मनमोहन सिंह ‘दानिश’
आज से 67 साल पहले सोलन के बागड़ियां हाउस में जन्मा हमारा डिग्री कॉलेज आज अपना 68 वाँ जन्म दिवस मना रहा है। इस कॉलेज में पढ़े या पढ़ रहे सभी छात्रों और शिक्षकों को बहुत बहुत बधाई।
मझे भी शिक्षा के इस मंदिर से पढ़ कर निकले 52 साल हो गए। तब से अब तक नदियों में न जाने कितना पानी बह गया। लेकिन इस कॉलेज से जुड़ी मेरी यादें आज भी ताजा हैं। इस कॉलेज को अपने जीवन से अलग करके मैं या कोई भी अपने अस्तित्व की पहचान नहीं कर सकता। मेरे मानस पटल पर आज तक वो फिल्म चलती रहती है जब मैं पहली बार कॉलेज में आया था। मैं बहुत सहमा सा था। धर्मपुर जैसे छोटे से गांव के स्कूल से निकल कर सोलन जैसे बड़े शहर के बड़े से कॉलेज में रैगिंग का डर मुझे कई दिन तक रहा। मुझे याद है शुरू के दो तीन महीने तो मैं कॉलेज की कैंटीन में भी नहीं गया। उस समय प्रभाकर उस कैंटीन को चलाते थे।
खैर धीरे धीरे दोस्त बनने लगे।
शिक्षकों से भी रिश्ते सहज हो गए और फिर ऐसा संबंध बना कि आज तक कॉलेज जाने और इस इमारत को बार बार देखने का बहुत मन करता है। वही यादें आज भी उन दीवारों में मौजूद हैं जिन पर कभी हम कुछ भी लिख दिया करते थे। हमारे डी पी शर्मा जी का स्पोर्ट्स रूम आज भी वहीं है। हमने इस कमरे में बहुत समय गुज़ारा है। सबसे बढ़ कर वे अध्यापक जिन्होंने हमारी सैंकड़ों “बेवकूफियों” और गलतियों को अनदेखा कर हमें पढ़ाया। उनके हम आज भी कर्ज़दार हैं। आज मेरे पास दोस्तों की एक लंबी सूची है। यह भी इस कॉलेज की देन है। इसी ने मुझे मेरी पहचान दी, दोस्त दिए और सबसे बढ़ कर अध्यापक दिए। अगर सभी के नाम लिखने लगूंगा तो कई पन्ने भर जाएंगे। आज दोस्तों और अध्यापकों के रूप में मिली आपार दौलत ने मुझे ज़रदार बना दिया। सभी को मेरी शुभकामनाएं।
हिमाचल
Trending
शिक्षकों से भी रिश्ते सहज हो गए और फिर ऐसा संबंध बना कि आज तक कॉलेज जाने और इस इमारत को बार बार देखने का बहुत मन करता है। वही यादें आज भी उन दीवारों में मौजूद हैं जिन पर कभी हम कुछ भी लिख दिया करते थे। हमारे डी पी शर्मा जी का स्पोर्ट्स रूम आज भी वहीं है। हमने इस कमरे में बहुत समय गुज़ारा है। सबसे बढ़ कर वे अध्यापक जिन्होंने हमारी सैंकड़ों “बेवकूफियों” और गलतियों को अनदेखा कर हमें पढ़ाया। उनके हम आज भी कर्ज़दार हैं। आज मेरे पास दोस्तों की एक लंबी सूची है। यह भी इस कॉलेज की देन है। इसी ने मुझे मेरी पहचान दी, दोस्त दिए और सबसे बढ़ कर अध्यापक दिए। अगर सभी के नाम लिखने लगूंगा तो कई पन्ने भर जाएंगे। आज दोस्तों और अध्यापकों के रूप में मिली आपार दौलत ने मुझे ज़रदार बना दिया। सभी को मेरी शुभकामनाएं।