Tuesday, 02 June 2026
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ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स ऐसोसियेशन का तीन दिवसीय राष्टीय सम्मेलन 25 नवंबर से चंडीगढ़ में

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बैंकिंग उद्योग को पेश आ रही चुनौतियों पर होगा विचार विमर्श, एनपीए को लेकर बड़े घरानों के कर्ज माफ करने को लेकर उठी शवेत पत्र जारी करने की मांग 

आर के शर्मा /चंडीगढ़

सार्वजनिक, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों में कार्यरत अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स ऐसोसियेशन (एआईबीओए) चंडीगढ़ में आगामी 25 से 27 नवंबर तक पंजाब युनिवर्सिटी के लॉ ओडिटोरियम में अपना आठवां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है जिसमें देश भर के लगभग 800 बैंक अधिकारी भाग लेंगें। इस तीन दिवसीय आयोजन का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और विशेष रुप से बैंकिंग उद्योग को पेश आ रही चुनौतियों पर विचार विमर्श कर उन्हें संरक्षित करना है।

(MOREPIC1)सेक्टर 27 स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुये ऐसोसियेशन के चेयरमैन आलोक खरे, महासचिव एस नागराजन और रिसेप्शन समिति के चेयरमैन एसके गौतम ने बताया कि जब बैंकिंग कर्मी अत्यधिक शिष्टाचार और ईमानदारी के साथ ग्राहकों की सेवा के लिये प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हीं की कर्मस्थली का निजीकरण उनके साथ विश्वासघात क्यों किया जा रहा है।

बैंकिंग प्रणाली का प्राईवेटाईजेशन, कोंट्रेक्टचुलिज्म, आऊट सोर्सिंग और डिजिटलाईजैशन, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की दिशा में उठाये जा रहे कदम है। विभिन्न बैंकों का वर्तमान दृष्टिकोण देश को प्री इंडीपेंटंड इंडिया की ओर ले जाने में बढ़ रहा है। उन्होंनें कहा कि आईआर प्रेक्टिसिस का अनादर, यूनियन परिसरों को खाली करवाना, चर्चाओं में यूनियनों का प्रतिनिधितत्व करने के लिये चुने गये प्रतिनिधियों का स्वीकार नहीं करना आदि कर्मचारियों को संघर्ष विरोध करने के लिये प्रेरित करता है और यह इस बात का भी सूचक है कि कर्मचारियों के स्वाभिमान और सम्मान पर गंभीर हमला हो रहा है।

उन्होंनें कहा कि ऐसोसियेशन का आठवां सम्मेलन बैंकों के निजीकरण के सरकार के कदमों के खिलाफ कार्यवाही की रणनीति तय करेगा और नौकरियों की सुरक्षा से इंकार करने के किसी भी प्रयास को ठोस कार्यवाही के साथ लड़ेगा। उन्होनें बताया कि आरबीआई की तर्ज पर पांच दिवसीय बैंकिंग के साथ साथ पैंशन के अपडेशन के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया जायेगा।

उन्होंनें बैंक में लोन डिफोल्ट पर लगातार वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि इस दिशा में कड़े कानून बनाने होगें। उन्होंनें कहा कि पब्लिक सेक्टर बैंकिंग सिस्टम को अनिवार्य रुप से लोन डिफोल्ट को क्रिमिनल ओफेंस के रुप में वर्गीकृत करने के लिये कड़े कानून बनाने होंगें और जो सीधे तौर पर कारपोरेट एडवांस लोन देने में शामिल बैंक के निदेशक के खिलाफ की कार्यवाही की जानी चाहिये।(SUBHEAD)

उन्होंनें चिंता जताई कि बैंकिंग सेक्टर में खराब लोन की मात्रा बढ़ती जा रही है। प्रत्येक सौ रुपये उधार के लिये 68 रुपये की छूट देने का एनसीएलटी का निर्णय और कुछ नहीं बल्कि उद्योग के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला एक गंभीर निर्णय है।

उन्होंनें व्यापक स्तर पर जनता से आहवान किय कि बैंकों और देश को बचाने के लिये बैंक कर्मियों के साथ खड़े हो। अंततः बैंकिंग सेक्टर में बदलते कार्य परिवेश में नौकरियों को बनाये रखने के इस कदम से अगली पीढ़ी को लाभ मिलेगा।