Monday, 21 September 2026
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निराशा के समंदर में तलाशो आस के मोती दिलों में इक नई आशा जगाना भी ज़रूरी है

मनमोहन सिंह “दानिश”

आज अचानक मुझे अपना ये पुराना शेर याद आ गया। पिछले कुछ समय से सीनियर सिटीजंस बड़े ही निराश करने वाले संदेश सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। उनमें कुछ रील की शक्ल में और कुछ कहानी की शक्ल में होते हैं। मतलब दुनियां में सीनियर सिटीजंस को निराश करने वाले संदेश काफी लोकप्रिय भी हो रहे हैं।

एक तो पहले ही हमारी उम्र के अधिकतर लोग किसी न किसी छोटी मोटी बीमारी का शिकार होते ही हैं ऊपर से इस तरह के वीडियो, रील, या लेख उन्हें और डिप्रेशन में ले जाते हैं। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि अपनी उम्र के अधिकतर दोस्तों से जब भी किसी नई परियोजना या किसी नए मुद्दे की बात करूं तो वो अक्सर कहते हैं — यार छोड़ अब क्या रह गया है। बहुत कुछ कर लिया अब तो जो है सही है। उनकी बात पूरी तरह से ग़लत तो नहीं पर पूरी तरह से सही भी नहीं है। यह भी ठीक है कि यह जीवन की सच्चाई है। उम्र का बढ़ना एक प्राकृतिक प्रकिया है। पर बढ़ती उम्र को बहाना बना कर हथियार डाल कर बैठ जाना तो कतई ठीक नहीं।

बच्चों की अपनी ज़िंदगी है उन्हें उनके हिसाब से जीने दें। आप यह मान कर चलें कि आप ने खुद ही सब कुछ करना है। बच्चों की सफलता का श्रेय खुद को मत दें। अक्सर मां बाप यह कहते पाए जाते हैं कि वे अपने बच्चों को ऐसा बनाएंगे, वैसा बनाएंगे। या फिर कि हमने बच्चों के ऐसा बनाया है। यह अहसान बच्चों पर मत लादें। और कई बार जब बच्चा वैसा नहीं बनता तो निराश भी हो जाते हैं। हमें भी हमारे मां बाप डॉक्टर इंजीनियर बनाना चाहते थे तो जब नहीं बने तो वे सारी उम्र इसी दुख में जीते रहे कि हम लोग उनके अनुसार नहीं बन पाए। अब आपके बच्चे अपने बच्चों से कुछ ऐसी ही उम्मीदें लगाए बैठे होंगे।

ऐसा लगातार चलता रहता है। तो बेहतर कि अपना जीवन अपने पुराने दोस्तों और साथियों के साथ बिताएं। अपना दिल जवान रखें। किसी समस्या को मैग्नीफाई ग्लास से न देखें। हमारी पीढ़ी के पास हंसने के कई कारण हैं। स्कूल, कॉलेज में जो हंसी मज़ाक हम लोग करते थे उसके आगे आज के स्टैंडअप कॉमेडियन, और कपिल शर्मा शो सब फीका है। उसे याद करें। सबसे बड़ी बात यह है कि जो लोग नेगेटिव सोच रखते हों उनसे उचित दूरी बनाए रखें। यह नकारात्मक सोच आपकी जिंदगी को खोखला कर देती है। और अगर आप पूरी तरह निराश और डिप्रेशन में हैं तो मुझ से संपर्क करें। एक पुराना गीत है उसके दो मिसरे हैं:-

“जीने का अगर अंदाज़ आए तो कितनी हसीन है जिंदगी
मरने के लिए जीना है अगर तो कुछ भी नहीं है ज़िंदगी”