Tuesday, 02 June 2026
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40 मेधावी छात्राओं ने खुद के बनाए ड्रोन उड़ाए

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चंडीगढ़, सुखविन्द्र:
अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आई.बी.एम और स्कूल शिक्षा विभाग हरियाणा के सहयोग से चंडीगढ़ के कलाग्राम में स्टेम फॉर गर्ल्स इंडिया प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिसमे हरियाणा प्रदेश के विभिन्न जिलों की 40 मेधावी छात्राओं ने भाग लेकर उपग्रह और ड्रोन लांच किया। इस 40 छात्राओं में से टॉप 4 छात्राओं को अगले चरण के लिए चुना गया। इन चार छात्राओं में गौरी शर्मा (जी.जी.एच.एस हब्री कैथल) डॉली शर्मा (जी.एस.एस.एस कंवला अम्बाला), हिमांशी (सार्थक स्कूल पंचकूला) और भूमिका (जी.एम.एस.एस.एस.एस पंचकूला) शामिल है। यह चारों छात्राएं चेन्नई में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में भाग लेनी। कार्यक्रम में छात्राओं ने खुद से तैयार किये ड्रोन उड़ाकर दिखाए।
इस अवसर पर एडिशनल डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन हरियाणा विवेक कालिया ने कहा कि अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन हरियाणा और आईबीएम ने हरियाणा सरकार के सहयोग से प्रदेश के 7 जिलों के लगभग 88 सरकारी स्कूलों की छात्रों को उपग्रह, ड्रोन और अंतरिक्ष में प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे, इसके लिए और स्कूलों को शॉर्टलिस्ट किया जा रहा है। ज्वाइंट डायरेक्टर (आईटी एजुकेशन) हरियाणा प्रवीण सांगवान ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर छात्राओं के कौशल की सराहना की।
चयनित छात्राओं ने कहा कि यह उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है। सार्थक स्कूल पंचकूला की हिमांशी ने अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और आईबीएम का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकारी स्कूल की छात्राओं के लिए यह बहुत बड़ा प्लेटफार्म है। इस तरह की चीजों को सीखना और उसका अनुभव करने यह अपने आप में अलग है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आठवीं एवं नौवीं की छात्राओं को स्टेम विषयों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। इनोवेशन प्रोजेक्ट के इस संस्करण में, आई.बी.एम और ए.आई.एफ ने हरियाणा के 9 जिलों के 100 सरकारी स्कूलों में से 1460 छात्राओं ने भाग लिया जिनमें से 104 छात्राओं का चयन प्रारंभिक प्रशिक्षण के लिए किया गया । इसके बाद पंचकूला वर्कशॉप के लिए 40 छात्रों का चयन किया गया। चयनित 40 छात्राओं को सैटेलाइट्स, ड्रोन, स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट्स और ड्रोन को असेंबल करने का प्रशिक्षण दिया गया। जिसके बाद छात्राओं ने कलाग्राम में ड्रोन, सिम्युलेशन और डिजाइन सॉफ्टवेयर को असेंबल किया और उनका इस्तेमाल नेनो सैटेलाइट्स को लॉन्च करने में किया। इन सैटेलाइट्स का इस्तेमाल पृथ्वी के वातावरण के विभिन्न मापदंडों के अवलोकन किया गया, जैसे वायु की गति, यूवी किरणें, जीपीएस, दाब और तापमान।