Friday, 09 October 2026
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हम तो बादशाह के नौकर हैं बैंगनों के नहीं

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

पता नहीं पिछले एक दो दिन में देश के युवाओं को लेकर जिस तरह कुछ लोगों के सुर बदले तो मुझे बहुत पुराना किस्सा याद आ गया। किस्सा अकबर और बीरबल से जुड़ा है। हुआ यूं कि एक बार अकबर और बीरबल सैर करते करते खेतों की तरफ निकल गए। वहां बादशाह अकबर ने पहली बार बैंगन लगे देखे। बादशाह बोले, “बीरबल बैंगन कितने खूबसूरत दिखते हैं”। बीरबल बोले, “जी बादशाह सलामत कितने खूबसूरत हैं इनके सर पे ताज सा भी है और क्या सुंदर रंग है। जहाँपना ये बहुत ही कमाल की सब्जी है”।

उसी रात बादशाह के बावर्ची ने खाने में बैंगन बना दिए। अकबर को वो कतई स्वादिष्ट नहीं लगे। उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल कितना बेसुआद होता है बैंगन। इसे खाने में मज़ा ही नहीं”। बीरबल ने झट से कहा, “बिल्कुल हजूर बहुत ही बेकार चीज़ है। काला कलूटा रंग, बेढंगी शक्ल, और बेसुआद सब्जी”। बीरबल की बात सुन कर बादशाह बोले, “बीरबल सवेरे खेतों में तो तुम बैंगन की तारीफ के पुल बांध रहे था और अब इनकी बुराई पे उतर आए”। बीरबल ने सर झुका और दोनों हाथ जोड़ कर कहा, “महाराज हम तो आपके नौकर हैं बैंगनों के नहीं”।

इसी तरह ऊपर से एक सुर निकला कि “जेनजी” देश भक्त हैं और नीचे वालों ने एक दम यू टर्न लिया और जो अब तक समाज की सारी मर्यादाएं तोड़ कर इन्हें नाली के कीड़े, मवाली, और चरित्रहीन बता रहे थे एक साँस में इन युवाओं की तारीफ में जुट गए। महामानव को इनका सबसे लोकप्रिय नेता बताने का सर्वेक्षण भी दो दिन में आ गया। कमाल का ह्रदय परिवर्तन है।

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