Saturday, 12 September 2026
Breaking News
चंडीगढ़  ग्रेन मार्केट, सेक्टर-26 में पेड पार्किंग टेंडर को अंतिम रूप देने पर हाईकोर्ट की रोक जीसीसीबीए-50 में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य: व्यावसायिक नैतिकता की ओर एक यात्रा" कार्यशाला का समापन सत्र आयोजित भारत-पाक सरहद पर भारतीय मुसलमानों की देश भक्ति देख पाकिस्तानी हैरान नशा तस्करों की कमाई अब जनता की होगीः मुख्यमंत्री चण्डीगढ़ बिजनेस काउंसिल ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का स्वागत किया तीन दिन ठहाकों के… कलाग्राम में सजेगा कॉमेडी का रंगमंच सेंट्रल लाइब्रेरी में फिल्म "मुसर्रत" का विशेष शो 12 सितंबर को एंटी-स्ट्रेस सेमिनार ने जीसीसीबीए 50 के छात्रों को सिखाए तनाव दूर करने के आसान तरीके मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की भेंट, अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह मां मनसा देवी निष्काम सेवक संघ ने लगाया 12वां ब्लड डोनेशन कैम्प
हिमाचल Trending

कौन कहता है गया वक्त लौट कर नहीं आता?

 

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

वही इमारत, वही वातावरण, वही छात्र, वही अध्यापक, वही सीटियों, युवाओं का शोर और वही कॉलेज, जहां से लगभग 52 साल पहले हम लोग अपनी स्नातक की डिग्री ले कर निकले थे। जिंदगी की आपाधापी से दूर कल मुझे और मेरे कॉलेज के कुछ सहपाठियों को डिग्री कॉलेज सोलन के 68 वें स्थापना दिवस में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कॉलेज की युवा प्रिंसिपल शिवानी शर्मा मुख्यतिथि थीं। वहां शिक्षकों, छात्रों, के खिले चेहरों में हम सभी अपना 52 साल पुराना चेहरा ढूंढ रहे थे।

दिलों में वही उमंग वही ऊर्जा महसूस हो रही थी जो कभी 18-20 साल की उम्र में होती थी। मेरे साथ ओएसए के अध्यक्ष राजीव चोपड़ा, मेरे सीनियर भाई कुलराकेश पंत, मेरे सहपाठी मोहिंदर नाथ सोफ़त, हरि शर्मा, लीला दत्त शर्मा, पंकज, विजय वर्मा, रीता, सुलोचना, रेणुका भी वहां मौजूद थीं। कुछ घंटों में हमने अपने कॉलेज की दिनों को फिर से जी लिया। कुछ समय के लिए हम यह भूल गए कि अब हम उम्र के 70 पड़ाव पार कर चुके हैं।

वहां पूरी तरह से बिंदास हो कर हम ने जो चाहा वो कहा वो किया। गाने के लिए मेरी अपनी आवाज़ इतनी खराब है कि पूछो मत। पर जोश में हमने भी गीत की कुछ पंक्तियां गा दी। हालांकि बाद में जब मैने वह रिकॉर्डिंग सुनी तो मेरी अपनी हंसी ही नहीं रुक रही थी। सोच रहा था इतना बेसुरा कोई कैसे गा सकता है। पर स्टूडेंट्स ने उसे भी स्वीकार किया। लेकिन कॉलेज के छात्र छात्राओं ने जो भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए उसे देख कर कम से कम मै तो इंडियन आइडल जैसे प्रोग्राम भूल गया। प्रतिभा का खज़ाना नज़र आया। चाहे वो एकल नृत्य था या फ़िर नाटी। कमाल के थे। क्लासिकल डांस, और राग आधारित गीत भी सम्मोहित करने वाले थे।

हमें हमारा छात्र जीवन फिर से लौटाने के लिए हम कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ शिवानी शर्मा, ओएसए की सचिव डॉ स्नेहा मेहता, और कॉलेज के पूरे स्टाफ और छात्रों के आभारी हैं। अब सोचता हूं कि कौन कहता है कि गया वक्त लौट कर नहीं आता? बस ज़रा अपने स्कूल या कॉलेज जा कर देखिए। मुझे पूरा विश्वास है कि कभी फिर से हमें यह मौका ज़रूर मिलेगा।