Tuesday, 06 October 2026
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सारे रिश्ते बदल भी जाएं, पर जीवन भर एक जैसी रहती है मां…

चण्डीगढ़ : संवाद साहित्य मंच की ओर से मदर्स डे के अवसर पर सेक्टर-40 में विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी केके शारदा ने की, जबकि कवयित्री विमला गुगलानी ने कवियों-कवयित्रियों का परिचय देते हुए कार्यक्रम का सफल संचालन किया।

कविवर प्रेम विज ने मां पर कविता पढ़ते हुए कहा- हर रिश्ते/ बदल भी जाएं/ पर जीवन भर/ एक जैसी/ रहती है/ मां। साहित्यकार डॉक्टर विनोद कुमार शर्मा ने अपनी रचना मां का कर्ज़ प्रस्तुत करते हुए कहा कि वह बालपन आंखों के सामने घूमता,मां के इर्द-गिर्द अठखेलियां करता झूमता, डांटती जब माँ हो जाता नाराज। विमला गुगलानी ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा- सबका ध्यान रखकर प्रभु निहाल हो गया, पर माँ को बनाकर तो वह खुद बेरोजगार हो गया।

डॉ. अनिता अग्रवाल ने कहा कि- माँ है तो बेटियों का घर आंगन करता इंतजार, माँ है तो मन में बाते कई हजार। डॉ संगीता शर्मा कुंद्रा गीत ने कहा कि माँ भी तो हम जैसी ही होगी, मेरी पहली शिक्षक। डॉ प्रज्ञा शारदा ने कहा कि खुद एम ए तक पढ़ी है, पर आत्मविश्वास की कमी है। गोष्ठी में राज विज, श्वेता गुगलानी, डॉ. विनीति और डॉ. नाज़मी ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर मां के प्रति भावनाओं को शब्दों में पिरोया। कार्यक्रम का वातावरण भावनाओं, संवेदनाओं और साहित्यिक रस से सराबोर रहा।

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