Sunday, 05 July 2026
Breaking News
श्री गुरु रविदास सभा राम दरबार, फेज-1 की कमेटी भंग वुमेन एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के इंटर्न विद्यार्थियों ने एक माह का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक किया पूरा पासपोर्ट-बहस के बीच क्या देशव्यापी NRC की तैयारी संभव!  टिहरी गढ़वाल विकास परिषद की नव-निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न सीए देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका: मुख्यमंत्री श्री अमरनाथ यात्रा पर गए एक यात्री की रहस्यमयी मौत मनोरंजन जगत के दिग्गज सितारों से सजा आइकॉनिक गोल्ड स्ट्रीमिंग अवॉर्ड्स 2026 स्वर्गीय ओम प्रकाश गोयल मेमोरियल सीनियर महिला डे/नाइट ट्वेंटी-20 कैश प्राइज़ क्रिकेट टूर्नामेंट का पहला संस्करण अब 8 जुलाई से वीर सैनिकों को समर्पित एक ही दिन में बने 21 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को मिला जीआई टैग
हिमाचल Trending

पांगी में 4 गांव के लोगों ने रथयात्रा के साथ पुर्थी में मनाया बाहरालू जातर मेला

Read in:Hindi

चंबा (पांगी):

जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के 12वें दिन चार प्रज्जामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया । यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। जिसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते है। कड़ाके की ठंड के बीच लोगों के उत्साह कम नहीं हुआ। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया।

चारों प्रजामंडल के लोग 12 दिन के बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर इस मेले का आयोजन करते है। लोगों की मान्यता है कि इन चार गांव के लोग 12 दिनों तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते है। और 12 दिनों बात बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलकर जुकारू पर्व के नाम पर बाहरालू मेले का आयोजन करते है। इस अवसर पर एक दूसरे के गले लगकर खुशी मनाते है।

(SUBHEAD)इस मेले के दिन रेई और शौर से रथ यात्रा निकाली गई। जोकि पुर्थी गांव में एकत्रित होती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। सोमवार को तड़के 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी की सजावट करने में जुट जाते है और सुबह 9:00 बजे कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार करते है। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानो राजा की पूजा की जाती है।

मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है।