Monday, 06 July 2026
Breaking News
चंदे के धंधे में रसीद का क्या काम? कामरेड जगदीश भारद्वाज का जाना एक युग का अंत श्री गुरु रविदास सभा राम दरबार, फेज-1 की कमेटी भंग वुमेन एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के इंटर्न विद्यार्थियों ने एक माह का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक किया पूरा पासपोर्ट-बहस के बीच क्या देशव्यापी NRC की तैयारी संभव!  टिहरी गढ़वाल विकास परिषद की नव-निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न सीए देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका: मुख्यमंत्री श्री अमरनाथ यात्रा पर गए एक यात्री की रहस्यमयी मौत मनोरंजन जगत के दिग्गज सितारों से सजा आइकॉनिक गोल्ड स्ट्रीमिंग अवॉर्ड्स 2026 स्वर्गीय ओम प्रकाश गोयल मेमोरियल सीनियर महिला डे/नाइट ट्वेंटी-20 कैश प्राइज़ क्रिकेट टूर्नामेंट का पहला संस्करण अब 8 जुलाई से
मनोरंजन Trending

चंदे के धंधे में रसीद का क्या काम?

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

देखो जी हर धंधे के अपने उसूल होते हैं। चंदे के धंधे के भी अपने उसूल हैं। यह तो विश्वास पे चलता है तो रसीद कहे की। लोग तो वैसे ही बात का बतंगड़ बना देते हैं। बस उन्हें कोई मुद्दा चाहिए। आजकल चंदे के धंधे के पीछे पड़ गए। दो चार भक्तों को ट्रस्ट से इस्तीफा देना पड़ गया। सुना आठ “ईमानदार” भक्तों के खिलाफ एफ आई आर भी दर्ज की गई है। बहुत नाइंसाफी है।

एक संस्था पिछले सौ साल से भी अधिक समय से बिना रजिस्ट्रेशन करवा बिना चंदे का हिसाब दिये बिना आयकर दिए आराम से काम चला रही है। वे लोग पहले तो झंडा भी अपना ही इस्तेमाल करते थे। उन पर तो कोई सवाल नहीं उठाता। अब ये बेचारे अभी अभी अस्तिव में आए हैं और इन पर इतने बड़े बड़े आरोप। भले आदमी हैं, पूरी तरह से भक्ति में लीन। सांसारिक मोह माया से दूर। अब इन्हें क्या पता कि रसीद नाम की कोई चीज़ भी होती है। अब चांदी की ईंटें दी थी। इन्होंने उन्हें किसी बिल्डिंग की कंस्ट्रक्शन में लगा दिया होगा। इनके लिए तो सोना,चांदी, धन दौलत सभी कुछ मिट्टी ही तो है। इसी तरह एक बड़े मंदिर के तहखाने में सदियों से रखा कई टन सोना पीतल हो गया, अब इसमें किसी का क्या कसूर? यह तो अच्छा हुआ उस पर कोई जांच नहीं बिठाई गई, नहीं तो वैसे ही बात का बतंगड़ बन जाता।

इन भक्त लोगों की ईमानदारी पर सवाल उठाना पाप है, एक गुनाह है जिसके लिए भगवान हमे कभी माफ नहीं करेगा।
अभी कुछ समय पहले एक गरीब पुजारी अपनी बेटी की शादी में उसे केवल दस किलो सोने के जेवर ही दे पाए वो भी उसे नहीं पता कि कहां से आये थे। सब भगवान की कृपा से हुआ। अब सरकार मंदिर ट्रस्ट वालों से हिसाब मांग रही है। अरे, आस्था पर सवाल? बहुत बुरी बात है।

आज हम सभी को मिलजुल कर, एक साथ खड़े हो कर इन भक्तों को बचाना होगा। आज यह मामला आस्था से जुड़ गया है। चंदे का धंधा करने वालों बचाना जरूरी है। नहीं तो भविष्य में एक एक, दो दो करोड़ का दान देने वाला हर चलता फिरता भी रसीद मांगने लगेगा।