Monday, 27 April 2026
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महिला क्रिकेट विश्वकप : जमीमा की 'तपस्या' पूर्ण हुई , भारत ने इतिहास रचा

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मनमोहन सिंह

लचर गेंदबाजी, खराब क्षेत्र रक्षण और स्मृति मान्धना के जल्दी आउट हो जाने की बाद भी अगर भारत एक दिवसीय विश्व कप के सबसे बड़े स्कोर को पार कर गया तो यह जमीमा का जीवट और उसकी जादूई बल्लेबाजी ही थी। जमीमा और कप्तान हरमनप्रीत ने 167 रन की जो शानदार साझेदारी निभाई वह बरसों तक याद रहेगी।

गेंदबाजी भारत की कमज़ोर कड़ी रही है। वह यहां भी साबित हो गया। रेणुका सिंह ठाकुर और बाएं हाथ की फिरकी गेंदबाज चारणी को छोड़ भारत की किसी भी गेंदबाज ने प्रति ओवर छह से कम रन नहीं दिए। क्रांति गौड़ की औसत तो लगभग दस रन (9.67) की है। राधा यादव ने नौ (8.25) और दीपिका शर्मा ने आठ (7.42) रन प्रति ओवर की दर से रन दिए।अंतिम के कुछ ओवर छोड़ कर भारतीय गेंदबाजों का कोई भी ओवर ऐसा नहीं था जिसमें ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने कम से कम एक चौका या छक्का न लगाया हो। और वे ऐसा इसलिए नहीं कर पा रहे थे कि उनके स्ट्रोक बहुत बढ़िया थे, बल्कि हमारे गेंदबाज हर ओवर में एक दो गेंदों इतनी कमज़ोर कर देते कि बाउंड्री लग ही जाती। एक समय जब लीचफील्ड और एलिस पेरी क्रीज़ पर थीं तो विशेषज्ञों को तो लगने लगा था कि स्कोर 400 के पार जा सकता है। क्रिकेट में एक कहावत है कि खराब गेंदबाजी के लिए लिए फील्ड नहीं लगाई जा सकती। कप्तान हरमनप्रीत की स्थिति कुछ ऐसी ही थी। फील्ड ऑफ साइड पर है तो गेंदबाजी लेग साइड पर हो रही है। और अगर फील्ड ऑन साइड पर है तो गेंदबाज ऑफ साइड में गेंद फेंक रहे हैं। हैरानी तो तब हुई जब दीप्ति शर्मा जैसी अनुभवी खिलाड़ी को ऐसा करते देखा। कुल मिला कर देखा जाए तो भारत ने 35-40 रन उन्हें तोहफे के रूप में दिए। इसके विपरीत ऑस्ट्रेलिया ने भारत को एक एक रन के लिए तरसाया।
जमीमा की तारीफ केवल उन 127 रनों के लिए नहीं की जानी चाहिए जो उसके बल्ले से बने, अपितु इस बात के लिए होना ज़रूरी है कि उस खिलाड़ी ने टीम को कभी हतोत्साहित नहीं होने दिया। खुद तीन नंबर पर आ कर उसने हर नए बल्लेबाज को हौसल दिया जैसे उनसे कह रही हो, “मैं हूं ना” आप बस डटे रहो। जमीमा के इस अंदाज़ और शतक की परछाई में कप्तान हरमनप्रीत कौर की पारी को भूल नहीं सकते। रन रेट को नियंत्रण में रखने में हरमन के 89 रनों की बड़ी भूमिका रही। उसने 10 चौके और दो छक्के लगा कर ऑस्ट्रेलिया पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर डाला। हालांकि जब हरमनप्रीत कौर आउट हुई तो भारत का स्कोर 226 था। लेकिन उस समय तक जमिमा की आँखें जम चुकी थीं। भारत की मंज़िल अभी 113 रन दूर थी, पर मजबूती की नींव पड़ चुकी थी। इसके बाद दीप्ति शर्मा (24), ऋचा घोष (26), और अंत में अमनजोत कौर (15 नाबाद) जमिमा के साथ मिल कर भारतीय कश्ती को साहिल पर ले आए। इस मैच में अमनजोत कौर की भी अहम भूमिका रही। एक समय जब राधा यादव, दीप्ति शर्मा और क्रांति गौड़ को धड़ाधड़ रन पड़ रहे थे तो अमनजोत कौर ने अपनी स्टीक गेंदबाजी से न केवल रनों पर कुछ रोक लगाई बल्कि लिचफील्ड (119) को बोल्ड कर पवेलियन की रह दिखाई। अमनजोत ने आठ ओवर में 6.38 की औसत से रन दिए। इसी तरह बल्लेबाजी में जब भारत को जीत के लिए अंतिम दो ओवर यानी 12 गेंदों में आठ रन बनाने थे तो अमनजोत स्ट्राइक पर थी। वैसे तो यह कोई बड़ी बात नहीं थी पर जिस तरह बांग्लादेश और श्री लंका के मैच में बांग्लादेश को अंतिम 12 गेंदों पर 12 रन बनाने थे और छह विकेट हाथ में थे पर वे छह बल्लेबाज एक भी रन जोड़े बिना आउट हो गए और श्री लंका मैच जीत गया। इसी शंका से ग्रस्त मेरे जैसे सभी क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहे थे कि वह किसी तरह से एक रन लेकर स्ट्राइक जमीमा को दे दे। पर अमनजोत तो कुछ और सोचे बैठी थी। उसने पहली ही गेंद को प्वाइंट दिशा में शानदार कट करके चार रन बटोर लिए। अगली गेंद पर वह दो रन ले गई। अब भारत की जीत मात्र दो रन दूर थी। तीसरी गेंद को उसने फिर ऑफ साइड में मार कर चौका हासिल किया और साथ ही भारत को फाइनल में पहुंचा दिया। जैसे ही अमनजोत ने विजयी रन हासिल किए, जमीमा ने दौड़ कर उसे गले से लगा लिया। उसकी आंखों से लगातार बह रहे आंसू उसकी खुशी बयान कर रहे थे। उधर ड्रेसिंग रूम से भाग कर आई भारतीय खिलाड़ी एक दूजे से लिपट रहे थे। कप्तान हरमनप्रीत अपने कोच के गले लग कर रो रही थी। खुशी के आंसुओं का सैलाब था। जमीमा की 'तपस्या' सफल हो चुकी थी और भारत फाइनल में प्रवेश कर चुका था। बहुत ही भावुक लम्हे थे। इतने भावुक लम्हें मैने शायद ही कभी देखे हों।
अब फाइनल में सामना दक्षिण अफ्रीका से है।भारत को अपनी गेंदबाजी संभालनी होगी।