Monday, 01 June 2026
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मलोया थाना पुलिस द्वारा झगडे व मारपीट के मामले में पीड़ित महिला व आरोपी पक्ष को शाम के समय थाने बुलाने पर विवाद

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पीड़ित महिला ने डीजीपी, एसएसपी व डीएसपी (साउथ) को बीएनएस, 2023 की धारा 35 एवं 179 के तहत लिखित समन के माध्यम से बुलाने का निर्देश देने की मांग की, वरिष्ठ एडवोकेट सतिंदर सिंह ने भी पीड़ित पक्ष की मांग को जायज ठहराया

चण्डीगढ़ : स्मॉल फ्लैट्स, मलोया में सोमवार को सरोज यादव, पत्नी प्रेम यादव तथा एक अन्य महिला भारती यादव के साथ कथित तौर पर रामा यादव एवं गुरुदेव यादव की पत्नी तथा अन्य व्यक्तियों ने पुलिस स्टेशन, मलोया के बाहर सार्वजनिक स्थल पर एवं पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में बिना किसी कारण के झगड़ा, गालीगलौच व मारपीट की जिसमें पीड़ित महिलाओं को काफी चोटें पहुंची। इस पर पीड़ित पक्ष ने अन्य महिलाओं के साथ पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण सरकारी अस्पताल, सेक्टर 16 में करवाया।

मंगलवार को सरोज यादव को संबंधित पुलिस स्टेशन में शाम 5 बजे 5-10 लोगों के साथ बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं को पता चला कि थाना पुलिस ने आरोपी पक्ष को भी उसी समय मामले के निपटारे हेतु बुलाया हुआ है।

इस पर पीड़ित पक्ष ने चण्डीगढ़ पुलिस के डीजीपी  , एसएसपी व डीएसपी (साउथ) के साथ साथ मलोया पुलिस थाना प्रभारी को रजिस्टर्ड पत्र प्रेषित करके पूरे मामले की जानकारी देते हुए लिखा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा पीड़ित की शिकायत दर्ज करके मेडिकल परीक्षण भी हो चुका है। अब दोनों पक्षों को एक ही समय एवं तिथि पर पुलिस स्टेशन बुलाने से अवांछित वातावरण उत्पन्न हो सकता है, जिसका लाभ उठाकर पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई घटना रच सकते हैं।

(SUBHEAD)उन्होने आगे लिखा है कि आवेदक एवं अन्य परिजनों ने कोई गलत कार्य नहीं किया है तथा वे सभी साधारण तथा कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं एवं उनका कोई अपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शाम के समय, जो कानूनी रूप से अनुमति योग्य नहीं है, महिला आवेदक एवं अन्य महिलाओं को पुलिस स्टेशन बुलाने का एकमात्र उद्देश्य उन्हें प्रताड़ित करना तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 170 का दुरुपयोग करके उन्हें हिरासत में लेना है। यह धारा पुलिस को 24 घंटे की निवारक हिरासत का अधिकार देती है, जिसका दुरुपयोग करके पुलिसकर्मी आवेदक को परेशान कर सकते हैं। दोनों पक्षों को एक साथ बुलाने से जानबूझकर विवाद उत्पन्न किया जा सकता है, जिसके बाद धारा 170 का सहारा लिया जा सकता है। आवेदक एवं उनके परिजन गंभीर मानसिक तनाव एवं अपमान से गुजर रहे हैं।

पीड़ित महिला ने पुलिस अधिकारियों से बीएनएस, 2023 की धारा 35 एवं 179 के तहत लिखित समन के माध्यम से बुलाने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें कि वे आवेदक एवं उनके परिजनों को किसी भी जाँच हेतु लिखित समन के माध्यम से ही पुलिस स्टेशन बुलाएँ तथा विपक्षी पक्ष को अलग-अलग तिथियों एवं समय पर बुलाएँ ताकि किसी भी टकराव की स्थिति से बचा जाए।

उधर वरिष्ठ एडवोकेट सतिंदर सिंह ने भी पीड़ित पक्ष की मांग को जायज ठहराते हुए बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 179 पुलिस को समन जारी करने का अधिकार देती है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति काल्पनिक शिकायत का लाभ न उठाए तथा बिना लिखित समन के पुलिस स्टेशन न बुलाया जाए। यह भी प्रावधान है कि किसी महिला का पुलिस स्टेशन पर पूछताछ न हो, बल्कि उसके निवास स्थान पर ही की जाए।