Friday, 16 October 2026
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भागवत किसी ने बनाया नहीं, भगवान ने अपनी शक्ति से ब्रह्मा के हृदय में इसे प्रकट किया : आचार्य श्री विवेक जोशी जी महाराज

हरि सिमरन सेवा समिति द्वारा आयोजित भागवत कथा के छठे दिन गूंजा ‘गोविंदा-गोविंदा’, महारास और उद्धव प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

चण्डीगढ़ : श्री हरि सिमरन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आज पंडाल में भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। कथा व्यास आचार्य श्री विवेक जोशी जी ने भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं, महारास और उद्धव प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया।कथा की शुरुआत मुख्य यजमानों द्वारा भागवत आरती और पूजन के साथ हुई। श्री हरि सिमरन सेवा समिति के पदाधिकारियों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया।

आज की कथा में कथाव्यास ने सुनाया कि गरुड़ पुराण में लिखा है- 
अर्थोऽयं ब्रह्मसूत्राणां सर्वोपनिषदो अपि ।
“यह श्रीमद्भागवत ब्रह्मसूत्रों एवं सब उपनिषदों का सार है।”

उनके मुताबिक भागवत किसी ने बनाया नहीं। भगवान ने अपनी शक्ति से ब्रह्मा के हृदय में इसे प्रकट किया। आगे ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने वेद व्यास को दिया। पश्चात् वेद व्यास ने भागवत का निर्माण किया। उससे पहले व्यास ने वेद के चार भाग किए। उसके बाद ब्रह्मसूत्र (वेदान्त), गीता, महाभारत, 18 पुराण, 4 लाख श्लोकों के पुराण, 1 लाख श्लोकों का महाभारत, 555 सूत्रों का ब्रह्मसूत्र, 700 श्लोकों की गीता की भी रचना की। यह सब उन्होंने 3 वर्ष में लिखा।

कथावाक ने भगवान कृष्ण के मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव संदेश और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों को संगीतयमय प्रस्तुति के साथ सुनाया गया। कथा व्यास ने रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रुक्मिणी समर्पण का प्रतीक हैं और भगवान सदैव सच्चे प्रेम और भक्ति के अधीन होते हैं। जैसे ही कथा में भगवान कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग आया, पूरा पांडाल भजनों और जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेलकर उत्सव मनाया।

समिति के सेवादारों ने व्यवस्था संभालते हुए सभी भक्तों के लिए सुगम दर्शन और महाप्रसाद की व्यवस्था की। समिति के अध्यक्ष कांति देवी ने बताया कि इस अवसर पर समिति के समस्त पदाधिकारी पूनम कोठारी, प्रीति, राज रानी, मोहन, महीपाल खाती, वाष्पानंद, गोपाल, तेजस्वी, तरुणा, कीर्ति एवं सदस्य और भारी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। आज के लंगर की सेवा अनिल शर्मा, विजय जिंदल के परिवार द्वारा दी गई।

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