राज सदोष/अबोहर।
माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में, जिसे बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था, दिवाली के जश्न में विदेशों से आए मेहमानों ने भी हिस्सा लिया। परिसर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें ब्रह्मा कुमारी बहनें कलश लिए हुए चल रही थीं। संस्था की 90वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘नवदशकोत्सव’ की थीम पर एक रंगोली बनाई गई। इसके अलावा, पारंपरिक गंगा आरती से प्रेरित होकर मिट्टी के दीपों से एक विशेष आरती भी की गई।
मुख्य प्रशासिका बीके मोहिनी दीदी ने कहा कि अपने भीतर आत्मा का प्रकाश जगाकर, हममें से हर कोई एक मार्गदर्शक बन सकता है—जो समाज, राष्ट्र और पूरी दुनिया को अज्ञानता के अंधेरे से बाहर निकालने में मदद कर सकता है। अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका जयंती दीदी ने कहा कि सच्ची समृद्धि केवल भौतिक धन-संपत्ति से नहीं मापी जाती। प्रेम, शांति, पवित्रता, संतोष, सद्भावना और आपसी सम्मान से भरा घर, असल में धरती पर स्वर्ग के समान होता है। महासचिव बीके करुणा भाई और अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने इस बात पर जोर दिया कि जब हर आत्मा के भीतर ज्ञान का प्रकाश जगमगाएगा, तो यह सच्ची खुशी, शांति और एक ‘स्वर्णिम संसार’ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य प्रशासिकाएं सुदेश दीदी और शशि दीदी; ज्ञान सरोवर की निदेशिका प्रभा दीदी; अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके प्रताप मिड्ढा; वरिष्ठ राजयोग शिक्षिकाएं उषा दीदी और शीलू दीदी; वैज्ञानिक प्रभाग के प्रमुख मोहन सिंघल; शांतिवन प्रबंधक प्रकाश भाई; और मेडिकल विंग के सचिव बनारसी लाल भी उपस्थित थे।
सतीश भाई के नेतृत्व में ‘मधुरवाणी’ समूह ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कलाकारों ने अपने नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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