मनमोहन सिंह ‘दानिश’
आजादी के 80 वें पर्व की सभी को बधाई।
आज 15 अगस्त का दिन हम सब के लिए गौरव के लम्हे ले कर आया है। हम याद करते हैं उन रण बांकुरों को जिन्हों ने देश को आज़ाद करवाने में अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। पूरे देश ने यह लड़ाई लड़ी। लाखों लोगों ने अपनी अपनी तरह से इस में अपनी आहुति डाली। लेकिन हमारे जहन में कुछ गिनती के नाम रह गए। उनमें महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, खुदी राम बोस, करतार सिंह सराभा, शिवराम राजगुरु, सुखदेव थापर, जतिन दास, गोपाल कृष्ण गोखले, बटुकेश्वर दत्त, दुर्गा भाभी, सुशीला दीदी और ऊधम सिंह। या इनके अलावा कुछ और नाम भी कुछ लोगों को याद होंगे। लेकिन लाखों नाम ऐसे हैं जिनका कही ज़िक्र भी नहीं होता।
आज के दिन मैं सोलन क्षेत्र के कुछ ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों का ज़िक्र करना और उन्हें सलाम करना चाहता हूं जिन्हों ने बघाट रियासत में प्रजामंडल की स्थापना की। मेरे पिता कामरेड प्रेम चंद प्रेमी उस प्रजामण्डल को बनाने वाले लोगों में शामिल थे। आज जो कुछ भी मैं आपके साथ बाँट रहा हूं यह सब कुछ उन्होंने ही मुझे और मेरे भाई बहनों को बताया था। उन्होंने बताया था कि उस ज़माने में बघाट में राजा दुर्गा सिंह गद्दी पर थे। पूरे देश में राजाओं के खिलाफ प्रजामंडल आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा था। इसी सिलसिले में कुछ लोगों की एक बैठक सोलन में हुई। यह बात शायद 1944 या 45 की है। इस बैठक में कुलानंद पंत, नानक चंद, लाला चंदन दास, कामरेड प्रेम चंद प्रेमी, कामता प्रसाद गुप्ता, ज्ञान चंद टूटू, और शिमला से पंडित पद्म देव ने हिस्सा लिया। इसी बैठक में प्रजामंडल की स्थापना हुई। हो सकता है इनमें से कि कुछ लोगों के नाम शायद मैं भूल भी गया हूंगा।
उस समय के हालत ऐसे थे कि लोग अपनी दुकानों या मकानों पर तिरंगा लगाने से घबराते थे। गांधी टोपी भी कोई कोई ही पहनता था। उन्हीं दिनों अरुणा आसफ़अली भी सोलन आई थी और प्रजामंडल के इन साथियों से मिलीं। पिताजी बताते थे कि उस समय हम लोग इतने जोश में थे कि एक बार हमने शिमला जा रही रेलवे लाइन को बम से उड़ाने का प्रोग्राम भी बना लिया। पर अरुणा आसफ़अली ने इसे हमारी गलत सोच और नीति बताया और पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलाने को कहा। उसके बाद फिर प्रजामंडल के लोग सुबह प्रभात फेरी लगाने लगे। लोगों में जनजागरण का काम भी प्रजामंडल के मंच से होता रहा।
आखिर 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हो गया।पूरे देश की तरह सोलन में भी खुशी की लहर थी। लेकिन आज़ादी का यह जश्न प्रजामंडल के साथियों ने गंज बाजार में मनाया। उन्होंने वही ध्वजारोहण किया तिरंगा फहराया। देशभक्ति के गीत गाए गए। लेकिन शहर के दूसरे कुछ लोगों ने राजा दुर्गा सिंह के कहने से दुर्गा क्लब में झंडा फहराया।
प्रजामंडल में अग्रणी रहे कुलानंद पंत के बेटे कुलराजीव पंत ने अखबार में छपे अपने एक लेख में लिखा है कि 15 अगस्त 1947 को प्रजामंडल के लोगाें ने सुबह प्रभात फेरी निकाली जो कि पूरे बाज़ार से हो कर राजा के महलों तक गई। उसके बाद वापिस लौटते हुए वे लोग गंज बाजार में इकट्ठे हुए और तिरंगा फहराया। यह कार्यक्रम लगभग आठ बजे तक चला। कुलराजीव पंत के लेख में यह भी ज़िक्र है कि उस दिन एक कार्यक्रम सनातन धर्म मंदिर में भी आयोजित हुआ था और शाम को प्रजामंडल की एक बैठक उनके पिता कुलानंद पंत के औषधालय में भी आयोजित की गई थी। नमन है इन योद्धाओं को।
यह सारी जानकारी मुझे मेरे पिता कामरेड प्रेम चंद प्रेमी ने कई वर्ष पहले दी थी जबकि कुलराजीव पंत को यह जानकारी श्री निवास शास्त्री की डायरी और बाबूलाल जी से बातचीत से मिली है।
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