अमृतसर, फेस2न्यूज:
भारत सरकार की कुछ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना पर पंजाब सरकार भी पंजाब के कुछ महानगरों को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों ही नहीं, अरबों रुपये खर्च कर रही है। पूर्व केबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि किसी अधिकारी ने मंत्री या विधायक ने यह स्मार्ट सिटी बनाने या बनवाने से पहले शहर की जनता से नहीं पूछा कि उनकी जरूरतें क्या हैं। वैसे अपने जिन शहरों में स्मार्ट सिटी का तथाकथित काम चल रहा है वहां गंदगी कितनी है, आवारा पशु कितनी दुर्घटनाएं कर रहे और जिंदगी छीन रहे हैं इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं। अमृतसर में ही स्मार्ट सिटी के नाम पर जो सड़कों की दुर्गति की गई और वर्षों से लोगों को धूल—मिट्टी में रहने—सहने को मजबूर किया गया उससे तो यह लगता है कि केवल जनता की कठिनाइयां बढ़ाने के लिए ही यह सब काम हो रहा है। थोड़े से बाग बगीचे सुंदर बनाकर वह भी सिविल लाइन और शहर के बाहरी इलाकों में अमृतसर के लोगों को कह दिया जा रहा है। कोई विचार करे। अमृतसर के मेयर, पंजाब सरकार के मंत्री, विधायक और सांसद एक दिन खुला जनता का दरबार लगाकर बैठें और उनसे सुनें कि जो सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़े—बड़े स्पीड ब्रेकर बना दिए वहां गरीब की रिक्शा, ठेला गाड़ी कितनी मुश्किल से चढ़ता है। कितने पशुओं की मौत हुई। वैसे हमारे इन अधिकारियों में जनता का सामना करने की हिम्मत नहीं क्योंकि जनता प्रतिनिधि ही जनता की नहीं सुनते। अधिकारी क्यों सुनेंगे।
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सरकार जन घोषणा करे, स्मार्ट सिटी में क्या और किसके लिए होता है
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