Sunday, 24 May 2026
Breaking News
PUNJAB GOVT DECLARES GENERAL HOLIDAY ON 26 MAY ON ACCOUNT OF MUNICIPAL GENERAL ELECTIONS   CROSS-BORDER HEROIN NETWORK BUSTED; FOUR HELD WITH 28.12 KG CONTRABAND, RS 9.5 LAKH DRUG MONEY LAKE POINT CITY COUNCIL IN UTAH TO BEGIN DAY WITH HINDU PRAYERS IN HISTORIC FIRST ABOHAR MLA CONFIDENT OF RETAINING POWER IN MUNICIPAL CORPORATION VI-JOHN LAUNCHES SHAVE PRO TWIN BLADE RAZOR AT ₹20, EXPANDS PRESENCE IN AFFORDABLE GROOMING SEGMENT CBI CONDUCTS SEARCHES AT 7 LOCATIONS IN TWO BANK FRAUD CASES OF OVER RS. 119 CRORE DAV COLLEGIATE SR. SEC. SCHOOL CELEBRATES EXCELLENCE OF PLUS 2 STUDENTS HEROIN HAUL CONTINUES: CIA ARRESTS THREE WITH OVER 4 KG CONTRABAND CHANDIGARH DISTT. CRIME CELL NABS DRUG SUPPLIER YOUTH HEROIN AND ICE ISB AND MEITY CONVENE NATIONAL LEADERS AT GOVERNANCE SUMMIT 2026 TO CHART INDIA’S COURSE FOR INCLUSIVE AI
National Trending

रक्तरंजित दौर के बाद नॉर्थईस्ट में थमी पत्रकार हत्याएँ

नव ठाकुरीया

कभी अशांत क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले भारत के नॉर्थईस्ट में, जहाँ पिछले तीन दशकों में हमलावरों के हाथों 30 से अधिक संपादकों, रिपोर्टरों और संवाददाताओं की जान गई थी, वहाँ पिछले आठ वर्षों से पत्रकार हत्या का कोई मामला सामने नहीं आया है। वर्ष 2017 में मीडिया पेशेवरों की आखिरी सनसनीखेज हत्याओं के बाद, वर्ष 2025 को समाप्त हुए चार महीने से अधिक समय बीत चुके हैं और इस दौरान ऐसी कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना दर्ज नहीं हुई।

जहाँ देशभर में औसतन हर वर्ष पाँच से दस पत्रकार अपनी जान गंवाते हैं, वहीं नेपाल, भूटान, तिब्बत/चीन, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरा यह क्षेत्र इस सकारात्मक स्थिति को बनाए हुए है। एक अरब से अधिक आबादी वाले भारत में पिछले वर्ष छह पत्रकारों की हत्या दर्ज की गई। इनमें बस्तर (छत्तीसगढ़) से NDTV के स्ट्रिंगर मुकेश चंद्रकार, इमालिया सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) से दैनिक जागरण के राघवेंद्र वाजपेयी, डिगलीपुर (अंडमान द्वीप समूह) से Republic Andaman के सहदेव डे, गुरुग्राम (हरियाणा) से Fast News India के धर्मेंद्र सिंह चौहान, भुवनेश्वर (ओडिशा) से Times Odia के नरेश कुमार तथा जोशियारा (उत्तराखंड) से Delhi Uttarakhand Live के राजीव प्रताप सिंह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त देहरादून के फ्रीलांस पत्रकार पंकज मिश्रा की संदिग्ध हत्या का मामला भी सामने आया था।

इस वर्ष अब तक दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने हमलावरों के हाथों एक पत्रकार को खोया है। 28 अप्रैल 2026 को तेलुगू पत्रकार वी. जगनमोहन रेड्डी की हत्या कर दी गई। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के वेंकटगिरि कोटाइन इलाके में सुबह की सैर पर निकले जगनमोहन पर घातक हथियारों से लैस बदमाशों के एक समूह ने हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ‘आंध्र ज्योति’ अखबार से जुड़े 40 वर्षीय जगनमोहन की हत्या के बाद विभिन्न पत्रकार संगठनों ने तिरुपति प्रेस क्लब में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।

‘इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन’ (IJU) ने दावा किया कि यह हमला उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय चंदन तस्करों पर खबर प्रकाशित की थी। संगठन ने कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कठोर नीति बनाने की मांग भी की। जिनेवा स्थित वैश्विक मीडिया सुरक्षा एवं अधिकार संगठन ‘प्रेस एम्बलम कैंपेन’ (PEC) ने भी जगनमोहन के लिए न्याय की मांग उठाई। PEC के अध्यक्ष ब्लेज़ लेम्पेन ने संबंधित अधिकारियों से अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कानून के तहत कठोर सज़ा सुनिश्चित करने की अपील की। 1 जनवरी 2026 से दुनिया भर में मारे गए मीडिया कर्मियों में जगनमोहन 28वें पीड़ित बने। वह अपने पीछे पत्नी, दो बच्चों और अनेक शुभचिंतकों को छोड़ गए हैं।

इस निराशाजनक राष्ट्रीय परिदृश्य के विपरीत, नॉर्थईस्ट क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर तस्वीर प्रस्तुत करता है। लगभग छह करोड़ आबादी वाले इस क्षेत्र में आखिरी बार वर्ष 2017 में त्रिपुरा में दो पत्रकारों—शांतनु भौमिक और सुदीप दत्ता भौमिक—की हत्या हुई थी। इससे पहले वर्ष 2013 में भी बांग्लादेश सीमा से लगे इसी राज्य में तीन मीडियाकर्मियों—सुजीत भट्टाचार्य, रंजीत चौधरी और बलराम घोष—की हत्या की गई थी। इन तीनों की हत्या अगरतला स्थित एक बंगाली समाचार पत्र के कार्यालय के भीतर हुई थी।
असम और मणिपुर में इससे पहले पत्रकार हत्याओं के मामले तब सामने आए थे, जब रायहानुल नयुम और द्विजमणि नानाओ सिंह अपराधियों के निशाने पर आए। अकेले असम में वर्ष 1987 से अब तक 25 से अधिक मीडियाकर्मियों की हत्या हो चुकी है।
हालाँकि, Covid-19 महामारी ने इस क्षेत्र के मीडिया जगत को गहरी क्षति पहुँचाई। नॉर्थईस्ट में 20 से अधिक पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई, जबकि पूरे देश में यह आँकड़ा लगभग 300 तक पहुँचा। पूर्वोत्तर में सबसे अधिक मौतें असम में दर्ज की गईं, जबकि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम में किसी पत्रकार की कोरोना संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई।

पहला मामला गुवाहाटी से सामने आया, जब 3 जुलाई 2020 को ‘असोमिया खोबोर’ के प्रिंटर एवं प्रकाशक रंटू दास को कोरोना संबंधी जटिलताओं के कारण मृत घोषित किया गया। इसके बाद उदलगुरी के ग्रामीण पत्रकार धनेश्वर राभा, सिलचर के पत्रकार असीम दत्ता तथा रेडियो समाचार एंकर गुलाब सैकिया की भी गुवाहाटी में इलाज के दौरान कोरोना से संबंधित जटिलताओं के कारण मृत्यु हो गई।

असम ने कोरोना महामारी के दौरान दो प्रतिष्ठित मीडिया हस्तियों—डॉ. लक्ष्मी नंदन बोरा और होमेन बोरगोहेन—को भी खो दिया। युवा पत्रकार आयुष्मान दत्ता, मोरान के जादू चुटिया, चायगांव के शिवचरण कलिता, बोकाजान के रुबुल दिहिंगिया तथा नगांव के हुमेश्वर हीरा भी कोरोना पीड़ितों की सूची में शामिल रहे। नई दिल्ली में रह रहीं असमिया पत्रकार नीलाक्षी भट्टाचार्य (55) और उनके पति कल्याण बरुआ की 24 घंटे के भीतर कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई। दिल्ली में ही पत्रकार अनिर्बान बोरा ने भी वायरस से संघर्ष करते हुए दम तोड़ दिया।

त्रिपुरा में जितेंद्र देबबर्मा, तन्मय चक्रवर्ती, गौतम दास और माणिक लाल दास की मृत्यु के साथ कोरोना से मीडियाकर्मियों की मौत के मामले सामने आए। वहीं मणिपुर ने सगोलसेम हेमंत, साइखोम शांति कुमार, थोतशांग शैजा और लैरेनजम बिजेन सिंह को खो दिया, जबकि मेघालय में सिंडोर सिंह सिएम की मृत्यु कोरोना के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई।

हालाँकि नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारों ने कोरोना पीड़ित पत्रकारों के परिवारों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी, लेकिन नॉर्थईस्ट के किसी भी राज्य ने ऐसी कोई प्रभावी योजना लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया। ओडिशा सरकार ने कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले प्रत्येक कार्यरत पत्रकार के परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब सरकारों ने 10-10 लाख रुपये प्रति परिवार मुआवज़ा दिया। आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने पाँच-पाँच लाख रुपये की सहायता दी, जबकि बिहार ने चार लाख और तेलंगाना ने दो लाख रुपये का मुआवज़ा घोषित किया।

असम सरकार ने शुरुआत में यह घोषणा की थी कि कोरोना के कारण जान गंवाने वाले मीडियाकर्मियों को अन्य फ्रंटलाइन वॉरियर्स की तरह 50 लाख रुपये की जीवन बीमा योजना में शामिल किया जाएगा। लेकिन बाद में प्रभावित पत्रकार परिवारों को सहायता प्रदान करने के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह खामोश हो गई। नॉर्थईस्ट के अन्य राज्यों ने भी लगभग यही रुख अपनाया, जैसा कि इस क्षेत्र में अक्सर देखने को मिलता है।
(लेखक पूर्वोत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार)