Tuesday, 29 September 2026
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छात्रों के मुख्य न्यायाधीश का विरोध के मायने

संजय मिश्रा

नालसर लॉ यूनिवर्सिटी हैदराबाद के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया है। करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार एवं शिक्षकों को पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया है। छात्रों ने पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी से अपील की है कि वो अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करें एवं दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को न बुलाएं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन को अलग-अलग बैच के छात्रों की तरफ से कम से कम छह अलग-अलग पत्र सौंपे गए हैं। इनमें से हर पत्र में प्रस्तावित निमंत्रण पर फिर से विचार करने की मांग की गई है। प्रत्येक पत्र में करीब 70 से 75 छात्रों के हस्ताक्षर हैं।

छात्र नाराज क्यों हैं ?

23 जुलाई को वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रोफ़ेसर और प्रशासन को सौंपे गए अपने पत्र में छात्रों ने सुनवाई के दौरान CJI की कथित टिप्पणियों का जिक्र किया।  छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘चलो संसद’ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस के कथित ज्यादतियों की सुनवाई के दौरान सीजेआई की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई है। कहा कि संबंधित याचिका की तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की सीजेआई ने अनुमति नहीं दी थी। इसमें कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाने के प्रस्ताव पर उन्होंने वकील से कहा था कि हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें। हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।

छात्रों ने क्या कहा

छात्रों ने कहा कि यूनिवर्सिटी द्वारा सिखाए गए मूल्य जिनमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत तरीके से विचार करना शामिल है, लेकिन सी जे आई के फैसलों में साफ तौर पर दिखता है कि प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के गंभीर आरोपों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है जो NALSAR में हमें सिखाए गए मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता है।

यूनिवर्सिटी ने छात्रों के इस लेटर का नहीं दिया है कोई जवाब

अलग-अलग बैच के पांच और पत्रों में मूल पत्र में उठाई गई चिंताओं का समर्थन किया गया। मीडिया से बात करते हुए छात्रों ने कहा कि उन्हें अभी तक यूनिवर्सिटी से कोई जवाब नहीं मिला है। वाइस-चांसलर श्रीकृष्ण देव राव से भी संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं। वहीं, संस्थान के रजिस्ट्रार ने कहा कि उन्हें इन पत्रों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

स्टूडेंट बार काउंसिल का बयान

स्टूडेंट बार काउंसिल के एक सदस्य छात्र ने कहा कि हम CJI के पद का सम्मान करते हैं। लेकिन हमें संविधान और संवैधानिक मूल्यों के बारे में सिखाया गया है, और हम ऐसी किसी चीज का समर्थन नहीं करना चाहते जो उन मूल्यों के खिलाफ हो। बार काउंसिल के एक अन्य छात्र ने शुरुआती पत्र का हवाला देते हुए कहा कि हम यूनिवर्सिटी से अनुरोध करते हैं कि वे दीक्षांत समारोह के लिए मुख्य अतिथि के इस चयन पर गंभीरता से पुनर्विचार करें… नाम नहीं छापने के शर्त पर नालसर यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक ने बताया कि छात्रों के इस विरोध को देखते हुए ऐसी भी सम्भावना है कि इस दीक्षांत समारोह को ही कैंसिल कर दिया जाये।