Sunday, 25 October 2026
Breaking News
सीनियर्स म्यूजिक पैशन ग्रुप की 5वीं वर्षगांठ पर सजी स्वर्णिम गीतों की यादगार संगीतमय शाम मलोया में पहली बार 1100 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा, भागवत कथा का हुआ आगाज दलित युवक की हत्या : सरकार की कार्यप्रणाली पर भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल हिमाचल महासभा ने सागर सहोड़ को न्यूजीलैंड के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पीएचडी हेतु चयन पर दी बधाई पंचकूला में दिसंबर में लगेगा भव्य स्वदेशी महोत्सव 300 से अधिक स्टॉलों पर दिखेगी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत चंडीगढ़ में भगवान वाल्मीकि जी की भव्य शोभायात्रा निकली, सैकड़ों महिलाओं सहित श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा ओआरसी सैनिक अकादमी के 7 विद्यार्थियों का RIMC जून 2026 परीक्षा में चयन, संस्थान में खुशी की लहर अजय कुमार हत्याकांड: विधानसभा के बाहर लगातार दूसरे दिन परिवार के साथ धरने में शामिल हुए सुनील जाखड़ अजय हत्याकांड: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को निष्पक्ष जांच व कार्रवाई के निर्देश पी एम राहत योजना - सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए एक वरदान।
हिमाचल Trending

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की भेंट, अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह

उधार सीमा 3 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का किया अनुरोधएसएएससीआई के तहत भुगतानों को एसएनए-स्पर्श से छूट तथा बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के तहत सहायता दोगुनी करने का आग्रह

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की और उन्हें हिमाचल प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति तथा राज्य के सामने आ रही वित्तीय चुनौतियों से अवगत करवाया। उन्होंने राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद हो जाने के कारण हिमाचल प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय अंतर का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजस्व घाटा अनुदान में लगातार कमी किए जाने से राज्य के वित्त पर दबाव और बढ़ा है।

हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, प्राकृतिक आपदाओं की अधिक संवेदनशीलता तथा बुनियादी ढांचे के निर्माण और रख-रखाव की अधिक लागत के कारण सार्वजनिक सेवाओं का संचालन एवं प्रबंधन तुलनात्मक रूप से अधिक महंगा है।
मुख्यमंत्री कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार विभिन्न वित्तीय सुधारों और राजस्व बढ़ाने के उपायों के माध्यम से अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों तथा हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत आपूर्ति एवं विक्रेता भुगतान को एसएनए-स्पर्श मॉडल से छूट प्रदान करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के आवंटन में वृद्धि करने तथा राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अधिक बुनियादी ढांचा लागत और विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस घटक के तहत सहायता को दोगुना करने पर विचार करने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य की उधार लेने की सीमा को वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश से राज्य को अपनी प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के साथ-साथ आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों का आकलन राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाए तथा राज्य के व्यापक हित में केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता और आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की जाएं।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को राज्य सरकार द्वारा अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों से भी अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

 हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना, ग्रामीण परिवारों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उठाई गई मांगों पर राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने राज्य के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य की जायज वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता प  विचार किया जाएगा, जिससे राज्य को अपनी विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने तथा अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

0 Comments