Sunday, 11 October 2026
Breaking News
राज नागपाल एक बार फिर सर्वसम्मति से ऑल इंडिया राजीव मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष चुने गए महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल का राम दरबार में भव्य स्वागत पंचकूला में पहली बार सजेगा ऐतिहासिक गरबा-डांडिया का महा-पंडाल पंजाब विवि के पूर्व रशियन विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज मालवीय द्वारा रशियन में अनुदित तीन पुस्तकों का विमोचन प्रभु श्री राम कथा सुनना और सुनाना पूर्व निश्चित होता है और ये अवसर सौभाग्य से ही प्राप्त होता है : आचार्य पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री जी 46वें भव्य रामलीला मंचन की तैयारियां पूरी, आधुनिक तकनीक और भव्य दृश्यों से सजेगा रामलीला मंच इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के 25 साल पूरे; हर साल 250 स्कॉलरशिप देने और नेशनल रिसर्च प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा "नशा एवं टीबी मुक्त युवा" विषय पर आधारित एनएसएस सात-दिवसीय शिविर का समापन पुलिस वाले ने लड़की छेड़ी, क्या बड़ी बात है? प्राचीन कला केंद्र में कवियों ने बटोरी वाह वाही
पंजाब Trending

दीवान टोडरमल जैन की ऐतिहासिक हवेली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए: अग्रवाल समाज

Read in:Hindi

(MOREPIC1)    फेस2न्यूज /चंडीगढ़ :

अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी डा. राजकुमार गोयल ने केंद्र सरकार, के संस्कृति मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पुरजोर मांग की है कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद शहर में स्थित दीवान टोडरमल जैन की ऐतिहासिक हवेली जिसे जहाज हवेली के नाम से जाना जाता है, को शीघ्र राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और इसका वैज्ञानिक संरक्षण एवं संवर्धन किया जाए।

दीवान टोडरमल जैन भारतीय इतिहास में त्याग, साहस, करुणा और मानवता के ऐसे अद्वितीय प्रतीक हैं जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। मुगल काल के दौरान जब सरहिंद में गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी को अत्यंत अमानवीय यातनाएं दी गई और उनके अंतिम संस्कार के लिए भूमि तक देने से इनकार कर दिया गया तब दीवान टोडरमल जैन जी ने मानव धर्म निभाते हुए अपने धन से स्वर्ण मुद्राएँ बिछाकर भूमि खरीदी और उनका विधिवत अंतिम संस्कार कराया। 

यह कार्य केवल एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि मानवता, सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता का महान उदाहरण है जो आज भी पूरे देश को प्रेरणा देता है। दीवान टोडरमल जैन जी की हवेली केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है बल्कि यह उस महान इतिहास की सजीव साक्षी है जिसने भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। दुर्भाग्यवश समय के साथ इस ऐतिहासिक हवेली की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और यदि शीघ्र संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य धरोहर नष्ट होने की कगार पर पहुँच सकती है।

देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर संरक्षित किया गया है, उसी तर्ज पर दीवान टोडरमल जैन की हवेली को भी राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा मिलना चाहिए ताकि इसका संरक्षण, जीर्णोद्धार और शोध कार्य व्यवस्थित रूप से हो सके और आने वाली पीढ़ियां इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।  

0 Comments