Tuesday, 14 April 2026
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इलाज को लिए अस्पताल में घंटों इंतजार, डाक्टर ड्यूटी से रहते हैं गैरहाजिर

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जीरकपुर, कृतिका:  (SUBHEAD)
पंजाब सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने का दावा कर रही है लेकिन डेराबस्सी सिविल अस्पताल की बिगड़ी व्यवस्थाएं सुधर नहीं रही है। यहां अव्यवस्थाओं के चलते हॉस्पिटल ही खुद बीमार नजर आता है। यहां इलाज के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। डाक्टर्स रेगुलर अपनी ड्यूटी से गैर हाजिर रहने के बाद रजिस्टर पर बैक डेट में हाजिरी लगाकर अपनी ड्यूटी दिखा रहे हैं। ताकि उनका वेतन बराबर आता रहे। ऐसा काम लंबे अरसे से चलता आ रहा है। नाम ना छापने की शर्त अस्पताल के ही एक स्टाफ ने बताया कि यह सब एसएमओ की जानकारी में है, लेकिन कार्यवाही कोई नहीं होती। हास्पिटल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों अनुसार सुबह सात बजे ही, लंबी लाइनें लग जाती है, लेकिन घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल के चहेते डाक्टर भी सेटिंग कर गैर हाजिर रहने उपरांत बैक डेट में ड्यूटी पूरी कर लेते हैं।
जानकारी के लिए नहीं लगाए जाते रोस्टर:
अस्पताल में डेराबस्सी के रहने वाले श्याम सुंदर ने बताया कि वह अपने साथी राजदेव प्रसाद को चैक करवाने के लिए अस्पताल आए थे। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने जानना चाहा कि कब किस डाक्टर की ड्यूटी है, यह बताने वाला रोस्टर भी नहीं मिला। इसी का फायदा उठाते हुए अस्पताल से डाक्टर गायब रहते है। जबकि ओपीडी व इमरजेंसी ड्यूटी को लेकर सप्ताहभर का रोस्टर एडवांस तैयार करने का प्रविधान है।
सरकारी अस्पताल के डाक्टर बाहर भी कर रहे हैं प्रैक्टिस:
हैरानी की बात यह है कि सिविल अस्पताल के डाक्टर गैर हाजिर तो रहते ही हैं साथ बाहर प्राइवेट अस्पताल में प्रेक्टिस भी करते हैं। फील्ड आफिसर को मिलाकर कुल 24 डाक्टर है। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि एक सीनियर डाक्टर प्राइवेट अस्पताल में भी प्रेक्टिस करती है। जबकि सभी डाक्टर को वेतन से अलग 25 फीसदी नान प्रेक्टिस अनाउंस (एनपीए) भी मिलता है। बावजूद इसके बाहर काम किया जा रहा है। लालडू से तीन डाक्टर व अंसाला से चार डाक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर बुलाए जाते हैं। तीन डाक्टर प्राइमरी हेल्थ सेंटर से भी बुलाए जाते हैं।
ड्यूटी आठ से दो बजे तक, नौ बजे के बाद पहुंचते हैं डाक्टर:
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल मरीजों के साथ-साथ बुखार, लू लगने के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जिसकी वजह से डेराबस्सी सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन सुबह सात बजे से ही मरीजों का तांता लग जाता है। लोग कतार में अपना नंबर लगाने के लिए खड़े हो जाते हैं। इसके बावजूद डाक्टर ओपीडी में समय पर नहीं आ रहे हैं, तो कुछ डाक्टर तो बिना सूचना के ही अनुपस्थित रहते हैं, जिससे मरीज परेशान होते हैं।
कोई सेटिंग से काम नहीं होता। ऐसा नहीं है कि कोई बैक डेट में आकर हाजरी लगा रहा है। सभी डाक्टर समय पर आकर अपनी ड्यूटी देते हैं। जबकि मैं तो सुबह आठ बजे ही अस्पताल पहुंच जाती हूं। फिर भी मैं इसे चेक करवा लूंगी। रही बात डाक्टर्स के बाहर प्रैक्टिस करने की तो इसके लिए सभी को चेतावनी दी गई है कोई बाहर प्रेक्टिस नहीं कर सकता यह नियमों के खिलाफ है। इसे भी चेक करवाया जाएगा।
— संगीता जैन, एसएमओ डेराबस्सी