Tuesday, 18 August 2026
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राइट टू सर्विस कमीशन ने प्रभावित आवंटी मनोज वशिष्ठ को 5,000 रुपये तक का मुआवज़ा देने के दिए आदेश

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ई-नीलामी से पूर्व विकास कार्य पूर्ण करना आवश्यक: राइट टू सर्विस कमीशन, एचएसवीपी ई-नीलामी मामले में आयोग के दिशा-निर्देश

संजय मिश्रा /चंडीगढ़

हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने सेक्टर 77 फरीदाबाद में एचएसवीपी द्वारा किए गए एक ई-नीलामी प्रकरण की समीक्षा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्लॉट को ई-नीलामी में शामिल करने से पूर्व सभी आवश्यक विकास कार्यों का पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया आवंटियों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निहित रूप से आवश्यक है।

आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि आम नागरिक सरकार पर विश्वास कर ई-नीलामी प्रक्रिया में भाग लेते हैं। ऐसे में यह अपेक्षित है कि संबंधित विभाग द्वारा सभी आधारभूत सुविधाओं एवं विकास कार्यों को समय पर पूर्ण किया जाए, जिससे आवंटी बिना किसी असुविधा के निर्माण कार्य आरंभ कर सकें।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी संज्ञान लिया कि आवंटन पत्र की शर्तों के अनुरूप, समय पर कब्जा न दिए जाने की स्थिति में देय ब्याज का भुगतान विलंब से किया गया। आयोग के हस्तक्षेप के पश्चात इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई। आयोग ने एस्टेट ऑफिसर को निर्देश दिए हैं कि आवंटी को देय विलंबित ब्याज का भुगतान किया जाए, कब्जे की तिथि में आवश्यक संशोधन किया जाए तथा वसूली गई एक्सटेंशन फीस नियमानुसार वापस की जाए। इस संबंध में अनुपालना रिपोर्ट 05 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

ई-नीलामी से संबंधित अभिलेखों की समीक्षा में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित प्लॉट को “क्लियर” दर्शाया गया था, जबकि उसके सामने की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में थी। आयोग ने इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर और अधिक सावधानी एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है। इस संपूर्ण प्रकरण की जानकारी हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव के संज्ञान में भी लाई गई है, ताकि आवश्यक प्रशासनिक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

आयोग ने प्रभावित आवंटी श्री मनोज वशिष्ठ को हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट, 2014 के प्रावधानों के तहत 5,000 रुपये तक का मुआवज़ा प्रदान करने के आदेश दिए हैं, जिसका भुगतान एचएसवीपी द्वारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। साथ ही, विभाग को यह स्वतंत्रता दी गई है कि नियमानुसार यह राशि संबंधित अधिकारियों से वसूल की जा सके।

राइट टू सर्विस कमीशन ने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में एचएसवीपी द्वारा ई-नीलामी प्रक्रिया में सभी विकास कार्यों को पूर्ण करने के उपरांत ही नीलामी की जाएगी तथा आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।