Wednesday, 28 October 2026
Breaking News
पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में खादी प्रदर्शनी शुरू देवताओं के नजराने में 5 प्रतिशत, बजंतरियों के मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी भारत-पाक सीमा पर मनाई शरद पूर्णिमा और भगवान वाल्मीकि जी की जयंती, बीएसएफ जवानों व रिट्रीट के दर्शकों को बांटा बर्फी का प्रसाद संत जगदीश मुनि को कृपा प्रसाद भेंट किया मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 की छठी सांस्कृतिक संध्या की अध्यक्षता की फिल्म ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ का प्रीमियर शो 31 अक्टूबर को बाबा रामदेव मंदिर में शरद पूर्णिमा और मीराबाई जयंती मनाई आईटीबीपी के पूर्व सैनिक फोर्स की अनदेखी से खफा आबूरोड में जल्द ही बनेगी एयर स्ट्रिप: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ‘गरिमा सीज़न 8 करवाचौथ: द रॉयल अफेयर’ का भव्य आयोजन
चंडीगढ़ Trending

स्वतंत्रता मुफ्त नहीं मिलती: अधिकारों और कर्तव्यों का दोहरा वादा

शालू

79 वर्ष पहले, भारत ने औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को तोड़ा था। यह एक ऐतिहासिक जीत थी, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के पसीने, खून और अपार बलिदानों से बनी थी। उन्होंने हमें आजादी दिलाई, लेकिन इतिहास हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कभी मुफ्त नहीं मिलती। यह एक अनमोल विरासत है जिसके लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता होती है और इसका भविष्य केवल जिम्मेदार नागरिकों के हाथों में ही सुरक्षित है। जैसा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रसिद्ध रूप से कहा था, “आजादी दी नहीं जाती, ली जाती है,” जो हमें हमारी संप्रभुता के लिए चुकाई गई भारी कीमत की याद दिलाता है।हमारा भारतीय संविधान इस संतुलन को खूबसूरती से दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि हमारे प्यारे मौलिक अधिकार बिना किसी आधार के अस्तित्व में नहीं हैं; वे हमारे मौलिक कर्तव्यों से बंधे हुए हैं।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने समझदारी से कहा था, “हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं।” यह साझा पहचान सामूहिक प्रयास की मांग करती है। सच्ची देशभक्ति हमारे वर्तमान में सक्रिय रूप से योगदान देने में है। हम अपने दैनिक विकल्पों के माध्यम से एक महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं। यह इस बात से झलकता है कि हम अपने परिवेश को कितना स्वच्छ रखते हैं, दूसरों को क्या नैतिक मूल्य देते हैं, और एक-दूसरे की कितनी मदद करते हैं।

महात्मा गांधी ने इस जमीनी जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा था, “भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम वर्तमान में क्या करते हैं।” आइए हम अपने कर्तव्यों को पूरा करने और उस मजबूत, स्वच्छ और सामंजस्यपूर्ण भारत का निर्माण करने का संकल्प लें, जिसकी कल्पना हमारे नायकों ने की थी।  (लेखिका  एडवोकेट हैं)

0 Comments