Wednesday, 03 June 2026
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मुर्दा बोले कफ़न फाड़े

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

एक एंकर है। टीवी पर कुछ न कुछ बोलना होता तो बोलती है। अब एक डिप्लोमा करके बेचारी को नौकरी मिली है। नहीं तो बेरोजगारों या फिर हमारे एक आदिल की जुबान में बोलें तो कॉकरोचों की कतार में खड़ी होती। अब उसकी मजबूरी है कि जो भी टेलीप्रॉन्पटर पर लिखा आ जाए वह तो उसे पढ़ना ही है। इत्तेफाक यह है कि उसके आका तो बेचारे स्कूल गए ही नहीं। वे भला क्या जाने कैसे पढ़ा और पढ़ाया जाता है। कभी स्कूल के आगे पीछे से जाते हुए कुछ अलफ़ाज़ कान में पड़ गए होंगे। इनके लिए वही काफी हैं। अब ऐसे विद्वान नेताओं को डिप्लोमा होल्डर एक ” विदुषी” मिल गई।

इन्हें लगा कि इस महिला से अधिक पढ़ा लिखा तो कोई होगा ही नहीं। और यह महिला अगर 1987-88 के ज़माने में होती तो कोई उसे स्ट्रिंगर भी नहीं रखता।

पत्रकारिता के नाम पर तलवे चाटना इनकी फितरत है। एक और महिला ऐंकर हैं उसने तो विपक्ष को धमकी दे डाली कि विपक्ष जितनी आलोचना सरकार की करेगा वो उतनी सरकार की तारीफ़ करेंगी। अब क्या पत्रकार भांड मिरासी वाला काम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे?

खैर, जो भी हो ऐसे अजूबों को अगर आप गम्भीरता से न लें तो ऐसे लोग मनोरंजन का बड़ा साधन हैं। जिस तरह नाटकों में किसी विदूषक की भूमिका वही भूमिका के लोग निभाते हैं। और अगर हम इन्हें पूरी तरह से नाकार दें तो ये लोग मदारी के सिवा और कुछ भी नहीं हैं। इन लोगों के पास झूठे आंकड़ों के अलावा और कुछ नहीं होता। तो इन्हें चीख चीख कर बोलने दी जिये पर उनकी किसी बात पर ध्यान मत दें। बजुर्गों ने सही कहा है कि ” मुर्दा बोले कफ़न फाड़े “।