सूचनातंत्र का काम करता है। यहां पिट्यूटरी ग्रन्थि होती है जो कई प्रकार के हारमोन्स बनाती है जिनसे सूंघने,देखने ,यादाश्त,एवं श्रवण शक्तियां संचालित होती है। दोनों भवों के मध्य आज्ञा चक्र भी होता है। यहां से ही ज्ञान चेतना तथा कार्य चेतना का कंट्रोल होता है।यह विविध तरंगों का रिसीवर कहलाता है ठीक एक एंटीना की तरह।यह एक संवेदनशील भाग है । इसे तीसरी आंख भी माना जाता है। भगवान शिव के चित्र में इस भाग को तृतीय नेत्र के रुप में चित्रित किया जाता है।

मस्तिष्क में ‘सेराटोनिन’ तथा ‘बीटा एण्डोरफिन’ की कमी होने के कारण मनोभावों में उदासीनता की अनुभूति होती है। माथे पर चंदन,हल्दी के लेप अथवा इसके टीके से इन रसायनों का स्त्राव संतुलित हो जाता है। आज्ञाचक्र जाग्रत होने से मानसिक शक्ति एक्टिवेट हो जाती है और शरीर में स्फूर्ति बढ़ जाती है। दक्षिण भारत में अधिकांश लोग पूरे ललाट पर ही चन्दन का लेप करते हैं। यदि आप रावण का चित्र देखें तो पाएंगे कि देश के इस भाग में मस्तक पर चंदन लेपन की क्रिया पौराणिक काल से चली आ रही है।

मस्तिष्क में ‘सेराटोनिन’ तथा ‘बीटा एण्डोरफिन’ की कमी होने के कारण मनोभावों में उदासीनता की अनुभूति होती है। माथे पर चंदन,हल्दी के लेप अथवा इसके टीके से इन रसायनों का स्त्राव संतुलित हो जाता है। आज्ञाचक्र जाग्रत होने से मानसिक शक्ति एक्टिवेट हो जाती है और शरीर में स्फूर्ति बढ़ जाती है। दक्षिण भारत में अधिकांश लोग पूरे ललाट पर ही चन्दन का लेप करते हैं। यदि आप रावण का चित्र देखें तो पाएंगे कि देश के इस भाग में मस्तक पर चंदन लेपन की क्रिया पौराणिक काल से चली आ रही है।

ज्योतिष की लाल किताब में गुरु ग्रह को ठीक करने के लिए उपायों में केसर का तिलक लगाने का सुझाव दिया गया है।जिनकी जन्म पत्री में बृहस्पति दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हो उन्हें प्रतिदिन या 27 दिनों तक माथे पर केसर का टीका या लेप लगाना चाहिए। इससे उनकी स्मरणशक्ति बढ़ती है तथा तेज में वृद्धि होती है। जिन बच्चों की पढ़ाई में कंसंट्र्ेशन नहीं होती, याद किया हुआ परीक्षा में भूल जाते हैं , अभिभावक यह प्रयोग अवश्य करें।अपनी 45 वर्ष के अनुभव में हमने इस प्रयोग को शत्प्रतिशत सटीक पाया है।इससे गुरु उच्च होता है जो विद्या,ज्ञान,बुद्धि का परिचायक है।

माथे पर चन्दन ,केसर, के अलावा कस्तूरी ,अश्टगंध , यज्ञ-भस्म ,दही व चावल, लाल रौली आदि का टीका भी लगाया जाता है। भृकुटि और ललाट का मघ्य भाग हमारे ज्ञान तन्तुओं का केंद्र होता है।दिमाग से अधिक काम लेने के कारण सिर में दर्द हो जाता है। अक्सर आप माथे पर वीक्स जैसा आयंटमेंट मलते हैं और वेदना का क्षय हो जाता है।क्या आपने कभी ऐसा मल्हम सिर के पिछले भाग में दर्द भगाने के लिए लगाया ? क्योंकि खोपड़ी का अगला भाग ही अधिक संवेदनशील होता है।

हमारे महर्षि इसका मर्म सदियों पहले जानते थे इसी लिए नीरोग रहने के लिए हमने अपने धर्म में मंदिर या घर में माथे पर तिलक लगाने की परंपरा आरंभ कर दी वह भी प्रातः काल में। यदि तिलक सुबह सुबह लगा लिया जाए तो सिर दर्द नहीं रहता,मस्तिष्क के ज्ञान तन्तु संयमित और सक्र्रिय रहते हैं।। आप पूरा दिन एक्टिव रहेंगे और मेधा शक्ति बरकरार रहती है। हमारे मंदिरों के हर एक्शन , हर क्रिया के पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है चाहे वह तुलसी की पत्तियां डाल के चरणामृत देने की परंपरा हो , गौमूत्र युक्त पंचगव्य बांटने की हो , घंटियां बजाने की हों,ज्योति प्रज्जवलन या हवन करने की प्रथा हो।

मस्तक पर सूर्यमुखी के फूल को पीस कर लेप लगाने से आधा सीसी जैसे असाध्य दर्द का उपचार हमने किया है जो हमारे उपायों में दिया गया है। कुंकुम हल्दी का पाउडर ही होता है जिसमें नींबू का रस मिला कर लाल बनाया जाता है। हल्दी त्वचा को निखारती है ,यह जग प्रसिद्ध तथ्य है।कई देश इसके पेटेंट के लिए लड़ रहे हैं। कुुंकम के तिलक से न केवल त्वचा शुद्धि ही होती है बल्कि यह एक एंटीसैप्टिक का काम भी करती है।माथे का अग्रभाग जब संक्रमण रहित होगा तो सिरदर्द रहेगी कहां? स्नायुवों का संयोजन व संचालन आटोमैटिक होता रहता है। तिलक लगाना एक स्टैबिलाइजर का काम करता है।

यज्ञ भस्म माथे पर लगाना और भी शुभ माना गया है। ज्योतिष में उपाय के तौर पर गायत्री हवन की भस्म को नियमितमाथे पर लगाने का सुझााव दिया जाता है। वस्तुतः यह भस्म संक्रामक कीटाणुओं को समाप्त करने में सक्षम होती है। लाल चंदन या रौली का टीका प्रायः युद्ध में प्रस्थान करते समय लगाया जाता है।लाल रंग गर्म और उर्जाकारक होता है। यह जोश दिलाता है। यह टीका विज्ञान के अनुसार एक कलर थैरेपी का काम करता है। जिन जातकों का मंगल ग्रह जन्म कुंडली में कमजोर है,शारिरिक शक्ति का ह्रास हो रहा हो, साहस,बल, जीवन शक्ति क्षीण हो चुकी हो, ऐसे जातक यदि लाल चंदन का टीका लगाएं तो अवश्य लाभ होगा। इसके विपरीत यदि जन्मांग में मंगल ग्रह बहुत तेज हो , उच्च, बली या मूल त्रिकोण राशि में हो, लग्न या आठवें भाव में हो ,उन्हें क्रोध कम करने के लिए सफेद चंदन अथवा दही चावल का टीका नियमित लगाना चाहिए। इसका आयुर्वैदिक कारण भी है ,ज्योतिषीय भी है और कलर थेरेपी का वैज्ञानिक कारण भी है ।

मांग में सिंदूर लगाने का वैज्ञानिक औचित्य ?

हमारे देश में मांग में सिंदूर भरना सुहागिन महिलाओं का प्रतीक माना जाता है। विवाह के समय वधु को लाल वस्त्र पहनाना तथा मांग में सिंदूर भरने का संस्कार प्रचलित है । आदिवासियों से लेकर संभ्रान्त परिवारों में इसका चलन है।

भारतीय परंपरा का कोई भी पक्ष रूढ़िवादिता नहीं है। अज्ञानवश इसका वैज्ञानिक पक्ष सबके न तो समझ ही आ सकता था और अल्प शिक्षा के कारण जनमानस को समझाया ही जा सकता था। इसे कार्यान्वित करने के लिए हमने इसे धार्मिक अनुष्ठानों व रीति रिवाजों से जोड़ दिया जो परंपरा एवं संस्कृति का अभिन्न अंग बन गए। हमारे अपने ही अज्ञानी लोग इन परंपराओं को आर्थाेडौक्स कह कर खिल्ली उड़ाने लगे जैसा ज्योतिष के साथ भी हुआ।जब सदियों बाद भारत का विज्ञान , भारत में वाया अमेरिका आया तो इनका मर्म समझ आया।

मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है वह जगह बहम्रन्ध्र और अध्मि नामक मर्म का स्थान है।स्त्री के शरीर में यह हिस्सा पुरुष शरीर की तुलना में अधिक संवेदनशील व कोमल होता है।इस भाग की सुरक्षा का विशेष प्रबन्ध हमारे प्राचीन चित्सिकों ने पहले से ही किया हुआ है।सिंदूर में पारा तथा लैड ऑक्साइड की कुछ मात्रा होती है। यह मिश्रण स्त्री के शरीर में वैद्युतिक उत्तेजना को नियंत्रित तो करता ही है साथ में मर्मस्थान को बाहरी संक्रमण तथा दुष्प्रभाव से बचाता है। जिन महिलाओं को ब्लॅड प्रैशर की समस्या है उन्हें सिंदूर अवश्य लगाना चाहिए ।हमने अपने ज्योतिषीय उपायों में जिन्हें भी ये सुझाव दिए हैं उनका रक्तचाप नियंत्रित हुआ है।

आप भी भारतीय पंरपराओं, मान्यताओं और आस्था पर गर्व कर सकते हैं और उन्हें अपनी दिनचर्या में अपना कर सुखी स्वस्थ एवं निरोग रह सकते हैं।

किस दिन कौन सा तिलक लगाएं इस विषय पर भी ज्योतिष मार्गदर्शन करता है-

सोमवार := सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है तथा इस वार का स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं।चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए आप सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इस दिन विभूति या भस्म भी लगा सकते हैं।

मंगलवार := मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है।मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है। इससे मन की उदासी और निराशा हट जाती है और दिन शुभ बनता है।

बुधवार := बुधवार को जहां मां दुर्गा का दिन माना गया है वहीं यह भगवान गणेश का दिन भी है।इस दिन का ग्रह स्वामी है बुध ग्रह। इस दिन सूखे सिंदूर (जिसमें कोई तेल न मिला हो) का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है और दिन शुभ रहता है।

गुरुवार := गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। बृहस्पति ऋषि देवताओं के गुरु हैं। इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा। इस दिन का स्वामी ग्रह है बृहस्पति ग्रह।गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। इस दिन सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे मन में पवित्र और सकारात्मक विचार तथा अच्छे भावों का उद्भव होगा जिससे दिन भी शुभ रहेगा और आर्थिक परेशानी का हल भी निकलेगा।

शुक्रवार : = शुक्रवार का दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का रहता है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है।हालांकि इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहां तनाव दूर रहता है वहीं इससे भौतिक सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि होती है। इस दिन सिंदूर भी लगा सकते हैं।

शनिवार := शनिवार को भैरव, शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है शनि ग्रह।शनिवार के दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिए जिससे भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देते। दिन शुभ रहता है।

रविवार := रविवार का दिन भगवान विष्णु और सूर्य का दिन रहता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है सूर्य ग्रह जो ग्रहों के राजा हैं।इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाएं। भगवान विष्णु की कृपा रहने से जहां मान-सम्मान बढ़ता है वहीं निर्भयता आती है।

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