(MOREPIC1)अमृतसर, फेस2न्यूज:
दूध, आटा, दाल चीनी, नमक आदि जो जिंदगी के लिए जरूरी वस्तुएं हैं, गरीब के घर में भी, अमीर के घर में भी उन सबको महंगा करना सरकार का जनविरोधी गरीब विरोधी कदम है। सरकार यह न समझे कि कुछ समान मुफ्त देकर, वे बाकी जनता का मन जीत सकते हैं। पंजाब सरकार यह बताए कि दूध दो रुपये किलो महंगा क्यों किया?
वर्ष 2022 में चार से ज्यादा बार वेरका दूध और उसके साथ ही अमूल, मदर डेयरी आदि सभी कंपनियों ने दूध महंगा कर दिया और इसके साथ ही मार्केट में भी ताजा दूध महंगा हो गया। सरकार बताए गरीब अपने बच्चे को क्या पिलाए। पंजाब की पूर्व केबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि मैंने सरकार से यह कहा है कि अगर दूध नहीं दे सकते तो लिखकर लगा दो कि गरीबों के लिए पीना मना है और अपने डाक्टरों से कहकर कोई ऐसा पाउडर जारी करवा दो जो घोलकर बच्चों को पिला दिया जाए तो बच्चे उसे दूध समझकर पीकर सब्र करें।
क्या सरकार जानती है कि जो आटा पच्चीस रुपये किलो मिलता था वह भी तीस रुपये किलो हो चुका है। जनता को मुफ्त मत दीजिए, लेकिन सस्ता सबको दीजिए। आखिर सरकार सुनती क्यों नहीं। कितनी बार यह बताया कि जो लोग शराब हर कीमत पर अपनी कमाई से खरीद सकते हैं उनको सब कुछ मुफ्त देने का क्या औचित्य है। सरकार महंगाई पर नियंत्रण करे। कम से कम जीवन के लिए आश्यक राशन की वस्तुएं दूध सस्ता करे।