जीरकपुर, कृत्रिका:
जीरकपुर में 6 किलोमीटर पीआर 7 एयरपोर्ट रोड में 10 ब्लैक स्पॉट्स हैं। सड़क की लगभग 6 किलोमीटर की दूरी में इंजीनियरिंग की खामी रही है, जिसके चलते इस रोड पर वाहनों और पैदल चलने वाले लोगों के साथ एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है। यह खुलासा पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर मोहाली ने अध्ययन के बाद किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जीरकपुर में मैक्डोनाल्ड चौक से खरड़ के सभी एन्क्लेव तक 21 किलोमीटर की एयरपोर्ट रोड पर 10 ब्लैक स्पॉट्स हैं। इन जगहों पर लोगों की जान खतरे में रहती है। डीसी मोहाली अमित तलवार ने यह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा है कि एयरपोर्ट रोड के 26 बड़े और छोटे क्रॉसिंग हैं। साल 2017 से 2020 के बीच जितने भी सड़क हादसे हुए, उनमें से 59 प्रतिशत इन्हीं क्रॉसिंग पर या इनके आसपास और बाकी 41 प्रतिशत हादसे अन्य जगहों पर हुए हैं। इन 26 क्रॉसिंग में से 9 क्रॉसिंग पर बड़े एक्सीडेंट हुए हैं। इनको ब्लैक स्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल एक्सीडेंट्स के पीड़ितों में 80 प्रतिशत टू-व्हीलर, पैदल चलने वाले और साइकिल सवार शामिल हैं। वहीं सभी बड़े एक्सीडेंट्स में 60 प्रतिशत फोर व्हीलर्स के कारण हुए हैं। यह अध्ययन पंजाब सरकार के ट्रैफिक सलाहकार डॉ. नवदीप असीजा की अगुवाई वाली टीम ने किया है। टीम ने अध्ययन के बाद सभी ब्लैक स्पॉट्स पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल और रिकवरी वैन्स को तुरंत तैनात करने का सुझाव दिया है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इनमें से हर जगह पर ऊंचे बने रेटरो- रिफ्लेक्टिव फुटपाथ रहते हैं। बनाने की जरूरत है।
साइन बोर्ड और लाइट की कमी से हादसे:
जीरकपुर में 22 प्वॉइंट्स ऐसे हैं, जहां हादसे होने की ज्यादा संभावना रहती है। यहां हादसों का मुख्य कारण इस तरह की जगहों पर साइन बोर्ड न होना व लाइट्स की कमी व स्पीड ब्रेकर नहीं होना है। इन जगहों पर सुधार करने पर ही एक्सीडेंट्स की संख्या में कमी आ सकती है। संबंधित विभाग इस एरिया से ब्लैक स्पॉट्स को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। इससे डेराबस्सी सब-डिवीजन में हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
इन जगहों पर रहती है हादसे की आशंका:
जीरकपुर में 6 किलोमीटर पीआर 7 एयरपोर्ट रोड पर एक्सीडेंट होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा जीरकपुर-चंडीगढ़ बैरियर, टीएम पेट्रोल पंप के सामने, मेट्रो मॉल के पास, सिंहपुरा चौक, मैक्डोनाल्ड चौक, भांखरपुर के पास फ्लाईओवर पर, छत्त लाइट प्वॉइंट, नाभा साहिब हाई ग्राउंड मोड़ और पटियाला चौक पर एक्सीडेंट होने की संभावना ज्यादा रहती है।
ऐसे चिह्नित होता है ब्लैक स्पॉट:
किसी जगह को ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने के लिए पिछले तीन सालों में उस जगह पर हुई मौतों और एक्सीडेंट्स के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। अगर पिछले तीन सालों में किसी जगह पर पांच या ज्यादा मौतें हुई हैं तो उस जगह को ब्लैक स्पॉट चिन्हित किया जाता है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार समय के साथ ब्लैक स्पॉट्स बदलते।
पंजाब
Trending
जीरकपुर: पीआर सेवन रोड पर 10 ब्लैक स्पॉट
Read in:Hindi