Thursday, 04 June 2026
Breaking News
पासपोर्ट कार्यालय के कर्मचारियों ने सेवा केंद्र में लगाईं मीठे पानी की छबील पत्रकार नव ठाकुरीया को देवर्षि नारद जयंती सम्मान मुर्दा बोले कफ़न फाड़े अहिंसा शिक्षा रत्न अवॉर्ड 2026 में ट्राइसिटी के लगभग 130 मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान बशीर बद्र की ग़ज़लों की हिंदी में पहली किताब अबोहर में हुई थी प्रकाशित स्वर सप्तक कल्चरल सोसाइटी ने आयोजित की रवींद्र-नज़रूल संध्या कुरुक्षेत्र क्रिकेट अकादमी, हरियाणा ने पहली 'श्री माता मनसा देवी ट्रॉफी' अंडर-14 संयुक्त (लड़के/लड़कियां) क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीता अलविदा बशीर बद्र उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावनाः मुख्यमंत्री श्री अमृतेश्वर महादेव मंदिर स्थापना दिवस की धूम : गायक बी प्राक की भजन संध्या में उमड़ा जनसैलाब
हिमाचल Trending

पांगी में 4 गांव के लोगों ने रथयात्रा के साथ पुर्थी में मनाया बाहरालू जातर मेला

Read in:Hindi

चंबा (पांगी):

जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के 12वें दिन चार प्रज्जामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया । यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। जिसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते है। कड़ाके की ठंड के बीच लोगों के उत्साह कम नहीं हुआ। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया।

चारों प्रजामंडल के लोग 12 दिन के बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर इस मेले का आयोजन करते है। लोगों की मान्यता है कि इन चार गांव के लोग 12 दिनों तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते है। और 12 दिनों बात बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलकर जुकारू पर्व के नाम पर बाहरालू मेले का आयोजन करते है। इस अवसर पर एक दूसरे के गले लगकर खुशी मनाते है।

(SUBHEAD)इस मेले के दिन रेई और शौर से रथ यात्रा निकाली गई। जोकि पुर्थी गांव में एकत्रित होती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। सोमवार को तड़के 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी की सजावट करने में जुट जाते है और सुबह 9:00 बजे कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार करते है। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानो राजा की पूजा की जाती है।

मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है।