Thursday, 24 September 2026
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लिव—इन—रिलेशन कानून :आज्ञा देने वाले एक बार फिर सोचें: लक्ष्मीकांता चावला

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(MOREPIC1)  अमृतसर, फेस2न्यूज:

दिल्ली का श्रद्धा आफताब केस लिव इन रिलेशन का काला परिणाम है जो पूरा देश देख रहा है। इससे पहले भी बहुत से कत्ल, लड़ाई—झगड़े, आत्महताएं इस लिव इन रिलेशन के कारण हुईं, क्योंकि यह सामाजिक संबंधों की विकृति है, स्वभाविक नहीं।

पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि जिस संस्था ने लिव इन रिलेशन को कानूनी बनाया वे जरा एक बार पूरे देश में खोज करवाएं कि इस रिश्ते में रहने वाले कितने लोगों के घर उजड़े, कितने तलाक हुए, कितनी आत्महत्याएं, बलात्कार के कितने केस दर्ज हुए और कितने सहजीवन में रहने वाले जोड़े गलत रास्ते पर चले और कितनी लड़कियां सारी सामाजिक और पारिवारिक मर्यादा छोड़कर आफताब जैसों के पीछे चल पड़ीं?

देश के जागरूक बुद्धिजीवियों, कानूनविदों, सरकार के मालिकों, सांसदों, विधायकों से मेरी एक खुली चुनौती है कि जनता के सामने आएं। मीडिया पर वैसे तो बहुत कुछ बोलते हैं, यह भी बताएं कि सहजीवन के समाज को क्या लाभ मिले। इसके साथ ही देह व्यापार भी धंधा है तथा अविवाहित लड़कियां भी गर्भपात करवा सकती हैं, ऐसे मान्यता प्राप्त कानूनों से भारतीय समाज का क्या भला होने वाला है या क्या भला हो रहा है।

याद रखें, केवल अपराध करना ही अपराध नहीं, सामाजिक मान्यताओं के विरुद्ध आपराधिक छूट देना भी बहुत बड़ा अपराध है। भारत और भारत के बेटे बेटियों को बचाने के लिए यह कानून एकदम वापस लिए जाएं।