Wednesday, 15 April 2026
Breaking News
अभी ना जाओ छोड़ कर ........ वृिद्धम ने किया मेगा फ्री एस्ट्रो कंसल्टेशन इवेंट का भव्य आयोजन विद्यार्थी अपनी क्षमता को पहचाने और दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करें : डॉ. अनीता खोसला सांसद साहनी के निजी सदस्य विधेयक ऑनलाइन हेट स्पीच (प्रिवेंशन) बिल, 2024 को संसद में प्रस्तुत किए जाने की राष्ट्रपति ने स्वीकृति प्रदान की जीरकपुर के ढकोली में ​खुला बचपन प्ले स्कूल अमरावती क्रिकेट एकेडमी और कुरुक्षेत्र क्रिकेट एकेडमी ने अपने-अपने लीग मैच जीते मठ मंदिर की रथ यात्रा के दौरान हरे कृष्णा-हरे राम व जय राधा-माधव के जयकारों से गूंज उठा शहर श्री साई धाम, सेक्टर 29 में गोपाल काला दही हांडी उत्सव का हुआ आयोजन हल्लोमाजरा में गैस कनेक्शन बंद होने से लोग परेशान, प्रशासन से जल्द समाधान की मांग गौड़ीय मठ का सनातन सेवा में योगदान सराहनीय : गुलाब चंद कटारिया
पंजाब Trending

दीवान टोडरमल जैन की ऐतिहासिक हवेली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए: अग्रवाल समाज

Read in:Hindi

(MOREPIC1)    फेस2न्यूज /चंडीगढ़ :

अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी डा. राजकुमार गोयल ने केंद्र सरकार, के संस्कृति मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पुरजोर मांग की है कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद शहर में स्थित दीवान टोडरमल जैन की ऐतिहासिक हवेली जिसे जहाज हवेली के नाम से जाना जाता है, को शीघ्र राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और इसका वैज्ञानिक संरक्षण एवं संवर्धन किया जाए।

दीवान टोडरमल जैन भारतीय इतिहास में त्याग, साहस, करुणा और मानवता के ऐसे अद्वितीय प्रतीक हैं जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। मुगल काल के दौरान जब सरहिंद में गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी को अत्यंत अमानवीय यातनाएं दी गई और उनके अंतिम संस्कार के लिए भूमि तक देने से इनकार कर दिया गया तब दीवान टोडरमल जैन जी ने मानव धर्म निभाते हुए अपने धन से स्वर्ण मुद्राएँ बिछाकर भूमि खरीदी और उनका विधिवत अंतिम संस्कार कराया। 

यह कार्य केवल एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि मानवता, सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता का महान उदाहरण है जो आज भी पूरे देश को प्रेरणा देता है। दीवान टोडरमल जैन जी की हवेली केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है बल्कि यह उस महान इतिहास की सजीव साक्षी है जिसने भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। दुर्भाग्यवश समय के साथ इस ऐतिहासिक हवेली की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और यदि शीघ्र संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य धरोहर नष्ट होने की कगार पर पहुँच सकती है।

देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर संरक्षित किया गया है, उसी तर्ज पर दीवान टोडरमल जैन की हवेली को भी राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा मिलना चाहिए ताकि इसका संरक्षण, जीर्णोद्धार और शोध कार्य व्यवस्थित रूप से हो सके और आने वाली पीढ़ियां इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।