Monday, 07 September 2026
Breaking News
मां मनसा देवी निष्काम सेवक संघ ने लगाया 12वां ब्लड डोनेशन कैम्प मनोज धीमान की हिंदी की दो और फिक्शन पुस्तकें प्रकाशित m‘राज़ की बात’ और ‘महामानव’ के प्रकाशन के साथ हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या दस हुई पौड़ी गढ़वाल एकता मंच के महिला प्रकोष्ठ ने किया रामायण पाठ का आयोजन शिक्षा में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए इंदु बब्बर राज्य पुरस्कार से सम्मानित आचार्य देवों भवा 2026 में चंडीगढ़ से पहुंचे डॉ. अमनदीप सिंह को ज्योतिष एवं अंकशास्त्र के क्षेत्र में विशेष सम्मान 1965 के भारत-पाक युद्ध की दास्तां, जब फाजिल्का क्षेत्र खाली हो गया था संत विनोबा भावे सम्मान-2026 समारोह में साहित्य, पत्रकारिता एवं समाजसेवा की विभूतियाँ सम्मानित उत्तराखंड भ्रातृ संगठन का भव्य लाइट एंड साउंड शो और श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का सफल मंचन भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के अध्यक्ष कुरेशी का अपहरण और यातनाएं पुलिस ने किया एक प्रदर्शनकारी के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार: सुखबीर सिंह बादल
राष्ट्रीय Trending

भारत सरकार नए बनाए हिट एंड रन केस पर पुनर्विचार करे: लक्ष्मीकांता चावला

Read in:Hindi

(MOREPIC1) अमृतसर, फेस2न्यूज:
कानून निर्माताओं को यह याद रखना होगा कि यह कानून किसी भी तरह ड्राइवरों के हित में नहीं है और हैरानगी यह है कि हिट एंड रन कानून केवल ट्रक और बस चालकों के लिए क्यों? कारें, ट्रैक्टर ट्राली तथा अन्य चौपहिया वाहनों के चालकों के लिए क्यों नहीं? सरकार को विचार करना होगा कि अगर कोई ड्राइवर रुक भी जाता है, वह चाहे किसी भी गाड़ी को चला रहा हो तो जनता ही उन्हें पीट पीट कर अधमरा कर देती है या मार देती है। कानून तो यह बनाना चाहिए कि एक्सीडेंट के बाद जो चालक घायलों की या छोटी गाड़ी वालों की मदद करता है उसको सम्मान दिया जाए अवार्ड दिया जाए।
पंजाब में पूर्व केबिनेट मंत्री रही श्रीमती लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि सरकार को यह भी जानना होगा कि बहुत बार सड़क दुर्घटनाएं छोटी गाड़ी वालों के कारण भी होती है। बहुत सी घटनाएं ऐसी भी हुईं जहां किसी पशु को साइकल या रिक्शा वाले को बचाने के प्रयास में बड़ी गाड़ी भी उलट जाती है। कोई सख्त कानून बनाना है तो उनके लिए बनाइए जो शराब पीकर गाडियां चलाते हैं अधिक दर्घटनाओं का कारण नशा होता है। ट्रक व बस ड्राइवरों पर यह अत्याचार होगा। सरकार यह तय करें। ड्राइवर बंधुओं से भी यह अपील है कि वह अपने आंदोलन को किसी भी तरह हिंसक ना होने दें।