‘84 कोस की जय-जयकार’ से गूंजा पंडाल, हजारों श्रद्धालुओं ने कथा में लिया भाग; यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव हिरीआड़का राजेश प्रसाद और भाजपा नेता संजय टंडन भी पहुंचे, बी प्राक बोले—कभी नहीं सोचा था कि जीवन में श्रीमद्भागवत कथा करवाने का सौभाग्य मिलेगा, महाराज जी के आशीर्वाद से यह संभव हुआ
चंडीगढ़: सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में शुक्रवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं ‘गीता वृंदावन प्रकट उत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 16 से 22 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक उत्सव के पहले दिन श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘84 कोस की जय-जयकार’ और राधा-कृष्ण के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। चंडीगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे।
कार्यक्रम में यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव श्री हिरीआड़का राजेश प्रसाद, आईएएस और भाजपा नेता संजय टंडन भी पहुंचे। आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पंडाल भक्तों से खचाखच भरा नजर आया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने कथा में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया।
प्रख्यात कथावाचक इंद्रेश महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, उनके जीवन प्रसंगों और आध्यात्मिक शिक्षाओं का वर्णन किया। उनके मधुर भजनों और प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और ‘84 कोस की जय-जयकार’ के साथ शुरू हुए उत्सव ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
बी प्राक बोले—महाराज जी के आशीर्वाद से संभव हुआ आयोजन
प्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक बी प्राक ने इस अवसर पर कहा, “मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि हमें श्रीमद्भागवत कथा करवाने का सौभाग्य मिलेगा, लेकिन महाराज जी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से यह संभव हो पाया। हमारे लिए यह बहुत ही सौभाग्य की बात है कि हमें इस पावन कथा का आयोजन करने का अवसर मिला।”
उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाना केवल उनके अकेले के प्रयासों से संभव नहीं था, बल्कि उनके साथियों के सहयोग और समर्पण की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। बी प्राक ने कहा, “मेरे सभी साथियों ने इस आयोजन को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया है। मुनीश बजाज मेरे बड़े भाई और मेरे अच्छे दोस्त की तरह हैं। उनका भी इस आयोजन में बहुत बड़ा सहयोग है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ही हम इस पावन आयोजन को इतने भव्य रूप में कर पा रहे हैं। मैं अपने सभी सहयोगियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।”
बी प्राक अपने स्वर्गीय दादाजी की स्मृतियों और उनसे मिली प्रेरणा को जीवंत रखने के उद्देश्य से पिछले तीन वर्षों से इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं गीता वृंदावन प्रकट उत्सव के आयोजन में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
मुनीश बजाज ने बताया धार्मिक आयोजन का उद्देश्य
इस अवसर पर मुनीश बजाज भी उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा और गीता वृंदावन प्रकट उत्सव का उद्देश्य लोगों को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, उनकी लीलाओं और सनातन संस्कृति से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मकता, आध्यात्मिकता और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से इस सात दिवसीय आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकें।
कथा में पहुंचे दिव्यांग बच्चे, श्रद्धा और भक्ति का दिखा अनूठा संगम
उत्सव के पहले दिन श्रवण एवं वाणी संबंधी दिव्यांगता वाले बच्चे भी कथा सुनने पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। पूरे पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
22 अक्टूबर तक चलेगा धार्मिक उत्सव
आयोजकों के अनुसार, 22 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं गीता वृंदावन प्रकट उत्सव में श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, श्रीमद्भागवत के प्रसंगों और आध्यात्मिक संदेशों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। आयोजन के आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
यह उत्सव चंडीगढ़ में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को सशक्त बनाने के साथ श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।
इंद्रेश महाराज ने दिया एकनिष्ठ भक्ति और समर्पण का संदेश
उत्सव की व्यासपीठ से प्रख्यात कथावाचक पूज्य इंद्रेश जी महाराज ने जीवन, भक्ति और समर्पण का गहरा आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने एकाग्रता और एकनिष्ठ भक्ति का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास ही सच्ची भक्ति का आधार है।
महाराज श्री ने भावपूर्ण ढंग से समझाया कि यदि जीवन में ठाकुर जी सर्वोपरि हैं, तो हृदय में उनका स्थान भी सर्वोच्च होना चाहिए। सांसारिक आकर्षण और भौतिक सुख मनुष्य को अपनी ओर खींच सकते हैं, लेकिन सच्ची भक्ति तभी फलीभूत होती है, जब भक्त का अपने आराध्य के प्रति प्रेम अनन्य और निष्कपट हो। उन्होंने संदेश दिया कि ठाकुर जी के प्रति एकनिष्ठ प्रेम, अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण से ही भक्त सच्चे आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर सकता है।