Friday, 24 July 2026
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वरिष्ठ नागरिक ने गमाडा के हाउसिंग प्रोजेक्ट में अनियमितताओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की

फेस2न्यूज चंडीगढ़

मोहाली के सेक्टर-88 स्थित पुरब प्रीमियम अपार्टमेंट्स की आवंटी एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक गुरविंदर कौर, जो ‘पुरब प्रीमियम अपार्टमेंट्स जन-हित बचाओ कमेटी’ की पदाधिकारी भी हैं, ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, भारत के मुख्य न्यायाधीश, पंजाब के राज्यपाल तथा राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर गमाडा के हाउसिंग प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कानूनी उल्लंघनों का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।

पटियाला के फेज-2, अर्बन एस्टेट निवासी गुरविंदर कौर ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि गमाडा ने होमबायर्स के साथ धोखाधड़ी की है, परियोजना में वायदे के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाईं और कई वैधानिक और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कथित रूप से पूर्व गमाडा के मुख्य प्रशासक सरवजीत सिंह (आईएएस 1992 बैच) और पूर्व गमाडा एस्टेट ऑफिसर (हाउसिंग) महेश बंसल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मांग रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि फ्लैटों का कब्जा दिए जाने के बावजूद परियोजना से संबंधित कई आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां और वायदा की गई सुविधाएं आज तक पूरी नहीं की गई हैं। गुरविंदर कौर ने आरोप लगाया है कि आवंटन ब्रोशर और अनुबंध का हिस्सा रही 690 वर्ग फीट की बेसमेंट कार पार्किंग अब तक नहीं सौंपी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि परियोजना के पास फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं है, जिससे निवासियों की सुरक्षा खतरे में है और यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

ज्ञापन के अनुसार, परियोजना के लिए अब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया गया, जबकि फ्लैटों का कब्जा दे दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कब्जा सुप्रीम कोर्ट के धर्मेंद्र शर्मा बनाम आगरा विकास प्राधिकरण (सिविल अपील संख्या 6344/2024) में 6 सितंबर 2024 को दिए गए निर्णय के विपरीत दिया गया।

गुरविंदर कौर ने आरोप लगाया है कि परियोजना में निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। इसमें निर्धारित ऊंचाई से कम स्टेनलेस स्टील रेलिंग, प्रीमियम विट्रिफाइड टाइल्स के स्थान पर सिरेमिक टाइल्स, लगातार पानी का रिसाव तथा अन्य संरचनात्मक खामियां शामिल हैं, जिससे संविधान के अनुच्छेद-300A के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। यह भी आरोप लगाया गया है कि परियोजना के ठेकेदार सिंप्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड वर्ष 2020 में परियोजना से हट गए, लेकिन कथित बड़े वित्तीय घोटाले के बावजूद उनके निदेशकों या परियोजना अधिकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि परियोजना के एक ब्लॉक में बिना फायर एनओसी के मेडिकल कॉलेज का छात्रावास संचालित किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। एक अन्य आरोप में कहा गया है कि परियोजना का मूल लेआउट बदलकर एक निजी बिल्डर को लाभ पहुंचाया गया, जिससे फ्लैट खरीदारों को आर्थिक नुकसान हुआ। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि ब्रोशर में वायदा किया गया 1.4 मील लंबा वॉकिंग ट्रैक, जो लगभग 4.5 से 5 एकड़ क्षेत्र में विकसित होना था, आज तक नहीं बनाया गया। साथ ही आरोप लगाया गया है कि परियोजना की कुछ कीमती भूमि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को अधिकांश फ्लैट खरीदारों की सहमति के बिना आवंटित कर दी गई।

गुरविंदर कौर ने परियोजना के RERA पंजीकरण, उसकी अवधि समाप्त होने तथा एस्क्रो खातों के अनुपालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने ज्ञापन में उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल तथा फोरेंसिक ऑडिट समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि गमाडा को पहले जारी किए गए कब्जा पत्र वापस लेने और सभी वैधानिक स्वीकृतियां, फायर एनओसी, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, रेरा अनुपालन तथा ब्रोशर में वायदा की गई सभी सुविधाएं पूरी होने के बाद ही नया कब्जा पत्र जारी करने के निर्देश दिए जाएं।

उधर, माननीय गवर्नर के निर्देश पर पंजाब के हाउसिंग और अर्बन डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से गुरविंदर कौर को मिले लिखित उत्तर के अनुसार, आगे की कार्रवाई के लिए गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के समक्ष यह मामला उठाया गया है।