अबोहर, (दलीप)
पूरे भारतवर्ष में जहाँ आज छठ मैया महापर्व बड़ी ही श्रद्धा एव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया वही अबोहर की पुरानी फाजिल्का रोड़ नजदीक बहती कस्सी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा छठ मईया पूजन किया, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कस्सी (नहर) पर छठ महापर्व को लेकर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, इस धार्मिक आयोजन में नगर विधायक संदीप जाखड़ एव विमल ठठई मुख्य मेहमान के तौर पर आमंत्रित थे। महिलाओं व पुरूषों ने विधि विधान से छठ मईया पूजन करते हुए सूर्य भगवान को अघ्र्य (जल) अर्पण करते हुए अपने परिवारों की कुशलक्षेम की प्राथर्ना की। गौरतलब है कि यह पर्व कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस वजह से इसे छठ पर्व कहा जाता है। साथ ही तिथि के स्त्रीलिंग होने की वजह से इसे माता की संज्ञा दी गई है। इसे छठी मईया की उपासना के रूप में देखा जाता है। छठ माता का व्रत पारिवारिक सुख समृद्धि और बच्चों की सुरक्षा के लिए 36 घंटे का व्रत रखा जाता है। छठ मइया और सूर्यदेव की पूजा की जाती है। (MOREPIC1)
छठ पूजा में महिलाएं पति व बच्चों की लंबी आयु की कामना करती हैं और नाक से लेकर मांग तक सिंदूर भरती हैं, इसके अलावा छठ के पर्व में डूबते हुए सूरज की पूजा की जाती है। छठ की पूजा संतान के स्वास्थ्य, सफलता और उसकी दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रखकर की जाती है। इस व्रत को सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी रखते हैं। छठ पूजा का प्राचीन इतिहास में बहुत महत्व है और छठ पूजा से संबंधित पांच सबसे महत्वपूर्ण कहानियां हैं छठ पर्व के दौरान छठ मैया की पूजा की जाती है, जैसा कि ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है। कहा जाता है कि छठ पूजा पवित्र शहर वाराणसी में गढ़ावला वंश द्वारा शुरू हुई थी।