Saturday, 12 September 2026
Breaking News
चण्डीगढ़ बिजनेस काउंसिल ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का स्वागत किया तीन दिन ठहाकों के… कलाग्राम में सजेगा कॉमेडी का रंगमंच सेंट्रल लाइब्रेरी में फिल्म "मुसर्रत" का विशेष शो 12 सितंबर को एंटी-स्ट्रेस सेमिनार ने जीसीसीबीए 50 के छात्रों को सिखाए तनाव दूर करने के आसान तरीके मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की भेंट, अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह मां मनसा देवी निष्काम सेवक संघ ने लगाया 12वां ब्लड डोनेशन कैम्प मनोज धीमान की हिंदी की दो और फिक्शन पुस्तकें प्रकाशित m‘राज़ की बात’ और ‘महामानव’ के प्रकाशन के साथ हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या दस हुई पौड़ी गढ़वाल एकता मंच के महिला प्रकोष्ठ ने किया रामायण पाठ का आयोजन शिक्षा में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए इंदु बब्बर राज्य पुरस्कार से सम्मानित आचार्य देवों भवा 2026 में चंडीगढ़ से पहुंचे डॉ. अमनदीप सिंह को ज्योतिष एवं अंकशास्त्र के क्षेत्र में विशेष सम्मान
राष्ट्रीय Trending

काज़ीरंगा होटल परियोजना का विरोध कर रहे प्रणब डोले को जमानत के बाद NSA हिरासत, उठे सवाल

नव ठाकुरीया

जब पूर्वी असम विनाशकारी बाढ़ की चपेट में था—लोग डूब रहे थे, फसलें बर्बाद हो रही थीं और हजारों परिवार बेघर हो रहे थे—तब जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक स्थानीय एक्टिविस्ट को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA), 1980 के तहत हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई स्थानीय अदालत से जमानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद की गई।
प्रणब डोले को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इससे एक दिन पहले उन्हें गुवाहाटी के एक इलाके से हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ बोकाखाट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था और गोलाघाट जिला अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। प्रणब के साथ जेल में बंद चार अन्य एक्टिविस्ट—अमित नाग, ब्रिजित कुतुम, भास्कर सैकिया और राजीव पेगू—को भी 29 जुलाई 2026 को जमानत मिल गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अगले ही दिन असम सरकार ने प्रणब को फिर से हिरासत में लेने के लिए NSA के प्रावधान लागू कर दिए।

प्रणब पूर्वी असम में दुनिया भर में मशहूर काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व के पास एक लग्ज़री टूरिज़्म प्रोजेक्ट के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार ने हाल ही में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट के पास इंग्ले/इनले पाथर में इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 30 बीघा जमीन आवंटित की थी। असम टूरिज़्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ATDC) को जमीन सौंपे जाने के बाद बहस छिड़ गई और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह दावा करते हुए कि इस प्रोजेक्ट का पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों पर बुरा असर पड़ेगा, प्रणब ने 29 जून को उस जगह पर एक प्रदर्शन आयोजित किया। इसके चलते गोलाघाट जिले के बोकाखाट में उनके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की गई।

प्रणब की गिरफ्तारी के बाद दुनिया भर में नाराजगी देखी गई थी और NSA के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद भी कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ‘कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन’ (CASR) ने प्रणब पर NSA लगाने की कड़ी निंदा की। संगठन का तर्क है कि आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने वाले एक लोकतांत्रिक एक्टिविस्ट के खिलाफ निवारक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक असहमति पर राज्य के हमले में खतरनाक बढ़ोतरी को दर्शाता है।

संगठन ने कहा कि प्रणब डोले को निशाना बनाए जाने की घटना को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। उसके अनुसार देशभर में हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने, शांतिपूर्ण ढंग से संगठन बनाने और विरोध-प्रदर्शन करने के कारण कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, छात्रों, ट्रेड यूनियन के सदस्यों और मानवाधिकार रक्षकों पर लगातार NSA, UAPA और अन्य विशेष कानूनों के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को आपराधिक ठहराने का बढ़ता चलन संवैधानिक लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

इससे पहले, सिविल सोसाइटी समूहों, संगठनों, ट्रेड यूनियनों और जागरूक नागरिकों के एक समूह ने प्रणब की लंबी हिरासत की निंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी। 60 से अधिक संगठनों ने एक संयुक्त बयान में अधिकारियों से अपनी जमीन, आजीविका और पर्यावरण की रक्षा करने वाले समुदायों को अपराधी ठहराने का सिलसिला बंद करने की अपील की थी।

कई वर्षों से काज़ीरंगा के आसपास रहने वाले आदिवासी समुदाय अपनी जमीन को कमर्शियल और टूरिज़्म प्रोजेक्ट्स के लिए सौंपे जाने का विरोध कर रहे हैं। इनमें इंग्ले यानी हाथीकुली में प्रस्तावित लग्ज़री होटल भी शामिल है। समूह के बयान में कहा गया है कि काज़ीरंगा फॉरेस्ट रिज़र्व की कोहोरा रेंज से सटी यह होटल साइट हाथियों के लिए एक अहम रिहाइश और आने-जाने का रास्ता यानी कॉरिडोर है।

बयान में यह भी कहा गया कि ऐसे समय में जब भारत समेत पूरी दुनिया आपदाओं, पर्यावरण और जलवायु संकट के अधिक जोखिम का सामना कर रही है, विकास के विनाशकारी मॉडल से जुड़ी चिंताओं को सार्वजनिक बहस में उठाना बहुत जरूरी हो गया है। समूह ने जोर देकर कहा कि जमीन पर अपने अधिकारों और पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने वाले आदिवासी और मूल निवासी समुदाय देश के दुश्मन नहीं हैं।

‘सेव काज़ीरंगा’ कैंपेन ने अधिकारियों से सख्त NSA के तहत प्रणब की हिरासत की उचित प्रक्रिया और न्यायिक निगरानी के साथ समीक्षा करने को कहा है। काज़ीरंगा के इको-सेंसिटिव ज़ोन पर असर डालने वाले किसी भी प्रोजेक्ट के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने के पर्यावरण कार्यकर्ताओं, समुदाय के सदस्यों और नागरिकों के अधिकार की रक्षा की मांग करते हुए अभियान ने कहा कि काज़ीरंगा अब सिर्फ एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं रह गया है।

अभियान के अनुसार काज़ीरंगा को दुनिया भर में अनगिनत प्रजातियों के घर के तौर पर पहचान मिली है और यहां संवेदनशील वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। इसके साथ ही पीढ़ियों से स्थानीय समुदाय इस वन क्षेत्र के साथ रह रहे हैं और उससे जुड़े हुए हैं।

कांग्रेस पार्टी भी प्रणब की लंबी हिरासत के खिलाफ विरोध में शामिल हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता जयराम रमेश ने मौजूदा कानूनों के उल्लंघन जैसे संदिग्ध विदेशी लेन-देन का हवाला देते हुए निवारक हिरासत कानूनों के कथित दुरुपयोग के लिए असम सरकार की आलोचना की। प्रणब की हिरासत के लिए बताए गए आधारों पर सवाल उठाते हुए रमेश ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारें कार्यकर्ताओं, मजदूरों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ सख्त कानूनों का इस्तेमाल करके असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही हैं। असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई ने भी सरकार के अलोकतांत्रिक व्यवहार की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक व्यक्ति पर NSA लगाए जाने को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, जिसके पीछे के कारण केवल उन्हें ही पता थे।
(लेखक पूर्वोत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार)