मनमोहन सिंह ‘दानिश’
जी आपने बिल्कुल सही सुना। एक सड़क जिसका कोई बेली वारिस नहीं। कारण यह है कि वह सड़क जनता के अनुरोध पर बनाई गई थी। बेचारी जनता क्या जाने कि उसके अनुरोध पर हुए काम को सरकार का अहसान मान लिया जाता है। मतलब यह कि “कल्याणकारी राज्य” यानी वेलफेयर स्टेट का कोई वजूद नहीं। इसी सड़क के कारण सरकार की लगभग 260 करोड़ रुपये कि पेय जल योजना अधर में लटकी है। कुछ लोगों को इस पेय जल योजना के तहत बिछने वाली पाइप से खतरा है। कम से कम 12- 15 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन में से दो तीन किलोमीटर को छोड़ कर पाइप लाइन बिछ चुकी है। लोगों का कई करोड़ रुपया उस पर खर्चा जा चुका है लेकिन वो पेय जल योजना जो गिरी नदी से बननी शुरू हुई थी वह धर्मपुर से पहले रुक गई।
धर्मपुर एक ऐसा स्थान है जहां बरसात में भी पानी की कमी रहती है। आई पी एच जो इस गांव को पेय जल की आपूर्ति करता है वह संतुष्ट है आठ 10 दिन बाद पानी की साप्लाई करके। यह लावारिस सड़क जिसमें से कुछ लोग पाइप नहीं ले जाने दे रहे एक पक्का बहना बना हुआ है। पी डब्ल्यू डी ने कहा कि भाई हमने एक बार धर्मपुर से बेहड़े के ख़ेच तक और उससे भी आगे तक सड़क बना दी अब लोग जाने, सरकार जाने, आई पी एच जाने, पंचायत जाने, खंड विकास जानें, विधायक जाने, मंत्री जाने, मुख्यमंत्री जाने, पर पी डब्ल्यू डी को परेशान न करें। हमारे पास और भी बड़े बड़े काम हैं। अब यह सड़क टूटी है फूटी है इससे हमारा कोई सरोकार नहीं। हमे पैसे देदो तो हम सड़क की मुरम्मत कर देंगे नहीं तो हमसे बात मत करो। आई पी एच का कहना है हमारी पाइप सड़क में डालने की इजाज़त दिला दो हम पाइप डाल देंगे।
सरकार को इससे कुछ खास लेना देना नहीं। वैसे भी जिस देश में केंद्र सरकार कुछ गरीब पूंजीपति घरानों का 1, 43, 000 करोड़ रुपया माफ कर सकती हो उसके लिए ये पांच सात किलोमीटर की सड़क या 250- 300 करोड़ की पेय जल योजना का डूब जाना कहां मायने रखता है।
बेचारे गांव वाले अभी तक पेय जल और सड़क के लिए गुहार लगा रहे हैं तो ज़िला प्रशासन भी कानों में रुई डाल कर बैठा है जिस दिन यही भोले भाले लोग सड़क पर आ कर बैठ गए उस दिन तो प्रशासन की नींद टूटेगी ही, और दो मिनट में इतनी बड़ी समस्या का हल भी ढूंढ लेगा। तो जनाब उतनी नौबत आने से पहले तलाशिए न इसका हल। बनिये इस लावारिस सड़क के मां बाप। नहीं तो लोग जब अपनी पे आते हैं तो क्या नहीं करवा लेते। एक पुरानी कहावत है पर आज भी सार्थक है की “बकरी ने दूध तो दिया पर मिंगने डाल कर”। तो भाई बिना “मिंगनो” वाला दूध पिलादो न यार।
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