Thursday, 10 September 2026
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चंदे के धंधे में रसीद का क्या काम?

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

देखो जी हर धंधे के अपने उसूल होते हैं। चंदे के धंधे के भी अपने उसूल हैं। यह तो विश्वास पे चलता है तो रसीद कहे की। लोग तो वैसे ही बात का बतंगड़ बना देते हैं। बस उन्हें कोई मुद्दा चाहिए। आजकल चंदे के धंधे के पीछे पड़ गए। दो चार भक्तों को ट्रस्ट से इस्तीफा देना पड़ गया। सुना आठ “ईमानदार” भक्तों के खिलाफ एफ आई आर भी दर्ज की गई है। बहुत नाइंसाफी है।

एक संस्था पिछले सौ साल से भी अधिक समय से बिना रजिस्ट्रेशन करवा बिना चंदे का हिसाब दिये बिना आयकर दिए आराम से काम चला रही है। वे लोग पहले तो झंडा भी अपना ही इस्तेमाल करते थे। उन पर तो कोई सवाल नहीं उठाता। अब ये बेचारे अभी अभी अस्तिव में आए हैं और इन पर इतने बड़े बड़े आरोप। भले आदमी हैं, पूरी तरह से भक्ति में लीन। सांसारिक मोह माया से दूर। अब इन्हें क्या पता कि रसीद नाम की कोई चीज़ भी होती है। अब चांदी की ईंटें दी थी। इन्होंने उन्हें किसी बिल्डिंग की कंस्ट्रक्शन में लगा दिया होगा। इनके लिए तो सोना,चांदी, धन दौलत सभी कुछ मिट्टी ही तो है। इसी तरह एक बड़े मंदिर के तहखाने में सदियों से रखा कई टन सोना पीतल हो गया, अब इसमें किसी का क्या कसूर? यह तो अच्छा हुआ उस पर कोई जांच नहीं बिठाई गई, नहीं तो वैसे ही बात का बतंगड़ बन जाता।

इन भक्त लोगों की ईमानदारी पर सवाल उठाना पाप है, एक गुनाह है जिसके लिए भगवान हमे कभी माफ नहीं करेगा।
अभी कुछ समय पहले एक गरीब पुजारी अपनी बेटी की शादी में उसे केवल दस किलो सोने के जेवर ही दे पाए वो भी उसे नहीं पता कि कहां से आये थे। सब भगवान की कृपा से हुआ। अब सरकार मंदिर ट्रस्ट वालों से हिसाब मांग रही है। अरे, आस्था पर सवाल? बहुत बुरी बात है।

आज हम सभी को मिलजुल कर, एक साथ खड़े हो कर इन भक्तों को बचाना होगा। आज यह मामला आस्था से जुड़ गया है। चंदे का धंधा करने वालों बचाना जरूरी है। नहीं तो भविष्य में एक एक, दो दो करोड़ का दान देने वाला हर चलता फिरता भी रसीद मांगने लगेगा।