Wednesday, 17 June 2026
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अब सिविल अस्पताल पंचकूला में हड़कंप, विभागाध्यक्ष डॉक्टर पर लगे मानसिक प्रताड़ना के आरोप

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कर्मियों का आरोप –डॉक्टर का तानाशाही रवैया अस्पताल के माहौल को कर रहा है प्रभावित, सुशासन के दावों पर उठे सवाल

(MOREPIC1)  फेस2न्यूज /पंचकूला

हरियाणा के पंचकूला स्थित सिविल अस्पताल, सेक्टर-6 से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एमएलसी विभाग के प्रभारी डॉक्टर राजेन्द्र सैनी पर अस्पताल कर्मियों ने मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और अपमानजनक आचरण के गंभीर आरोप लगाए हैं।

कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से अस्पताल प्रशासन और विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसकी प्रतियां स्वास्थ मंत्री हरियाणा ,डीजी हेल्थ पंचकूला,सिविल सर्जन पंचकूला, एसीएस हेल्थ हरियाणा, उपायुक्त पंचकूला और डीसीपी पंचकूला को भी भेजी गई हैं।

कर्मियों द्वारा दर्ज शिकायत में कहा गया है कि डॉ. सैनी द्वारा विभागीय कर्मचारियों पर तरह तरह के झूठे आरोप लगाने, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने और अनावश्यक दबाव बनाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। कर्मियों के अनुसार वे 10 से 15 वर्षों से ईमानदारी से सेवा दे रहे हैं, कभी उनका किसी अधिकारी से विवाद नहीं हुआ। लेकिन आरोपी प्रभारी डॉक्टर के रवैये ने कार्यस्थल का माहौल तनावपूर्ण और असहनीय बना दिया है।

विभाग के 30 से अधिक कर्मियों के हस्ताक्षर युक्त शिकायत पत्र पर में आरोपी विभागाध्यक्ष की कार्य प्रणाली पर गम्भीर सवालिया निशान खड़े हो गए है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ शिकायत करने वाले कर्मियों का यह कदम हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में सिस्टम की गूंजती चेतावनी बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने ही अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच करवाती है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबकर रह जाएगा। 

इस संबंध में डॉक्टर राजेन्द्र सैणी से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाईल नंबर …..49887 पर बात करने की कोशिश की गई, परंतु उन्होंने फोन नहीं उठाया.

“मुख्यमंत्री का नाम लेकर डराने का आरोप”

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि डॉ. सैनी अपने प्रभाव और राजनीतिक निकटता के दावे करता रहता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम लेकर स्वयं को सीएम का करीबी बताते हैं और इसी बात का डर दिखाकर स्टाफ को चुप रहने के लिए बाध्य करते हैं।

सरकार के ‘सुशासन’ मॉडल पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार सरकारी कर्मचारियों को तनावमुक्त और पारदर्शी कार्यसंस्कृति देने के दावे करते रहे हैं। मगर पंचकूला के सरकारी अस्पताल से आई शिकायत सरकार के उन दावों पर सीधा सवाल खड़ा करती है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो “यह सुशासन नहीं, दमन शासन” कहलाएगा।
 
सामाजिक समीकरण पर न्याय भारी या हल्का?”

मामले का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी डॉक्टर और मुख्यमंत्री दोनों ही सैनी समाज से ताल्लुक रखते हैं। अब यह देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस शिकायत की जांच को निष्पक्ष रखता है या फिर राजनीतिक और सामाजिक समीकरण इस पर हावी हो जाते हैं।

“बढ़ते असंतोष में पीड़ित कर्मी करने लगे हैं तबादले की मांग”

सूत्रों के अनुसार, विभाग में कर्मचारियों के बीच असंतोष और भय का माहौल है। कई कर्मी अब अपने ट्रांसफर की मांग करने की तैयारी में हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन फिलहाल मामले को दबाने की कोशिश में जुटा बताया जा रहा है।

“डॉक्टर सैनी की ड्यूटी पर कोताही बरतने के भी लगे आरोप! “

कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टर सैनी खुद पोस्टमार्टम करने की बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों मे दबाव बनाकर उनसे पोस्टमार्टम करवाते हैं।