अमृतसर, फेस2न्यूज:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशों के विरुद्ध जनजागरण के लिए हजारों विद्यार्थियों को इकट्ठा करके गुरुद्वारा में प्रार्थना करवाने का काम तो अच्छा किया है। चाहे कुछ लोग इसे राजनीतिक नाटक कह रहे हैं, लेकिन बहुत अच्छा होता मुख्यमंत्री यह भी कहते कि शराब नशा है और शराब से समाज का सारा ताना बाना टूट जाता है। परिवार बिखर जाते हैं। परिवारों की गरीबी और क्लेश शराब के कारण है। इससे भी अच्छा यह होता कि जितने बच्चे इस कार्यक्रम में लाए गए थे या बुलाए गए थे उनसे भी पूछते कि किस—किस के परिवार में पिता—भाई या अन्य रिश्तेदार शराब पीते हैं। उससे कितना नुकसान उनके परिवारों को हो रहा है और बच्चों को कितनी कठिनाइयां उस परिवार में आती हैं जिसके मुखिया शराबी हैं। जब तक सरकार शराब को नशा नहीं मानेगी नशा बंदी का नाम लेना भी ठीक नहीं। ये कहना है पूर्व में पंजाब की मंत्री रही श्रीमती लक्ष्मीकांता चावला का।
यह तो अच्छा है कि मुख्यमंत्री ने यह कार्यक्रम गुरुद्वारा में करवाया, पर अफसोस है कि वे रात बिताने के लिए किसी पांच सात तारा होटल का ही अपने लिए प्रबंध करवाते हैं। क्या हमारे इतने बड़े गुरुद्वारा की किसी भी सराय का कोई कमरा ऐसा नहीं जो उनके रहने के लिए सही हो। पिछले कार्यक्रम में भी ताज होटल पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और वे रुपये जनता का पैसा है। किसी की अपनी कमाई नहीं। मुझे ऐसा लगता है कि आज के शासकों को डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद, श्री लाल बहादुर शास्त्री, डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री गुलजारी लाल नंदा आदि के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए और सादगी का जीवन व्यतीत करना चाहिए।
कम से कम जनता के पैसे को वे अपनी सुख सुविधा के लिए खर्च न करें।
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नशों के विरुद्ध मुख्यमंत्री पंजाब का कदम तो अच्छा, पर शराब क्या है यह बताएं?
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